नेहा बोरा के ₹10 हजार के बॉन्ड नोटिस पर आज दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई, AISA अध्यक्ष ने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई को दी चुनौती

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और तिरंगा फहराने की प्रस्तावित योजना से जुड़ा विवाद अब अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा। नेहा ने शांति बनाए रखने के लिए ₹10,000 का निजी मुचलका (पर्सनल बॉन्ड) भरने और एक जमानतदार प्रस्तुत करने संबंधी नोटिस को चुनौती दी है। उन्होंने अदालत से नोटिस को रद्द करने के साथ ही अपने खिलाफ किसी भी कठोर कार्रवाई पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।

यह मामला ऐसे समय में अदालत पहुंचा है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर राजधानी में राजनीतिक टकराव लगातार सुर्खियों में है। अब हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान नोटिस जारी करने की कानूनी प्रक्रिया और उसकी वैधता पर सवाल उठेंगे।

बुधवार को टली सुनवाई, अब हाई कोर्ट में होगी सुनवाई

नेहा बोरा की याचिका बुधवार को तत्काल सुनवाई के लिए अदालत के समक्ष आई थी। हालांकि, उनकी ओर से पेश वकील के अनुरोध पर न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने सुनवाई टाल दी। अब गुरुवार को मामले पर सुनवाई होनी है।याचिका में 17 अक्टूबर को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से जारी नोटिस और उससे संबंधित कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की गई है। यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के साथ धारा 135(3) के तहत जारी किया गया था।

नेहा की ओर से अदालत से यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी उनके खिलाफ कोई कठोर कदम न उठाएं। हालांकि, याचिका में उठाए गए सवालों और नोटिस की वैधता पर अंतिम स्थिति अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।

मंडी हाउस से कनॉट प्लेस तक प्रस्तावित था कार्यक्रम

याचिका में घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि नेहा बोरा ने 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे मंडी हाउस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शांतिपूर्ण सभा आयोजित करने की योजना बनाई थी। इसके बाद कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने का कार्यक्रम प्रस्तावित था।

नेहा का आरोप है कि शाम करीब 5:30 बजे उन्हें हिरासत में लेकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। इसके बाद उन्हें आर.के. पुरम पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया, जहां उन्हें पूरी रात रखा गया। याचिका के मुताबिक, अगले दिन यानी 17 अक्टूबर की सुबह करीब छह बजे उन्हें रिहा किया गया।नेहा ने इसी घटनाक्रम और इसके बाद जारी किए गए बॉन्ड नोटिस को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनके पक्ष की ओर से नोटिस और उससे जुड़ी कार्रवाई को अनुचित बताते हुए निरस्त करने की मांग की गई है।

₹10 हजार का बॉन्ड और एक जमानतदार, क्या है पूरा विवाद?

विवाद का प्रमुख बिंदु वह नोटिस है, जिसमें नेहा बोरा से शांति बनाए रखने के लिए ₹10,000 का पर्सनल बॉन्ड भरने और एक जमानतदार देने को कहा गया है।याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की संबंधित धाराओं के तहत जारी इस नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। नेहा चाहती हैं कि अदालत नोटिस को रद्द करे और संबंधित अधिकारियों को उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने से रोके।

अब हाई कोर्ट के समक्ष यह मामला है कि याचिका में उठाई गई आपत्तियों और उपलब्ध कानूनी आधारों पर क्या निर्णय लिया जाए। अदालत की सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नोटिस के संबंध में क्या आदेश जारी किया जाता है।

SIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के बीच अहम सुनवाई

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की योजना और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस जारी है। ऐसे माहौल में AISA अध्यक्ष की याचिका पर हाई कोर्ट की सुनवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।यह मामला केवल एक बॉन्ड नोटिस तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में प्रस्तावित प्रदर्शन, हिरासत को लेकर लगाए गए आरोप और प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता से जुड़े सवाल भी हैं।

हालांकि, इन आरोपों और कानूनी दलीलों पर अदालत का रुख सामने आने के बाद ही मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

एनएसके की नजर:

नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई अब इस मामले का अगला अहम पड़ाव है।

सभी की निगाहें अदालत के रुख पर टिकी हैं।

क्या बॉन्ड नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर नेहा को राहत मिलेगी या अदालत संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगेगी—इसका पता सुनवाई के दौरान ही चलेगा।

बी. के. झा – एनएसके

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