बी. के. झा
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नई दिल्ली, 2 अक्टूबर
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत की कूटनीति को लेकर मॉस्को से एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांति प्रयासों की खुलकर सराहना की है। पुतिन ने कहा कि मोदी रूस के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों के बावजूद यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने का मुद्दा लगातार उठाते हैं और उनके पास ऐसा समाधान तलाशने के लिए “बहुत अच्छे विचार” हैं, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें।पुतिन ने यह टिप्पणी रूस में आयोजित वाल्दाई चर्चा के दौरान की।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की संघर्ष समाप्त करने में गहरी रुचि है और वे आपसी सहमति वाला समाधान खोजने की दिशा में सक्रिय हैं।
रूसी राष्ट्रपति ने भारत के प्रधानमंत्री के प्रयासों के लिए आभार जताते हुए कहा कि मॉस्को संघर्ष को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने की मोदी की इच्छा की सराहना करता है।
‘रिश्ते अच्छे हैं, फिर भी युद्ध खत्म करने की बात करते हैं’
पुतिन के बयान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि उन्होंने भारत-रूस के मजबूत संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी इसके बावजूद यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने का मुद्दा लगातार उठाते हैं।उन्होंने मोदी के रुख को तटस्थ लेकिन शांति-केंद्रित बताया। पुतिन के मुताबिक, मोदी की दिलचस्पी संघर्ष समाप्त करने में है और वे ऐसा समाधान चाहते हैं जो दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य हो।रूस की ओर से आया यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब युद्ध को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और भारत लगातार बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से समाधान की वकालत करता रहा है।
मोदी का संदेश- युद्ध का समाधान मैदान-ए-जंग में नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर देते रहे हैं। अगस्त 2026 में जापानी अखबार योमिउरी शिंबुन को दिए लिखित साक्षात्कार में मोदी ने कहा था कि भारत ने संघर्ष को लेकर सिद्धांत आधारित और मानवीय रुख अपनाया है तथा दोनों पक्षों के साथ भारत के संबंधों के कारण वह शांतिपूर्ण समाधान की कोशिशों को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।
मोदी का यह रुख इससे पहले भी सामने आता रहा है। सितंबर 2026 में रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के दौरान उन्होंने युद्ध को अनिश्चित रूप से जारी रखने के बजाय उसके अंत की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया था।
यानी नई दिल्ली का संदेश लगातार यही रहा है कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए तलाशा जाना चाहिए।
भारत की कूटनीति की परीक्षा भी
रूस और यूक्रेन दोनों से भारत के संबंधों को देखते हुए नई दिल्ली के सामने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी बनी हुई है। भारत ने रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक संबंधों को जारी रखते हुए यूक्रेन के साथ भी संवाद बनाए रखा है और युद्ध के समाधान के लिए कूटनीतिक रास्ते की वकालत की है।यही वजह है कि पुतिन द्वारा मोदी के प्रयासों की सार्वजनिक सराहना को केवल व्यक्तिगत प्रशंसा के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। यह उस भारतीय कूटनीतिक रुख की स्वीकार्यता का संकेत भी है, जिसमें नई दिल्ली किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय संघर्ष समाप्त करने के लिए संवाद की आवश्यकता पर जोर देती रही है। हालांकि, वास्तविक शांति समझौते की दिशा में अंतिम प्रगति रूस और यूक्रेन की सहमति तथा व्यापक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
सितंबर में दिल्ली में हुई थी मोदी-पुतिन की मुलाकात
मोदी और पुतिन की हालिया मुलाकात सितंबर में नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ व्यापार, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की थी।
दोनों देशों ने ‘प्रोग्राम फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2030’ के क्रियान्वयन समेत आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी बातचीत की।इस मुलाकात की पृष्ठभूमि में यूक्रेन संघर्ष का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। भारत जहां रूस के साथ अपने पारंपरिक रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ा रहा है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी लगातार युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।
मॉस्को से आया संदेश, दिल्ली की कूटनीति पर लगी मुहर?
पुतिन का ताजा बयान इसलिए भी ध्यान खींचता है क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों को सीधे शब्दों में स्वीकार किया है। रूस के राष्ट्रपति ने न केवल मोदी के शांति प्रयासों के लिए आभार जताया, बल्कि यह भी कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री के पास आपसी सहमति वाला समाधान तलाशने के लिए अच्छे विचार हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत की यह संवाद-केंद्रित भूमिका आगे चलकर रूस और यूक्रेन के बीच किसी ठोस शांति प्रक्रिया में व्यावहारिक योगदान में बदल पाएगी।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मॉस्को में प्रधानमंत्री मोदी के लगातार शांति संदेश को गंभीरता से लिया जा रहा है और रूस के शीर्ष नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से इसकी सराहना की है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबे होते साए के बीच भारत की कूटनीति के सामने अब अगली चुनौती यही होगी कि संवाद की आवाज को शांति की ठोस प्रक्रिया तक कैसे पहुंचाया जाए।
