विकसित भारत का आधार नशा मुक्त युवा’, 100 सप्ताह के राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ; पीएम मोदी का जनभागीदारी पर जोर

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 2 अगस्त

वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में केंद्र सरकार ने रविवार को एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल करते हुए ‘नशा मुक्त युवा के लिए विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों, विशेषकर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का युवा स्वस्थ, जागरूक, आत्मविश्वासी और नशे जैसी सामाजिक बुराई से पूरी तरह मुक्त होगा।प्रधानमंत्री ने कहा कि नशा केवल किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि यह परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।

उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की लत युवाओं की प्रतिभा, ऊर्जा और सपनों को नष्ट कर देती है तथा सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर करती है।

‘यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, जनआंदोलन है’

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि 100 सप्ताह तक चलने वाला यह अभियान केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। उन्होंने विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई जनसहभागिता के बिना संभव नहीं है।उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने आसपास के युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करें तथा उन्हें शिक्षा, खेल, योग, कौशल विकास, नवाचार और राष्ट्र निर्माण जैसी सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास करें।

नशा: स्वास्थ्य ही नहीं, राष्ट्रीय विकास का भी प्रश्न

प्रधानमंत्री ने कहा कि नशे का सीधा असर देश की उत्पादक क्षमता, कानून-व्यवस्था और सामाजिक स्थिरता पर पड़ता है। यदि युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में जाएगा तो विकसित भारत का लक्ष्य भी प्रभावित होगा। इसलिए इस अभियान को सामाजिक चेतना का व्यापक आंदोलन बनाया जाना आवश्यक है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: ‘अभियान का समर्थन, लेकिन ठोस कार्रवाई भी जरूरी’

प्रधानमंत्री की इस पहल का विपक्षी दलों ने सिद्धांततः स्वागत किया, लेकिन इसके साथ ही सरकार से जमीनी स्तर पर और प्रभावी कार्रवाई की मांग भी की।कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि नशे के विरुद्ध जागरूकता अभियान स्वागतयोग्य है, किंतु इसके साथ मादक पदार्थों की तस्करी पर कठोर कार्रवाई, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण, सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करने, युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाने तथा नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की संख्या और गुणवत्ता में सुधार की दिशा में भी समान गंभीरता से कार्य किया जाना चाहिए।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि केवल जागरूकता कार्यक्रम पर्याप्त नहीं होंगे। जब तक नशे की आपूर्ति करने वाले संगठित गिरोहों पर कठोर प्रहार नहीं होगा और पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

हालांकि, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि केंद्र सरकार पिछले कई वर्षों से मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ व्यापक अभियान चला रही है। बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की जब्ती, तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई और जागरूकता कार्यक्रम इसी नीति का हिस्सा हैं। उनके अनुसार यह नया अभियान उन प्रयासों को जनभागीदारी के माध्यम से और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

विशेषज्ञ बोले—’रोकथाम और पुनर्वास साथ-साथ चलें’

नशा मुक्ति विशेषज्ञों का कहना है कि इस अभियान की सफलता केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं, बल्कि रोकथाम, परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन के समन्वित प्रयासों पर निर्भर करेगी। उनका मानना है कि युवाओं को सकारात्मक अवसर उपलब्ध कराना नशे की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय है।

शिक्षाविदों की राय

शिक्षाविदों ने सुझाव दिया कि विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रमों को नियमित बनाया जाए। विद्यार्थियों के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श, जीवन-कौशल शिक्षा और खेल-सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर उन्हें नशे से दूर रखा जा सकता है।

समाजसेवी संगठनों की अपील

सामाजिक संगठनों ने अभियान का स्वागत करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार नहीं जीत सकती। परिवार, समुदाय, शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक संगठन और स्वयं युवा यदि मिलकर जिम्मेदारी निभाएं, तभी स्थायी परिवर्तन संभव होगा।

राजनीतिक विश्लेषण: सामाजिक मुद्दे को राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री ने नशा मुक्ति को विकसित भारत के विजन से जोड़कर इसे केवल स्वास्थ्य या कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रहने दिया, बल्कि राष्ट्रीय विकास और मानव संसाधन निर्माण के व्यापक एजेंडे का हिस्सा बनाया है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि किसी भी राष्ट्रीय अभियान की वास्तविक सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन, राज्यों के सहयोग और जमीनी स्तर पर दिखाई देने वाले परिणामों से ही तय होगी।

जनभागीदारी से ही मिलेगा लक्ष्य

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने पुनः आह्वान किया कि प्रत्येक नागरिक इस अभियान का सहभागी बने और अपने परिवार, समाज तथा आसपास के युवाओं को नशे से दूर रखने का संकल्प ले। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयास, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के बल पर भारत नशा मुक्त समाज और विकसित राष्ट्र—दोनों लक्ष्यों की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करेगा।

नशे के विरुद्ध यह 100 सप्ताह का अभियान केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि भारत की युवा शक्ति, सामाजिक चेतना और विकसित राष्ट्र के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन बनने की क्षमता रखता है। इसकी वास्तविक सफलता सरकार, समाज, परिवार और युवाओं की साझा भागीदारी तथा निरंतर प्रयासों पर निर्भर करेगी।

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