बी के झा
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पटना, 22 अक्टूबर
बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए राज्यव्यापी अभियान का ऐलान किया है।
भाजपा 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक पूरे बिहार में ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ अभियान चलाएगी। 15 दिनों तक चलने वाले इस अभियान के जरिए पार्टी मतदाता सूची की शुद्धता, निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा जैसे मुद्दों को जनता के बीच उठाने की तैयारी में है।
SIR को लेकर विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे में भाजपा ने भी राजनीतिक मोर्चेबंदी तेज करते हुए जनसंवाद के जरिए अपना पक्ष रखने की रणनीति बनाई है। पार्टी का प्रयास है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस में जनता के सामने अपना तर्क रखा जाए और विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब दिया जाए।
SIR पर सियासी संग्राम, भाजपा ने तैयार किया जवाबी प्लान
बिहार की राजनीति में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जारी विवाद अब जनमत की लड़ाई का रूप लेता दिखाई दे रहा है। विपक्ष जहां निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लेकर सरकार तथा चुनावी व्यवस्था पर निशाना साध रहा है, वहीं भाजपा ने इन आरोपों का मुकाबला करने के लिए राज्यव्यापी अभियान की रूपरेखा तैयार की है।भाजपा का आरोप है कि विपक्षी दल मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
पार्टी इसी मुद्दे को आधार बनाकर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाएगी। हालांकि, मतदाता सूची की शुद्धता और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर वास्तविक स्थिति तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकती है। ऐसे में इस अभियान के दौरान भाजपा के तर्कों और विपक्ष की आपत्तियों के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की है।
प्रेस वार्ता से पदयात्रा तक, जनता के बीच पहुंचेगी भाजपा
अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को पटना स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और प्रदेश संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया ने पार्टी पदाधिकारियों को अभियान की रूपरेखा और संगठनात्मक तैयारियों के संबंध में मार्गदर्शन दिया।बैठक में अभियान को प्रदेश के सभी जिलों में प्रभावी ढंग से संचालित करने की रणनीति पर चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने जिला स्तर पर कार्यक्रमों के आयोजन और जनसंपर्क को लेकर दिशा-निर्देश दिए।अभियान के तहत प्रदेशभर में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:प्रेस वार्ता:
SIR और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर भाजपा का पक्ष जनता के सामने रखना।
पदयात्रा: विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से सीधे संपर्क स्थापित करना।
युवा संवाद: युवाओं के बीच लोकतंत्र और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े विषयों पर चर्चा करना।
विद्यार्थी संवाद: विद्यार्थियों के बीच संवैधानिक प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विचार-विमर्श करना।
प्रबुद्धजनों के साथ बैठकें: समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के साथ संवाद कर पार्टी का पक्ष रखना।
भाजपा की योजना इन कार्यक्रमों के माध्यम से अपने राजनीतिक संदेश को जिला स्तर से लेकर आम जनता तक पहुंचाने की है।
कांग्रेस और विपक्ष पर निशाना साधने की तैयारी
इस अभियान में भाजपा विशेष रूप से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की नीतियों तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर उनके रुख पर सवाल उठाएगी। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जनता के बीच संवाद के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया जा सकता है।
‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ अभियान का नाम भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसके जरिए भाजपा लोकतंत्र और विरोध प्रदर्शन की राजनीति के बीच अंतर को रेखांकित करने का प्रयास करेगी। पार्टी का संदेश है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है।दूसरी ओर, SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच यह अभियान बिहार में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और धार दे सकता है।
अब देखना होगा कि भाजपा का यह जनसंपर्क अभियान मतदाताओं के बीच कितना प्रभाव छोड़ता है और विपक्ष इसके जवाब में क्या रणनीति अपनाता है।
बैठक में कई पदाधिकारी रहे मौजूद
प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित बैठक में धनराज शर्मा, सरोज रंजन पटेल, शीला कुशवाहा, पवन जायसवाल, संजय गुप्ता, अनामिका सिंह पटेल, प्रेम रंजन पटेल और सुरेश रूंगटा सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाध्यक्षों और जिला स्तरीय टोली के सदस्यों के साथ भी बैठक की। इसका उद्देश्य अभियान के कार्यक्रमों को प्रदेश के सभी जिलों में समन्वय के साथ संचालित करना है।
एनएसके विश्लेषण:
बिहार में SIR अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसके इर्द-गिर्द राजनीतिक विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर भी बहस तेज हो रही है।
भाजपा का 15 दिवसीय अभियान इसी राजनीतिक संघर्ष में जनता के बीच अपनी बात रखने की कोशिश है।
इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी अपने तर्कों को कितनी मजबूती से रखती है और जनता के सवालों का कितना ठोस जवाब दे पाती है।
बी. के. झा – एनएसके
