बी के झा, एन एस के (NSK Delhi)
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नई दिल्ली, 15 अक्टूबर
कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच अब तक संदेह, दूरी और अलग-अलग राजनीतिक रास्तों की चर्चा होती रही है। लेकिन राहुल गांधी की ओर से CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं को हाई टी में आमंत्रित करने की कथित कोशिश ने दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या कांग्रेस अब इस संगठन को अपने व्यापक विरोध अभियान में साथ लाने की संभावनाएं तलाश रही है?
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि कांग्रेस ने मंगलवार को CJP के नेताओं तक पहुंचने के लिए वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण से संपर्क साधने का आग्रह किया था। राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी में विपक्षी गठबंधन के नेताओं, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और छात्र नेताओं को आमंत्रित किया गया था।
हालांकि, इस घटनाक्रम को राहुल गांधी और अभिजीत दीपके के बीच व्यक्तिगत दोस्ती या किसी औपचारिक राजनीतिक समझौते का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। उपलब्ध जानकारी से इतना संकेत जरूर मिलता है कि कांग्रेस के भीतर CJP के साथ संवाद की संभावनाओं पर विचार किया गया। लेकिन दोनों के बीच किसी स्थायी साझेदारी पर सहमति बनी है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशांत भूषण बने संभावित संपर्क सूत्र, लेकिन बातचीत कितनी आगे बढ़ी?
रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने CJP तक पहुंचने के लिए प्रशांत भूषण से मध्यस्थता करने का अनुरोध किया था। प्रशांत भूषण के करीबी सूत्रों ने भी कांग्रेस की ओर से संपर्क किए जाने की बात कही। हालांकि, उस समय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र में थे। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम के बाद CJP के कुछ वरिष्ठ नेता पुलिस हिरासत में थे। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का दावा है कि दीपके से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वह निमंत्रण को लेकर खास उत्साहित नहीं थे।
यहां राजनीतिक तस्वीर के दो पहलू हैं।
पहला, कांग्रेस की ओर से संपर्क की कोशिश विपक्षी आंदोलन का दायरा बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
दूसरा, CJP की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और कांग्रेस के प्रति उसका रुख किसी भी संभावित सहयोग को आसान नहीं बनाते।इसलिए हाई टी का यह प्रसंग फिलहाल औपचारिक गठबंधन से ज्यादा राजनीतिक संवाद और संभावित समीकरणों की तलाश के रूप में देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस का पुराना संदेह बनाम नई राजनीतिक जरूरत
CJP मई में सोशल मीडिया पर चर्चा में आई थी। इसके बाद जून-जुलाई में परीक्षा में कथित पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर उसके आंदोलन ने ध्यान खींचा। संगठन ने छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश की।इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व के एक प्रभावशाली हिस्से में CJP को लेकर संदेह रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के कुछ नेताओं का मानना रहा है कि यह संगठन आम आदमी पार्टी (AAP) की शाखा या उसका राजनीतिक फ्रंट हो सकता है। हालांकि, यह कांग्रेस के कुछ नेताओं की धारणा है, कोई प्रमाणित तथ्य नहीं।
कांग्रेस की दुविधा भी यहीं से शुरू होती है। एक ओर वह विपक्षी राजनीति में अपनी केंद्रीय भूमिका बनाए रखना चाहती है, तो दूसरी ओर युवाओं और नागरिक समाज के ऐसे संगठनों को पूरी तरह दूर नहीं रखना चाहती, जो चुनावी प्रक्रियाओं और सरकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे अभियान ने इस जरूरत को और बढ़ाया है। कांग्रेस का तर्क है कि यदि अलग-अलग संगठन संवैधानिक अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, तो उनके साथ संवाद और साझा कार्रवाई की संभावनाएं तलाशना विपक्ष के हित में हो सकता है।
राहुल गांधी का संदेश: संगठन अलग, मुद्दा साझा
राहुल गांधी ने पहले भी संकेत दिया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों को अलग-अलग संगठनों की गतिविधियों के बजाय व्यापक राजनीतिक अभियान के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।उनका संदेश था कि संविधान की रक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खड़े होने वाले लोगों का समर्थन किया जाना चाहिए, चाहे वे किसी भी संगठन से जुड़े हों।यह रुख कांग्रेस की रणनीति में एक महत्वपूर्ण पहलू सामने लाता है। पार्टी केवल पारंपरिक विपक्षी दलों के साथ ही नहीं, बल्कि छात्र संगठनों, युवा समूहों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ भी मुद्दा आधारित एकजुटता दिखाना चाहती है।
हालांकि, साझा मुद्दे पर समर्थन और संगठनात्मक गठबंधन में अंतर होता है। किसी आंदोलन का समर्थन करना जरूरी नहीं कि उसके नेतृत्व, कार्यशैली या सभी राजनीतिक विचारों से सहमति का संकेत हो।
CJP की गिरफ्तारी पर राहुल का बयान, दीपके ने जताया आभार
CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन और तिरंगा फहराने के अधिकार का समर्थन किया। उन्होंने युवाओं को जेल भेजे जाने की कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि अलग-अलग झंडे तथा संगठन होने के बावजूद संवैधानिक अधिकारों की मांग करने वालों का उद्देश्य साझा हो सकता है।
राहुल गांधी के इस बयान पर अभिजीत दीपके ने आभार जताया। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए कांग्रेस नेता को धन्यवाद दिया।यह संवाद दोनों नेताओं के बीच संभावित राजनीतिक निकटता की अटकलों को बल देता है। फिर भी, दीपके का आभार व्यक्त करना या राहुल गांधी का गिरफ्तारी पर सवाल उठाना अपने आप में राजनीतिक गठबंधन का प्रमाण नहीं है।इस घटनाक्रम का महत्व इस बात में है कि कांग्रेस ने CJP के नेताओं से जुड़े विवाद पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी, जबकि पार्टी के भीतर इस संगठन को लेकर पहले से संदेह की खबरें सामने आती रही हैं।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन से कांग्रेस ने क्या सीखा?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन पर भी कांग्रेस की नजर थी। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि पार्टी को उम्मीद थी कि CJP अपने पहले के प्रदर्शनों की तरह बड़ी संख्या में लोगों को जुटा सकती है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई के कारण प्रदर्शन अपनी योजना के अनुरूप नहीं चल सका।इसके बाद इंडिया गठबंधन ने भी ज्ञानेश कुमार और SIR से जुड़े मुद्दों पर अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज की। हालांकि, CJP सोमवार को इंडिया गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च में शामिल नहीं हुई थी।यह दूरी बताती है कि मुद्दों में समानता होने के बावजूद दोनों पक्षों की संगठनात्मक रणनीति एक जैसी नहीं है।
कांग्रेस अपने गठबंधन के जरिए आंदोलन को व्यापक विपक्षी अभियान का रूप देना चाहती है, जबकि CJP अपनी स्वतंत्र पहचान पर जोर देती रही है।यही वजह है कि कांग्रेस की ओर से कथित निमंत्रण की खबर को केवल एक सामाजिक मुलाकात के तौर पर देखना भी अधूरा होगा। इसके पीछे विपक्षी राजनीति में नए समूहों के साथ संवाद की जरूरत हो सकती है, लेकिन किसी ठोस राजनीतिक समझौते की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
16 अक्टूबर का तिरंगा मार्च: CJP की स्वतंत्र ताकत दिखाने की कोशिश
अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च के लिए लोगों से जुटने की अपील की है। उन्होंने शाम पांच बजे राष्ट्रीय ध्वज के साथ पहुंचने का आह्वान किया और दूसरे शहरों में भी तिरंगा फहराने की अपील की।इस कार्यक्रम के जरिए CJP अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहती है कि उसके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद संगठन का आंदोलन जारी रहेगा।कांग्रेस के साथ संभावित संपर्क और CJP के अपने स्वतंत्र मार्च की घोषणा को साथ रखकर देखें, तो एक दिलचस्प राजनीतिक स्थिति बनती है।
दोनों पक्ष कुछ मुद्दों पर समान रुख रखते हैं, लेकिन CJP अपनी अलग पहचान बनाए रखने की कोशिश भी कर रही है।आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दोनों के बीच मुद्दा आधारित सहयोग आगे बढ़ता है या राजनीतिक दूरी कायम रहती है।
राजनीतिक विश्लेषण: क्या कांग्रेस अपना दायरा बढ़ा रही है?
इस पूरे घटनाक्रम को तीन प्रमुख पहलुओं से समझा जा सकता है।
पहला—युवा राजनीति की अहमियत। छात्र, युवा और सोशल मीडिया आधारित संगठन अब राजनीतिक विमर्श में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस के लिए ऐसे समूहों से संवाद करना विपक्षी अभियान का विस्तार करने का अवसर हो सकता है।
दूसरा—विपक्षी एकजुटता की व्यावहारिक चुनौती। SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त से जुड़े मुद्दों पर साझा विरोध होने के बावजूद सभी संगठनों की प्राथमिकताएं, नेतृत्व शैली और राजनीतिक हित समान नहीं हैं। केवल एक मुद्दे पर सहमति व्यापक गठबंधन की गारंटी नहीं देती।
तीसरा—CJP की स्वतंत्र पहचान। यदि पार्टी कांग्रेस या इंडिया गठबंधन के साथ मंच साझा करती है, तो उसे यह स्पष्ट करना होगा कि वह स्वतंत्र संगठन के रूप में अपनी भूमिका कैसे बनाए रखेगी।
वहीं, कांग्रेस को भी यह तय करना होगा कि वह CJP को केवल एक आंदोलनकारी समूह के रूप में देखती है या भविष्य में उसके साथ व्यापक राजनीतिक सहयोग की संभावना तलाशती है।
कानूनी और नागरिक समाज के नजरिए से भी एक बुनियादी सिद्धांत महत्वपूर्ण है—शांतिपूर्ण विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के सवालों पर किसी व्यक्ति का समर्थन करना उसके सभी राजनीतिक विचारों से सहमत होना नहीं है।
निष्कर्ष:
दोस्ती की चर्चा से आगे, विपक्षी राजनीति में नए संपर्कों का संकेत
राहुल गांधी की हाई टी के लिए CJP नेताओं तक पहुंचने की कथित कोशिश और अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी पर राहुल की प्रतिक्रिया ने दोनों के बीच राजनीतिक संवाद की संभावनाओं पर चर्चा शुरू कर दी है।
लेकिन इसे दोस्ती, गठबंधन या साझा राजनीतिक रणनीति का अंतिम संकेत मानने के लिए अभी पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कांग्रेस और CJP के बीच कुछ मुद्दों पर समानता दिखाई दे रही है, लेकिन उनके बीच राजनीतिक दूरी पूरी तरह खत्म हुई है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
आने वाले दिनों में हाई टी के निमंत्रण, प्रस्तावित तिरंगा मार्च और SIR के खिलाफ आंदोलन पर दोनों पक्षों के रुख से यह समझने में मदद मिलेगी कि यह केवल मुद्दा आधारित समर्थन है या विपक्षी राजनीति में किसी नए समीकरण की शुरुआत।
