झारखंड छात्र आंदोलन पर बोले- ‘कल बात करेंगे’, लेकिन बिहार की कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरा; बंटी यादव हत्याकांड को बनाया बड़ा राजनीतिक मुद्दा

बी के झा

NSK news Ind

पटना, 6 अगस्त

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता एवं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में झारखंड के चर्चित छात्र आंदोलन पर विस्तृत टिप्पणी करने से फिलहाल परहेज किया। जब उनसे आंदोलन को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने संक्षिप्त उत्तर दिया, “उस पर बात करेंगे… कल बात करेंगे।” हालांकि पूरी प्रेस वार्ता के दौरान उनका मुख्य फोकस बिहार की कानून-व्यवस्था, बंटी यादव हत्याकांड तथा राज्य में बढ़ते अपराधों पर सरकार को घेरने पर केंद्रित रहा।

दिलचस्प यह रहा कि जिस समय झारखंड का छात्र आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बना हुआ है और वहां सरकार छात्रों से वार्ता की तैयारी कर रही है, उसी समय तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर तत्काल राजनीतिक प्रतिक्रिया देने से बचते हुए संकेत दिया कि उनकी पार्टी बाद में अपना औपचारिक रुख स्पष्ट करेगी।

बंटी यादव हत्याकांड को बनाया सरकार पर हमले का आधार

प्रेस वार्ता में तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बंटी यादव ने कथित तौर पर क्षेत्र में चल रहे सेक्स रैकेट के खिलाफ आवाज उठाई थी और उसी संघर्ष की वजह से उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रारंभिक स्तर पर पुलिस की कार्रवाई अपेक्षित गति से नहीं हुई तथा जांच में गंभीर लापरवाही देखने को मिली।तेजस्वी ने बताया कि पीड़ित परिवार को राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से मिलने का समय दिलाया गया, जिसके बाद पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश अब भी जारी है।उन्होंने कहा कि बंटी यादव के परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है। इसी को देखते हुए राजद ने परिवार की सहायता का निर्णय लिया है।

उन्होंने घोषणा की कि बंटी यादव की दो बेटियों और एक बेटे की 12वीं कक्षा तक की शिक्षा का पूरा खर्च उनकी पार्टी वहन करेगी। इसके साथ ही परिवार को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक भी सौंपा गया।

सरकार से नौकरी और निष्पक्ष जांच की मांग

तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार से मांग की कि बंटी यादव की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए तथा पूरे मामले की किसी भी प्रकार के राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से मुक्त निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना था कि यदि हत्या के पीछे संगठित अपराध या अन्य प्रभावशाली तत्वों की भूमिका है तो उन्हें भी कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।

बढ़ते अपराधों को लेकर सरकार पर तीखा हमला

प्रेस वार्ता के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने बिहार में बढ़ते अपराधों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में दो-दो उपमुख्यमंत्री होने के बावजूद आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।उन्होंने दिनारा की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि मजदूरी मांगने गए एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्होंने घोषणा की कि उनकी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने जाएगा।इसके अलावा सीवान में हुई फायरिंग की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि कथित रूप से AK-47 जैसे हथियारों के इस्तेमाल की नौबत क्यों आई और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। साथ ही उन्होंने एक कार्यपालक पदाधिकारी (EO) की हत्या के मामले का उल्लेख करते हुए पूछा कि जिस विधायक का नाम सामने आया था, उसके विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई हुई।

झारखंड छात्र आंदोलन पर राजनीतिक चुप्पी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड में छात्र आंदोलन तेजी से राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुका है। ऐसे समय में तेजस्वी यादव का तत्काल प्रतिक्रिया देने से बचना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, संभव है कि राजद इस मुद्दे पर सहयोगी दलों के साथ विचार-विमर्श के बाद अपनी आधिकारिक रणनीति सार्वजनिक करना चाहती हो।दूसरी ओर, झारखंड सरकार ने आंदोलनरत छात्रों से संवाद का रास्ता अपनाने के संकेत दिए हैं। छात्रों ने भी वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया है, जिससे समाधान की संभावनाएं बढ़ी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनावों से पहले कानून-व्यवस्था का मुद्दा विपक्ष के प्रमुख चुनावी हथियारों में शामिल होता जा रहा है। उनका मानना है कि विपक्ष अपराध की घटनाओं को सरकार की प्रशासनिक विफलता के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि सत्तापक्ष इन्हें कानून के अनुसार निपटाए जा रहे आपराधिक मामले बता रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अपराध और रोजगार जैसे मुद्दे लगातार सुर्खियों में बने रहे तो आगामी चुनावी विमर्श का केंद्र विकास के साथ-साथ सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही भी बन सकता है।

कानूनविदों की राय

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हत्या के पीछे किसी संगठित आपराधिक गिरोह या अवैध गतिविधि का संबंध सामने आता है तो पुलिस का दायित्व केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना भी होगा। वे यह भी मानते हैं कि प्रत्येक आरोपी को संविधान और कानून के अनुरूप निष्पक्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया का अधिकार प्राप्त है और दोष सिद्ध होने तक किसी को अपराधी नहीं माना जा सकता।

समाजसेवियों और नागरिक संगठनों की प्रतिक्रिया

सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति सामाजिक बुराइयों या अपराध के विरुद्ध आवाज उठाने के कारण हिंसा का शिकार होता है तो यह पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय, पर्याप्त सुरक्षा तथा आर्थिक पुनर्वास उपलब्ध कराने की मांग की है।

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन का कहना है कि बंटी यादव हत्याकांड की जांच जारी है। पुलिस ने कई स्थानों पर छापेमारी कर कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया है तथा फरार आरोपियों की तलाश में अभियान जारी है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।

विपक्ष की व्यापक प्रतिक्रिया

विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि बिहार में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल साबित हो रही है। वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन इन आरोपों को राजनीतिक बताते हुए दावा कर रहा है कि राज्य में अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है और कानून अपना काम कर रहा है।

आगे की राजनीति पर नजर

अब निगाहें दो महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर टिकी हैं—पहला, झारखंड छात्र आंदोलन पर राजद का आधिकारिक रुख क्या होगा; और दूसरा, बंटी यादव हत्याकांड की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। दोनों मुद्दे आने वाले दिनों में बिहार और झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

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