बी के झा
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लखनऊ/वाराणसी/ नई दिल्ली, 4 सितंबर
दशहरा, दीपावली और छठ के त्योहार नजदीक आते ही घर लौटने की बेचैनी बढ़ने लगी है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काम करने वाले लाखों लोग इन दिनों पूर्वांचल और बिहार की ओर रुख करते हैं। सामान्य ट्रेनों में सीट मिलना मुश्किल होता है और प्लेटफॉर्म से लेकर जनरल डिब्बों तक भारी भीड़ दिखाई देती है। ऐसे में रेलवे ने त्योहारों के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को संभालने के लिए कई फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों का ऐलान किया है। इन ट्रेनों से उत्तर प्रदेश के साथ बिहार के यात्रियों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
लेकिन इस रेल घोषणा की कहानी सिर्फ टाइमटेबल तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पूर्वांचल से दिल्ली-पंजाब तक फैली रोजी-रोटी की कड़ी, त्योहार पर घर लौटने की सामाजिक मजबूरी और रेलवे के सामने हर साल खड़ी होने वाली क्षमता की चुनौती भी है।
वाराणसी से चंडीगढ़ तक स्पेशल ट्रेन, रास्ते में लखनऊ-बरेली-मुरादाबाद
रेलवे की योजना के मुताबिक ट्रेन संख्या 04227/04228 वाराणसी-चंडीगढ़-वाराणसी आरक्षित स्पेशल सप्ताह में दो दिन चलेगी। वाराणसी से यह सेवा 1 अक्टूबर से 29 नवंबर तक गुरुवार और रविवार को तथा चंडीगढ़ से 2आ अक्टूबर से 30 नवंबर तक निर्धारित है। इस रूट से वाराणसी, प्रतापगढ़, रायबरेली, लखनऊ, शाहजहांपुर, बरेली और मुरादाबाद जैसे शहरों के यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा।
यह ट्रेन महज एक अतिरिक्त रेल सेवा नहीं है। इसके रास्ते में आने वाले शहर उत्तर भारत के उस बड़े श्रमिक और कारोबारी नेटवर्क का हिस्सा हैं, जहां से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में रोजगार के लिए जाते हैं और त्योहारों पर वापस लौटते हैं।
वाराणसी-दिल्ली के बीच भी अतिरिक्त ट्रेन
ट्रेन संख्या 04209/04210 वाराणसी-दिल्ली-वाराणसी आरक्षित स्पेशल 2 अक्टूबर से 27 नवंबर तक वाराणसी से और 3 अक्टूबर से 28 नवंबर तक दिल्ली से चलेगी। वाराणसी से यह ट्रेन रात 10:15 बजे रवाना होकर तड़के 3:30 बजे लखनऊ और दोपहर 1:45 बजे दिल्ली पहुंचेगी।
वापसी में दिल्ली से शाम 6:50 बजे चलकर यह ट्रेन तड़के 3:50 बजे लखनऊ और सुबह 9:50 बजे वाराणसी पहुंचेगी। इसके प्रमुख ठहराव में मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़, रायबरेली, लखनऊ, हरदोई, रामपुर, मुरादाबाद, हापुड़ और गाजियाबाद शामिल हैं।
कुल 25 फेरे प्रस्तावित हैं, अयोध्या से आनंद विहार तक भी कनेक्टिविटी
अयोध्या कैंट से आनंद विहार के बीच प्रस्तावित विशेष सेवा भी उन यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें दीपावली और अन्य त्योहारों पर दिल्ली से पूर्वी उत्तर प्रदेश लौटना है। अयोध्या से शाम 6:20 बजे चलकर ट्रेन रात 8:45 बजे लखनऊ और अगले दिन सुबह 6:10 बजे आनंद विहार पहुंचने की व्यवस्था दी गई है।
वापसी में आनंद विहार से सुबह 9 बजे रवाना होकर ट्रेन शाम 6:20 बजे लखनऊ और रात 10 बजे अयोध्या कैंट पहुंचेगी। बाराबंकी, लखनऊ, शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद, अमरोहा, हापुड़ और गाजियाबाद जैसे प्रमुख स्टेशन इसके नेटवर्क में हैं।
चंडीगढ़-पटना और फिरोजपुर-पटना की कड़ी भी अहम
त्योहारों में बिहार जाने वाले यात्रियों को देखते हुए चंडीगढ़-पटना और फिरोजपुर कैंट-पटना के बीच भी फेस्टिवल स्पेशल सेवाओं का संचालन प्रस्तावित है। यानी रेलवे का यह नेटवर्क केवल यूपी के शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली-पंजाब-हरियाणा से बिहार तक त्योहारों की घर-वापसी को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
यही वजह है कि इन ट्रेनों का सबसे बड़ा लाभ बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के उन कामगारों को मिल सकता है जो सालभर महानगरों में काम करने के बाद दशहरा, दीपावली और छठ पर परिवार के बीच पहुंचना चाहते हैं।
राहत के साथ रेलवे की दूसरी चुनौती भी सामने
रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों की घोषणा तो कर दी है, लेकिन इसी अवधि में कुछ रेलखंडों पर निर्माण और इंटरलॉकिंग कार्य भी प्रस्तावित हैं। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर सितंबर-अक्टूबर में पावर और ट्रैफिक ब्लॉक के कारण बड़ी संख्या में ट्रेन सेवाएं प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
कुछ ट्रेनों को अंबाला कैंट तक सीमित किया जाएगा, जबकि कुछ के प्लेटफॉर्म और मार्ग में बदलाव होगा। रिपोर्टों के अनुसार चंडीगढ़ स्टेशन के काम से 442 ट्रेन यात्राएं प्रभावित हो सकती हैं।
यानी एक तरफ त्योहारों के लिए अतिरिक्त ट्रेनें चलाने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ निर्माण कार्यों के कारण यात्रियों को कुछ रूट पर अतिरिक्त परेशानी भी उठानी पड़ सकती है।
यात्रियों के लिए असली सवाल: ट्रेन बढ़ी, लेकिन सीट कितनी?
हर साल त्योहारों से पहले रेलवे स्पेशल ट्रेनें घोषित करता है। लेकिन यात्रियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि क्या अतिरिक्त ट्रेनें वास्तविक भीड़ के अनुपात में पर्याप्त हैं?
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, चंडीगढ़, लुधियाना, अमृतसर और दूसरे औद्योगिक शहरों में काम करने वाली यूपी-बिहार की बड़ी आबादी के लिए त्योहार सिर्फ छुट्टी नहीं, बल्कि परिवार से मिलने का अवसर है। ऐसे में सामान्य ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट बढ़ने के बाद स्पेशल ट्रेनें ही बड़ी उम्मीद बनती हैं।
राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण है फैसला
राजनीतिक विश्लेषण की दृष्टि से देखें तो त्योहारों पर स्पेशल ट्रेनें चलाना पूर्वांचल और बिहार के लिए महज परिवहन का फैसला नहीं है। यह उस विशाल प्रवासी आबादी से जुड़ा विषय है जो दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और दूसरे राज्यों में काम करती है और जिसका आर्थिक योगदान उत्तर भारत की राजनीति में लगातार महत्वपूर्ण रहा है।
सत्तापक्ष इसे आम यात्रियों को राहत देने और रेलवे की संवेदनशीलता के उदाहरण के रूप में पेश कर सकता है, जबकि विपक्ष के पास यह सवाल उठाने का आधार रहेगा कि अगर त्योहारों पर हर साल स्पेशल ट्रेनें जरूरी पड़ती हैं तो नियमित ट्रेनों की क्षमता और स्थायी यात्री सुविधाओं को उसी अनुपात में क्यों नहीं बढ़ाया गया।
यानी रेल मंत्री की फाइल में यह फैसला एक प्रशासनिक व्यवस्था हो सकता है, लेकिन जमीन पर यह करोड़ों यात्रियों के लिए घर पहुंचने की उम्मीद है।
यूपी-बिहार के यात्रियों के लिए संदेश साफ
त्योहारों में घर लौटने वालों के लिए इस बार विकल्प सामान्य दिनों के मुकाबले बेहतर हो सकते हैं, लेकिन राहत का लाभ तभी मिलेगा जब यात्री समय रहते टिकट और ट्रेन की तारीख जांच लें।
निर्माण कार्यों के कारण कई रूट पर अंतिम समय में बदलाव की संभावना भी रहती है। रेलवे ने यात्रियों को यात्रा से पहले संबंधित ट्रेन की स्थिति और मार्ग की जानकारी जांचने की सलाह दी है।
कुल मिलाकर, इस बार रेलवे ने त्योहारों की भीड़ को देखते हुए यूपी-बिहार और दिल्ली-पंजाब के बीच रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने की कोशिश की है।
अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि स्पेशल ट्रेनों की संख्या जमीन पर उमड़ने वाली भीड़ के लिए कितनी पर्याप्त साबित होती है।
