बी के झा
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नई दिल्ली, 6 सितंबर
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे ने राजधानी में निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इमारत के मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका के बीच युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
अब तक 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि 3 लोगों की मौत की सूचना है। तीन घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें उपचार के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है।हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, एनडीआरएफ, एमसीडी, डीडीएमए, सीएटीएस और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।
छुट्टी का दिन बना त्रासदी का दिन
जिस इमारत में हादसा हुआ, उसमें छात्रों के लिए पीजी संचालित होने की बात सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पीजी का नाम ‘हॉस्टल डेज’ बताया जा रहा है और इसमें मुख्य रूप से लड़के रहते थे।रविवार होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र अपने कमरों में मौजूद थे। ऐसे में इमारत का अचानक गिरना कई परिवारों के लिए एक भयावह त्रासदी में बदल गया।मलबे से सामने आए दृश्यों ने हादसे की भयावहता बढ़ा दी। एक व्यक्ति का पैर मलबे में फंसा दिखाई दिया, जिसे निकालने के लिए बचावकर्मी लगातार मलबा हटाते रहे।
बेसमेंट में चल रहा था काम, अब लापरवाही पर उठे सवाल
हादसे की सबसे गंभीर कड़ी इमारत के बेसमेंट में चल रहे काम से जुड़ी है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक इमारत करीब 40-50 साल पुरानी थी और इसमें एक बेसमेंट के अलावा पांच ऊपरी मंजिलें थीं। हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया है कि बेसमेंट में काम को लेकर करीब एक महीने पहले नोटिस भी दिया गया था। यह भी बताया गया कि इमारत को लगभग एक साल पहले खाली कराया गया था, जबकि पीजी करीब दो महीने पहले शुरू हुआ था।अगर ये दावे जांच में सही साबित होते हैं तो सबसे बड़ा सवाल यही होगा—
जब इमारत की हालत और उसमें चल रहे काम को लेकर पहले से सवाल थे, तब उसमें छात्रों को रहने की अनुमति कैसे मिली?
मालिकों की तलाश में पुलिस
पुलिस इमारत के मालिकों की तलाश कर रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक इमारत के मालिक हरिओम बंसल और उनके भाई आनंद बंसल बताए जा रहे हैं, जो गुरुग्राम के निवासी हैं। बताया गया है कि उनके तीन से चार पीजी संचालित होते हैं।
हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह क्या थी, इसमें बेसमेंट का काम कितना जिम्मेदार था और इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच कब और किस स्तर पर हुई थी—इन तमाम सवालों का जवाब विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
आठ दमकल गाड़ियां मौके पर, इलाके की घेराबंदी
दिल्ली अग्निशमन सेवा के अधिकारी के अनुसार सूचना रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे मिली। इसके बाद दमकल की आठ गाड़ियां और विभिन्न विभागों की बचाव टीमें मौके पर भेजी गईं।पुलिस ने घटनास्थल की घेराबंदी कर दी और बचावकर्मियों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की। स्थानीय लोगों ने भी शुरुआती दौर में बचाव कार्य में मदद की।
पीएम मोदी और अमित शाह ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा कि अधिकारी मौके पर काम कर रहे हैं और प्रभावित लोगों की मदद की जा रही है।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी हादसे पर दुख जताया। उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त और एनडीआरएफ के महानिदेशक से बात कर जमीनी स्थिति की जानकारी ली है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ मिलकर बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं।
सीएम रेखा गुप्ता मौके पर पहुंचीं, अफसरों की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के संकेत
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इमारत के बेसमेंट में काम चल रहा था और यदि अधिकारियों की ओर से किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों को तत्काल मदद पहुंचाना और फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की प्राथमिकता है। एहतियात के तौर पर आसपास की एक इमारत को भी खाली कराया गया है।
अब असली सवाल मलबे से बड़ा है सत्य निकेतन का यह हादसा
सिर्फ एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है। यह राजधानी में पुरानी इमारतों, पीजी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा, बेसमेंट में होने वाले निर्माण कार्य और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।यदि इमारत को पहले खाली कराया गया था, यदि बेसमेंट में काम चल रहा था और यदि नोटिस दिए जाने की बात भी सामने आ रही है, तो फिर उसमें छात्रों का पीजी कैसे संचालित हो रहा था?
मलबा हट जाएगा, बचाव अभियान खत्म हो जाएगा और जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट आएगी। लेकिन असली जवाबदेही तभी तय होगी, जब जांच यह बताएगी कि इमारत आखिर गिरी क्यों और उन लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी, जो इस इमारत में अपनी जिंदगी सुरक्षित समझकर रह रहे थे।
NSK का सवाल:–
राजधानी में किसी इमारत के गिरने के बाद ही सुरक्षा मानकों की जांच क्यों होती है?
क्या प्रशासन की निगरानी व्यवस्था हादसे से पहले चेतावनी देने में नाकाम रही?

