बी के झा, एन एस के
NSK news India



पटना, 25 अक्टूबर
बिहार की सियासत में जनता दल यूनाइटेड (JDU) से मोकामा विधायक अनंत सिंह के निष्कासन के बाद विवाद थमने के बजाय नया रंग लेता दिखाई दे रहा है। पार्टी ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है, लेकिन मोकामा में उनके समर्थकों के तेवर देखकर ऐसा नहीं लगता कि इस फैसले से उनके खेमे में मायूसी छाई है। अनंत सिंह के आवास के बाहर समर्थकों ने देर रात आतिशबाजी कर जश्न मनाया।
घर के भीतर मिठाइयां तैयार होने की खबरों के बीच अब एक और सवाल ने जोर पकड़ लिया है—क्या ‘छोटे सरकार’ अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाने की तैयारी में हैं?अनंत सिंह के समर्थकों का कहना है कि फिलहाल वे पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं और आगे का फैसला खुद लेंगे। कुछ समर्थकों ने दावा किया कि अनंत सिंह चाहें तो नई पार्टी बनाने में देर नहीं करेंगे। हालांकि, नई पार्टी के गठन को लेकर अनंत सिंह की ओर से कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
निष्कासन पर मातम नहीं, समर्थकों ने मनाया जश्न
जेडीयू से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अनंत सिंह के आवास पर समर्थकों की भीड़ जुटने और आतिशबाजी किए जाने की खबर सामने आई। समर्थकों के इस उत्साह को पार्टी नेतृत्व के फैसले के प्रति उनकी नाराजगी और अनंत सिंह के प्रति भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।आवास के बाहर जश्न का माहौल था, वहीं अंदर हलवाई मिठाइयां तैयार करने में जुटे दिखाई दिए।
समर्थकों की मानें तो अनंत सिंह के राजनीतिक प्रभाव पर निष्कासन का कोई खास असर नहीं पड़ेगा।हालांकि, समर्थकों का उत्साह अपने आप में चुनावी समर्थन का प्रमाण नहीं है। इसका वास्तविक राजनीतिक असर आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि जेडीयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह का खेमा पीछे हटने के बजाय आक्रामक राजनीतिक संदेश देने में जुटा है।
‘छोटे सरकार चाहें तो अभी बना दें नई पार्टी’
अनंत सिंह के समर्थक सौरव सिसोदिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि छोटे सरकार चाहें तो अभी अपनी नई पार्टी बना सकते हैं, लेकिन फिलहाल वे पूरे घटनाक्रम को देख रहे हैं। उनके मुताबिक, समय आने पर अनंत सिंह खुद फैसला लेंगे।समर्थक ने यह भी दावा किया कि निष्कासन से अनंत सिंह को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
उनका कहना था कि अनंत सिंह ने जेडीयू को पूरी ताकत से समर्थन दिया था और नीतीश कुमार के प्रति अपनी निष्ठा भी लगातार जाहिर की थी।उन्होंने आरोप लगाया कि अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई नीतीश कुमार को जानकारी दिए बिना की गई। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।समर्थकों के इन बयानों से संकेत मिलता है कि अनंत सिंह का खेमा फिलहाल अपने अगले राजनीतिक कदम के विकल्प खुले रखना चाहता है। नई पार्टी का गठन, किसी अन्य राजनीतिक मंच से जुड़ना या स्वतंत्र रणनीति अपनाना—इनमें से किस रास्ते पर आगे बढ़ा जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
अनुज सिंह की जीत का दावा, चुनावी नतीजों पर टिकी निगाहें
अनंत सिंह के समर्थकों ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह की जीत का भरोसा भी जताया है। गौरतलब है कि विधान परिषद चुनाव के दौरान अनुज सिंह के समर्थन को लेकर ही अनंत सिंह और जेडीयू के बीच विवाद गहराया था।जेडीयू ने पार्टी उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करने और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के बीच अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की।
इसके बाद राजनीतिक टकराव और तेज हो गया।अब अनंत सिंह के समर्थक अनुज सिंह की जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। हालांकि, चुनाव में किस उम्मीदवार को सफलता मिलेगी, इसका फैसला मतगणना और आधिकारिक परिणाम से ही होगा।अनंत सिंह के आवास पर जश्न और अनुज सिंह की जीत को लेकर किए जा रहे दावे इस बात का संकेत हैं कि समर्थक इस पूरे विवाद को केवल पार्टी से निष्कासन के रूप में नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के अवसर के तौर पर भी पेश कर रहे हैं।
वाल्मीकि सिंह का हमला—‘दो-चार लोग पार्टी को डुबाने में लगे हैं’
अनंत सिंह के निष्कासन को लेकर जेडीयू के भीतर से भी असहमति की आवाज सामने आई है। पार्टी के पूर्व एमएलसी वाल्मीकि सिंह ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ लोग पार्टी का नेतृत्व करते हुए उसे नुकसान पहुंचा रहे हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि जेडीयू में नीतीश कुमार के समर्थकों और निशांत कुमार को आगे बढ़ते देखना चाहने वाले नेताओं के समर्थकों को धीरे-धीरे किनारे किया जा रहा है।
वाल्मीकि सिंह ने अनंत सिंह के खिलाफ हुई कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए था।उनके मुताबिक, अनंत सिंह ने दूसरे पक्ष की मदद जरूर की, लेकिन वे लगातार नीतीश कुमार और निशांत कुमार का नाम लेते रहे।वाल्मीकि सिंह का बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे निष्कासन के फैसले पर पार्टी से जुड़े एक पूर्व जनप्रतिनिधि की असहमति सामने आई है। हालांकि, उनके आरोपों से अपने आप यह साबित नहीं होता कि जेडीयू में किसी खास गुट को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।फिर भी यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर नेतृत्व, अनुशासन और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर जारी बहस को और तेज कर सकता है।
क्या नीतीश कुमार के समर्थकों में बढ़ रही है नाराजगी?
अनंत सिंह के निष्कासन के बाद उनके समर्थकों और वाल्मीकि सिंह के बयानों में एक साझा राजनीतिक संदेश दिखाई देता है। दोनों ही पक्षों से नीतीश कुमार के प्रति समर्थन जताते हुए पार्टी के मौजूदा नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं।अनंत सिंह पहले ही कह चुके हैं कि उनके मन में नीतीश कुमार के लिए सम्मान बना रहेगा, लेकिन वे जेडीयू के मौजूदा नेतृत्व के फैसलों से सहमत नहीं हैं।
दूसरी ओर, वाल्मीकि सिंह ने भी नीतीश कुमार और निशांत कुमार के समर्थकों को किनारे किए जाने का आरोप लगाया है।इन बयानों से जेडीयू के भीतर असंतोष की चर्चा को बल मिल सकता है। लेकिन यह तय करने के लिए कि नाराजगी कितनी व्यापक है और उसका संगठन पर कितना प्रभाव पड़ेगा, अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाओं और पार्टी के अगले कदमों पर नजर रखनी होगी।
एक्शन जेडीयू का, लेकिन राजनीतिक चुनौती अनंत सिंह के सामने भी
जेडीयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह के समर्थक भले ही उत्साह में नजर आ रहे हों, लेकिन आगे की राजनीतिक राह आसान नहीं होगी। यदि अनंत सिंह अपनी अलग पार्टी बनाते हैं, तो उन्हें केवल अपने समर्थकों का उत्साह बनाए रखने से आगे बढ़कर संगठन खड़ा करना होगा।नई पार्टी के लिए कार्यकर्ताओं का नेटवर्क, चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों का चयन और व्यापक जनसमर्थन जुटाना बड़ी चुनौतियां होंगी।
मोकामा में उनका प्रभाव कितना व्यापक राजनीतिक समर्थन हासिल कर सकता है, यह भी भविष्य के घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।दूसरी ओर, जेडीयू के लिए भी यह देखना अहम होगा कि अनंत सिंह के निष्कासन का असर उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में कितना पड़ता है। पार्टी के फैसले का राजनीतिक परिणाम केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई तक सीमित रहेगा या स्थानीय समीकरणों में बदलाव लाएगा, इसका आकलन अभी नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष:
नई पार्टी के संकेत या दबाव बनाने की रणनीति?
अनंत सिंह के आवास पर जश्न, समर्थकों की ओर से नई पार्टी बनाने की संभावना और पूर्व एमएलसी वाल्मीकि सिंह के विरोधी बयान ने बिहार की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या अनंत सिंह वास्तव में अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतरेंगे? क्या जेडीयू के भीतर इस कार्रवाई को लेकर असंतोष और बढ़ेगा?
और क्या अनुज सिंह के समर्थन का विवाद आगे भी राजनीतिक टकराव की वजह बना रहेगा?
फिलहाल इन सवालों के जवाब भविष्य के घटनाक्रम में छिपे हैं। अनंत सिंह की ओर से नई पार्टी की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए अभी उनके अगले कदम को लेकर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
लेकिन एक बात स्पष्ट है—जेडीयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह का खेमा राजनीतिक रूप से चुप बैठने के मूड में नहीं दिख रहा।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि समर्थकों का यह जोश किसी नई राजनीतिक पहल में बदलता है या फिलहाल पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने तक सीमित रहता है।
