बी के झा
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नई दिल्ली, 10 सितंबर
दिल्ली के सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग के भयावह हादसे की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई ऐसे सवाल सामने आ रहे हैं, जो हादसे की वजह और जिम्मेदारी दोनों को लेकर गंभीर संदेह पैदा करते हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस समय PG की इमारत भरभराकर गिरी, उस वक्त उसका संचालक सुधांशु घटनास्थल से महज करीब 100 मीटर दूर अपने कार्यालय में मौजूद था।
इसके बावजूद वह मौके पर नहीं पहुंचा।पुलिस के मुताबिक, सुधांशु को हादसे की जानकारी मिल चुकी थी। उसने कुछ लोगों को फोन किया, लेकिन घटनास्थल पर जाने के बजाय वहां से निकल गया। पूछताछ में उसने पुलिस को कथित तौर पर बताया कि उसे डर था कि हादसे के बाद स्थानीय लोग उसके साथ मारपीट कर सकते हैं। अब पुलिस उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसे के बाद उसने किन लोगों से संपर्क किया और घटनास्थल से दूर रहने के पीछे वास्तविक वजह क्या थी।
2022 से चला रहे थे PG का कारोबार
सुधांशु दिल्ली के भजनपुरा इलाके का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, वह अपने कारोबारी साथी शुभम त्यागी के साथ वर्ष 2022 से PG का कारोबार कर रहा था। दोनों ने सत्य निकेतन में ‘Hostel Daze’ नाम से PG संचालित किए थे।जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों सत्य निकेतन इलाके में करीब सात PG/अकोमोडेशन चला रहे थे। हादसे वाली इमारत को अगस्त 2025 में दोनों ने करीब 1.05 लाख रुपये प्रतिमाह के किराए पर लिया था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इमारत की हालत जर्जर होने के कारण इसका किराया अपेक्षाकृत कम था।
यहीं से जांच का सबसे अहम सवाल खड़ा होता है—जब इमारत की हालत पहले से खराब थी, तो क्या PG संचालकों को उसके संभावित खतरे का अंदाजा था?
पुलिस सूत्रों का दावा है कि सुधांशु को इमारत में चल रहे निर्माण और मरम्मत कार्य से पैदा हो सकने वाले खतरे की जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण गतिविधियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
PG में बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव नहीं, लेकिन निर्माण कार्य जारी था
पुलिस जांच के अनुसार, PG संचालकों ने इमारत में कोई बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव नहीं कराया था। वहां मुख्य रूप से दीवारों पर पेंट, सेकेंड हैंड AC, बेड, अलमारी और टेबल जैसी चीजें लगाई गई थीं।लेकिन हादसे की जांच में असली फोकस अब उस निर्माण और मरम्मत कार्य पर है, जो इमारत के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में चल रहा था।
PG संचालक का कारोबारी साझेदार शुभम त्यागी फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि निर्माण कार्य की जानकारी दोनों संचालकों को कितनी थी और हादसे से पहले इमारत की संरचनात्मक स्थिति को लेकर क्या सावधानियां बरती गई थीं।
लेबर ठेकेदार की गिरफ्तारी के बाद खुली निर्माण कार्य की परत
पुलिस ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के कासगंज से सनोज कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, सनोज बिल्डिंग के मालिक महेश गुप्ता का लेबर ठेकेदार था। महेश गुप्ता ने उसे ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में निर्माण एवं मरम्मत का काम सौंपा था।पूछताछ में पुलिस को पता चला कि सनोज करीब 10 दिन से इमारत में रेनोवेशन का काम करा रहा था। इस दौरान बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर को एक ही लेवल पर लाने का काम किया जा रहा था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बेसमेंट में करीब तीन ट्रक मलबा भर दिया गया था। इसी दौरान ग्राउंड फ्लोर पर दुकान के लिए जगह बनाने में एक दीवार बाधा बन रही थी।हादसे वाले दिन कथित तौर पर इसी दीवार को तोड़ा गया।
एक दीवार टूटी और ढह गई पूरी इमारत?
जांच का सबसे गंभीर पहलू यही है। पुलिस के दावे के मुताबिक, दीवार हटाए जाने के बाद इमारत का स्ट्रक्चर भार सहन नहीं कर सका और पूरी बिल्डिंग देखते ही देखते ढह गई।हालांकि, हादसे की अंतिम वजह और संरचनात्मक विफलता का वैज्ञानिक निर्धारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पुलिस निर्माण कार्य, दीवार तोड़ने, बेसमेंट में मलबा भरने और इमारत की पहले से मौजूद कमजोरियों के बीच संबंध की जांच कर रही है।
एक राहत की बात यह रही कि हादसे के समय बिल्डिंग में काम कर रहे मजदूर लंच के लिए बाहर गए हुए थे। इसी वजह से वे सीधे मलबे की चपेट में आने से बच गए। पुलिस के अनुसार, लंच के बाद जब ठेकेदार सनोज वापस लौटा तो उसने इमारत को पूरी तरह गिरी हुई हालत में देखा।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदारी किसकी?
सत्य निकेतन हादसा केवल एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है। इसके पीछे कई स्तरों पर जिम्मेदारी के सवाल खड़े हो रहे हैं—इमारत की हालत कैसी थी, निर्माण कार्य किस अनुमति और निगरानी में चल रहा था, बेसमेंट में भारी मात्रा में मलबा क्यों भरा गया, दीवार तोड़ने का फैसला किसके निर्देश पर हुआ और PG संचालकों को इसकी कितनी जानकारी थी?
सबसे अहम सवाल यह भी है कि घटनास्थल से महज 100 मीटर दूर मौजूद PG संचालक सूचना मिलने के बाद भी मौके पर क्यों नहीं पहुंचा?
पुलिस अब CDR, निर्माण कार्य से जुड़े लोगों की भूमिका और फरार कारोबारी साझेदार शुभम त्यागी की तलाश के जरिए इस पूरी कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
जांच का निष्कर्ष ही यह तय करेगा कि यह महज एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था या लापरवाही, निर्माण संबंधी चूक और संभावित नियमों की अनदेखी ने इस त्रासदी को जन्म दिया।
