बी के झा
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नई दिल्ली, 5 सितंबर
राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन और सड़क यातायात—दोनों मोर्चों पर बड़ा बदलाव जमीन पर आकार ले रहा है। पश्चिमी दिल्ली में दीपाली चौक से कृष्णा पार्क एक्सटेंशन के बीच एलिवेटेड मेट्रो कॉरिडोर का ढांचा तैयार हो चुका है, जबकि स्टेशनों को अंतिम रूप देने का काम तेजी से चल रहा है। सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा तो दिसंबर के अंत तक इस हिस्से पर मेट्रो परिचालन शुरू हो सकता है।यह सिर्फ एक नए मेट्रो सेक्शन के शुरू होने की खबर नहीं है, बल्कि पश्चिमी दिल्ली के उन इलाकों के लिए कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव है, जहां सड़क यातायात का दबाव लगातार बढ़ता रहा है।
एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार, अब ट्रेनों का इंतजार
कृष्णा पार्क एक्सटेंशन से दीपाली चौक के बीच बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर का सिविल ढांचा तैयार हो चुका है। स्टेशनों पर भी निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर, लिफ्ट और एस्केलेटर लगाए जा रहे हैं।यह कॉरिडोर फेज-4 की 29.262 किलोमीटर लंबी जनकपुरी पश्चिम-आरके आश्रम मेट्रो लाइन का हिस्सा है। पूरी लाइन पर कुल 22 स्टेशन प्रस्तावित हैं।इस परियोजना का एक हिस्सा पहले ही यात्रियों के लिए खुल चुका है।
जनकपुरी पश्चिम से कृष्णा पार्क एक्सटेंशन के बीच 1.81 किलोमीटर लंबे भूमिगत सेक्शन पर पिछले वर्ष 5 जनवरी को मेट्रो सेवा शुरू की गई थी। अब इसके आगे एलिवेटेड हिस्से के शुरू होने से इस कॉरिडोर की उपयोगिता और बढ़ जाएगी।
दिसंबर का इंतजार, पश्चिमी दिल्ली को मिल सकती है बड़ी राहत
मेट्रो का यह विस्तार खास तौर पर उन यात्रियों के लिए अहम माना जा रहा है, जिन्हें रोजाना सड़क मार्ग से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से सड़क पर निजी वाहनों और बसों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।हालांकि अंतिम परिचालन तिथि आधिकारिक रूप से तय होने तक दिसंबर में सेवा शुरू होने को संभावित समयसीमा के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
पूर्वी दिल्ली में भी जाम पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक
’इधर, पूर्वी दिल्ली में सरकार ने जाम की समस्या से निपटने के लिए सड़क के डिजाइन और ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव की तैयारी की है। कड़कड़ी मोड़ से यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तक भारतेंदु हरिश्चंद्र मार्ग को सिग्नल फ्री किया जाएगा।इस मार्ग पर मौजूद दो ट्रैफिक सिग्नल हटाए जाएंगे और छह स्थानों पर यू-टर्न विकसित किए जाएंगे। यानी लाल बत्ती पर वाहनों की लंबी कतार लगाने के बजाय ट्रैफिक को यू-टर्न व्यवस्था के जरिए संचालित करने की योजना है। पीडब्ल्यूडी के मुताबिक, इस काम को इस वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
2.209 किलोमीटर की सड़क, लेकिन ट्रैफिक का बड़ा दबाव
भारतेंदु हरिश्चंद्र मार्ग करीब 2.209 किलोमीटर लंबा है। यह कड़कड़ी मोड़ से शुरू होकर हरगोबिंद एन्क्लेव, दयानंद विहार, कड़कड़डूमा गांव, जागृति एन्क्लेव और आनंद विहार होते हुए राम विहार के पास मास्टर सोमनाथ मार्ग से जुड़ता है।दयानंद विहार और कड़कड़डूमा मेट्रो स्टेशन के आसपास मौजूद ट्रैफिक सिग्नल इस मार्ग के यातायात को प्रभावित करते हैं। विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर और आईटीओ की तरफ से आने वाले वाहनों के लिए यह रास्ता यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, सूरजमल विहार, विवेक विहार, योजना विहार, सविता विहार और श्रेष्ठ विहार की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। यही वजह है कि अपेक्षाकृत छोटा मार्ग होने के बावजूद यहां वाहनों का दबाव काफी रहता है।
कड़कड़डूमा TOD परियोजना को भी मिलेगा फायदा
सिग्नल फ्री व्यवस्था का असर सिर्फ जाम तक सीमित नहीं रहने वाला। यातायात सुगम होने से डीडीए की कड़कड़डूमा ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) परियोजना तक पहुंच भी आसान होने की उम्मीद है।यानी एक तरफ पश्चिमी दिल्ली में मेट्रो नेटवर्क विस्तार के जरिए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ पूर्वी दिल्ली में सड़क यातायात की अड़चनों को हटाने की कवायद चल रही है।
दिल्ली की तस्वीर बदलने वाला कनेक्टिविटी मॉडल
मेट्रो का विस्तार और सड़कों को सिग्नल फ्री करने की योजना—दोनों को अलग-अलग परियोजनाओं के तौर पर देखने के बजाय दिल्ली की बदलती परिवहन व्यवस्था के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।पश्चिमी दिल्ली में ट्रैक पर रफ्तार बढ़ाने की तैयारी है, तो पूर्वी दिल्ली में सड़क पर जाम की ‘ब्रेक’ हटाने की कवायद।
अब असली परीक्षा इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और जमीन पर यात्रियों को अपेक्षित राहत दिलाने की होगी।
दिल्ली को सिर्फ नई सड़कें और नई मेट्रो लाइनें नहीं, बल्कि ऐसी परिवहन व्यवस्था चाहिए जिसमें कम समय, कम जाम और बेहतर कनेक्टिविटी—तीनों एक साथ दिखाई दें।
