बी के झा
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अयोध्या, 20 सितंबर
रामनगरी अयोध्या में नवंबर में प्रस्तावित 14 कोसी परिक्रमा से पहले प्रशासन ने परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण अभियान को और तेज कर दिया है। जनौरा नाका क्षेत्र में जिला प्रशासन ने नजूल की जमीन पर बने तीन मकानों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान प्रभावित लोगों की ओर से विरोध भी दर्ज कराया गया, जिसके मद्देनजर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।प्रशासन का कहना है कि जिन भवनों को हटाया गया, वे नजूल की जमीन पर बने थे और संबंधित प्रभावित लोगों को मुआवजे का भुगतान पहले ही किया जा चुका था। अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई से पहले भवन खाली करने के लिए प्रक्रिया अपनाई गई थी। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था और अदालत से मिले दिशा-निर्देशों के बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ाई।
मौके पर एडीएम वित्त एवं राजस्व अमित भट्ट और सीओ सिटी श्रीयश त्रिपाठी समेत पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कार्रवाई की निगरानी के साथ सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।परिक्रमा मार्ग की जमीन पर अब नहीं चलेगी ढिलाई
अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण की प्रक्रिया कोई अचानक शुरू हुई कार्रवाई नहीं है। जिला प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड में 2026 में इस परियोजना के लिए भूमि अर्जन संबंधी अधिसूचनाएं और सामाजिक प्रभाव आकलन से जुड़ी प्रक्रियाएं दर्ज हैं। अगस्त 2026 में जनपद के दो गांवों के लिए भूमि अर्जन अधिसूचना भी प्रकाशित की गई थी।यानी प्रशासन अब इस परियोजना को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय जमीन पर उतारने के चरण में है। इससे साफ है कि आने वाले समय में परिक्रमा मार्ग की जद में आने वाले अन्य निर्माणों को लेकर भी कार्रवाई का सिलसिला जारी रह सकता है।
इससे पहले जून में ककराही बाजार क्षेत्र में भी 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण के लिए कई निर्माण हटाए गए थे। उस कार्रवाई के दौरान एक पुराने शिव मंदिर को हटाए जाने को लेकर भी विवाद हुआ था और समाजवादी पार्टी के नेता अरुण निषाद ने मौके पर पहुंचकर विरोध दर्ज कराया था।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
अयोध्या में विकास और धार्मिक पर्यटन का विस्तार सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में है। 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण का उद्देश्य केवल सड़क को चौड़ा करना नहीं है, बल्कि भारी श्रद्धालु दबाव के दौरान पैदल यात्रियों, वाहनों और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही को व्यवस्थित करना भी है।लेकिन दूसरी तरफ जमीन, मकान और रोजी-रोटी से जुड़े लोगों के लिए यह कार्रवाई सीधे उनके जीवन से जुड़ा विषय है। यही वजह है कि हर ध्वस्तीकरण के साथ एक सवाल सामने आता है—क्या प्रभावित लोगों को पर्याप्त मुआवजा, वैकल्पिक व्यवस्था और प्रक्रिया की पूरी जानकारी मिली?
प्रशासन का पक्ष है कि मुआवजा दिया जा चुका है और न्यायिक प्रक्रिया का भी पालन किया गया। दूसरी ओर प्रभावित लोगों की आपत्तियां यह सवाल उठाती हैं कि कागज पर मुआवजा मिलना और जमीन पर किसी परिवार का वर्षों पुराना आशियाना खत्म होना, दोनों को केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है या नहीं।
स्थानीय लोगों के सवाल भी कम अहम नहीं
जनौरा क्षेत्र में पहले भी 14 कोसी परिक्रमा मार्ग से जुड़ी विकास परियोजनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर आपत्तियां सामने आती रही हैं। जून 2026 में नाला निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध किया था। उनका दावा था कि प्रस्तावित व्यवस्था से बड़ी संख्या में घर प्रभावित हो सकते हैं और उन्होंने जलनिकासी की योजना पर पुनर्विचार की मांग की थी।ऐसे में अब तीन मकानों पर हुई कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर एक बड़ा सवाल फिर खड़ा कर दिया है—क्या अयोध्या के विकास का मॉडल ऐसा बनाया जा सकता है जिसमें परिक्रमा मार्ग भी बेहतर हो और स्थानीय आबादी का विस्थापन भी न्यूनतम रखा जाए?
यही वह बिंदु है जहां प्रशासन की पारदर्शिता और संवाद की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रभावित परिवारों को कार्रवाई का आधार, मुआवजे का विवरण और आगे की पुनर्व्यवस्था स्पष्ट रूप से बताना प्रशासन के लिए भरोसा कायम करने का अहम माध्यम हो सकता है।
राजनीतिक नजरिए से भी संवेदनशील है मुद्दा
अयोध्या में सड़क चौड़ीकरण और निर्माण हटाने की कार्रवाई अब केवल प्रशासनिक विषय नहीं रह गई है। विपक्षी दल पहले भी परिक्रमा मार्ग से जुड़े ध्वस्तीकरण अभियानों पर सवाल उठा चुके हैं। जून की कार्रवाई में सपा नेता अरुण निषाद का विरोध दर्ज किया गया था।यही वजह है कि आने वाले दिनों में इस अभियान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
सत्ता पक्ष इसे अयोध्या के बुनियादी ढांचे और श्रद्धालुओं की सुविधा से जोड़ सकता है, जबकि विपक्ष और प्रभावित परिवार पुनर्वास, मुआवजे, प्रक्रिया और मानवीय पहलू को मुद्दा बना सकते हैं।हालांकि, इस पूरे विवाद में एक तथ्य महत्वपूर्ण है—14 कोसी परिक्रमा मार्ग के विस्तार की प्रक्रिया पहले से प्रशासनिक स्तर पर चल रही है और इसके लिए भूमि-अर्जन तथा सामाजिक प्रभाव आकलन से जुड़ी आधिकारिक प्रक्रियाएं भी सामने आ चुकी हैं।
नवंबर की परिक्रमा से पहले प्रशासन की अग्निपरीक्षा
2026 में 14 कोसी परिक्रमा 18 नवंबर को प्रस्तावित है। प्रशासन ने इसके मद्देनजर तैयारियां तेज कर दी हैं।श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मार्ग का चौड़ीकरण निश्चित रूप से प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन असली कसौटी यह होगी कि विकास कार्य कितनी तेजी से होता है और प्रभावित लोगों के अधिकारों का संरक्षण कितनी पारदर्शिता से किया जाता है।अयोध्या आज सिर्फ एक धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि तेजी से विकसित हो रहा बड़ा धार्मिक-पर्यटन केंद्र भी है। ऐसे में यहां सड़क, भूमि और भवनों से जुड़े हर फैसले का असर प्रशासनिक सीमा से कहीं आगे जाता है।
बुलडोजर की आवाज के साथ अयोध्या में एक बड़ा सवाल भी सुनाई दे रहा है—रामनगरी का विकास कितना तेज हो और उस विकास की कीमत कौन चुकाए?
एनएसके विश्लेषण:
14 कोसी परिक्रमा मार्ग का चौड़ीकरण श्रद्धालुओं की सुविधा और अयोध्या के आधारभूत ढांचे के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है।
लेकिन विकास की स्थायी स्वीकार्यता तभी मजबूत होगी, जब प्रशासनिक कार्रवाई के साथ मुआवजा, पारदर्शिता, न्यायिक प्रक्रिया और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास जैसे सवालों का भी स्पष्ट समाधान सामने आए।
