बी के झा
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नई दिल्ली, 21 अगस्त
दिल्ली के व्यस्त कारोबारी क्षेत्र करोल बाग में शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने राजधानी की पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया। प्यारे लाल रोड स्थित एक पुरानी इमारत का हिस्सा अचानक ढह गया, जिससे तीन लोग मलबे में दब गए।
राहत अभियान के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं।यह हादसा उस समय हुआ जब इमारत में मरम्मत और आंशिक ध्वस्तीकरण (डेमोलिशन) का कार्य चल रहा था।
सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे तथा कई घंटों तक मलबा हटाकर खोज एवं बचाव अभियान चलाया।
हादसा कैसे हुआ?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर करीब 12 बजे अचानक तेज धमाके जैसी आवाज आई और देखते ही देखते इमारत का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। आसपास के दुकानदार और स्थानीय लोग सबसे पहले राहत के लिए दौड़े और मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास किया।
दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारियों ने बताया कि घायलों को तत्काल जीवनमाला अस्पताल भेजा गया, जबकि यह सुनिश्चित करने के लिए अभियान जारी रखा गया कि मलबे के नीचे कोई अन्य व्यक्ति न फंसा हो।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल
प्रारंभिक जानकारी बताती है कि भवन काफी पुराना और जर्जर था। यही तथ्य अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है—यदि इमारत की हालत पहले से खराब थी, तो मरम्मत कार्य के दौरान पर्याप्त सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं हुआ?
क्या भवन का तकनीकी निरीक्षण कराया गया था?
क्या श्रमिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम मौजूद थे?
दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषण: हादसा नहीं, शहरी प्रशासन की चेतावनी
करोल बाग की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि दिल्ली के पुराने बाजारों में मौजूद हजारों जर्जर भवनों की वास्तविकता को उजागर करती है। राजधानी के कई इलाकों—करोल बाग, सदर बाजार, चावड़ी बाजार और पुरानी दिल्ली—में दशकों पुरानी इमारतों में व्यापार और आवास साथ-साथ संचालित होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित संरचनात्मक ऑडिट की कमी भविष्य में ऐसे हादसों का जोखिम बढ़ाती है।
सरकार और विपक्ष की संभावित राजनीतिक दिशा
फिलहाल इस मामले में विस्तृत आधिकारिक राजनीतिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा पुरानी इमारतों की सुरक्षा और नगर निकायों की जवाबदेही से जुड़ सकता है।
सरकार पर जर्जर भवनों का व्यापक सर्वे, अवैध निर्माण की जांच और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने का दबाव बढ़ सकता है।
विपक्ष संभवतः नगर प्रशासन की लापरवाही, भवन निरीक्षण व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा को लेकर सरकार से जवाब मांग सकता है।
समाजसेवी संस्थाओं की मांग
स्थानीय समाजसेवी संगठनों और नागरिक समूहों ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए तीन प्रमुख मांगें उठाई हैं—
करोल बाग सहित सभी पुराने बाजारों की जर्जर इमारतों का तत्काल स्ट्रक्चरल ऑडिट।
मरम्मत और डेमोलिशन कार्य के लिए अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएं।
मृतक के परिवार को उचित मुआवजा तथा घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करे।
आगे क्या?
जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि हादसा तकनीकी लापरवाही, कमजोर संरचना या सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का परिणाम था।
लेकिन एक बात स्पष्ट है—यदि दिल्ली की पुरानी इमारतों की समय रहते वैज्ञानिक जांच नहीं हुई, तो करोल बाग जैसी त्रासदियां भविष्य में और भी बड़े रूप में सामने आ सकती हैं।
