बी के झा
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पटना, 22 अक्टूबर
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाला द्विवार्षिक चुनाव सियासी ताकत, संगठनात्मक पकड़ और उम्मीदवारों के व्यक्तिगत प्रभाव की बड़ी परीक्षा बनने जा रहा है। शुक्रवार को 5,32,847 मतदाता 150 उम्मीदवारों की राजनीतिक किस्मत का फैसला करेंगे।
चुनावी मैदान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन के प्रत्याशियों के सामने जनसुराज तथा निर्दलीय उम्मीदवार भी कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। ऐसे में कई निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला बहुकोणीय होने के आसार हैं।चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में होने वाले इस चुनाव के लिए बुधवार शाम चार बजे प्रचार का शोर थम गया।
अब उम्मीदवारों की निगाहें मतदाताओं पर टिकी हैं। खास बात यह है कि सभी आठ सीटों पर निवर्तमान प्रतिनिधि भी चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में उनके सामने अपनी पुरानी पकड़ बरकरार रखने की चुनौती है, जबकि प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सत्ता-विरोधी रुझान, स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत संपर्क के सहारे मुकाबले को अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं।
आठ सीटें, 150 उम्मीदवार और 5.32 लाख मतदाता
बिहार विधान परिषद की जिन आठ सीटों पर चुनाव होना है, उनमें पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के साथ पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार, 23 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक मतदान होगा। इसके लिए 993 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान बैलेट पेपर के माध्यम से कराया जाएगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।चुनाव आयोग के निर्देश पर प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। संबंधित जिलों में प्रेक्षकों की तैनाती की गई है। मतदान दलों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदान केंद्रों तक रवाना किया जाएगा।इस चुनाव का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है कि विधान परिषद की इन सीटों पर जीत के लिए केवल राजनीतिक दल का समर्थन ही पर्याप्त नहीं होगा।
शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानीय संपर्क, उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, मतदाताओं के बीच उसकी स्वीकार्यता और संगठन की सक्रियता भी निर्णायक साबित हो सकती है।
राजद-कांग्रेस में तालमेल की कमी, महागठबंधन की चुनौती बढ़ी
चुनाव में महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों को लेकर सहमति नहीं बन सकी। इसका असर उम्मीदवारों के चयन और मुकाबले की रणनीति पर दिखाई दे रहा है।उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राजद ने छह और कांग्रेस ने पांच सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। कई निर्वाचन क्षेत्रों में दोनों दलों के उम्मीदवार अलग-अलग मैदान में हैं। इससे विपक्षी खेमे के सामने मतों के बंटवारे की चुनौती खड़ी हो सकती है।पटना शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के साथ कोसी तथा दरभंगा स्नातक सीटों पर राजद और कांग्रेस के उम्मीदवारों के सामने NDA के प्रत्याशी मुकाबले में हैं।
वहीं, सारण शिक्षक और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। यहां राजद के प्रत्याशियों का मुकाबला NDA उम्मीदवारों से है। दूसरी ओर, राजद ने दरभंगा और तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं।इस बिखराव से चुनावी समीकरण दिलचस्प हो गए हैं। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा, क्योंकि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की प्राथमिकताएं सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग भी हो सकती हैं।
निर्दलीय और जनसुराज ने बढ़ाई NDA-महागठबंधन की मुश्किलें
इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी और जनसुराज भी मुकाबले को प्रभावित करने की स्थिति में नजर आ रहे हैं। सभी आठ निर्वाचन क्षेत्रों में जनसुराज की मौजूदगी और निर्दलीय उम्मीदवारों की चुनौती ने प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए चुनावी गणित को जटिल बना दिया है।शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर सक्रिय उम्मीदवारों को अक्सर व्यक्तिगत संपर्क और अपनी कार्यशैली के आधार पर समर्थन मिलता है। ऐसे में निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका को नजरअंदाज करना प्रमुख दलों के लिए भारी पड़ सकता है।खासकर उन सीटों पर मुकाबला अधिक दिलचस्प हो सकता है, जहां पहले से स्थापित उम्मीदवारों के सामने स्थानीय स्तर पर मजबूत दावेदारी करने वाले प्रत्याशी खड़े हैं।
जनसुराज के उम्मीदवार भी प्रमुख दलों के मतदाताओं के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, किस निर्वाचन क्षेत्र में कौन कितना प्रभाव डाल पाएगा, इसका आकलन मतगणना के बाद ही किया जा सकेगा।
किस सीट पर किसका कब्जा, किसके सामने कितनी बड़ी चुनौती?
पिछले प्रतिनिधित्व के लिहाज से आठों सीटों का चुनावी परिदृश्य भी महत्वपूर्ण है।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रपटना: भाजपा के पास सीट रही है।
सारण: निर्दलीय प्रतिनिधि का कब्जा रहा है।
तिरहुत: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के पास सीट रही है।
दरभंगा: कांग्रेस के पास सीट रही है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रपटना: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के पास सीट रही है।
दरभंगा: निर्दलीय प्रतिनिधि का कब्जा रहा है।
तिरहुत: निर्दलीय प्रतिनिधि के पास सीट रही है।
कोसी: भाजपा के पास सीट रही है।
इन सीटों पर मौजूदा प्रतिनिधियों के सामने अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की चुनौती है। वहीं, विपक्षी दलों और नए दावेदारों के लिए यह चुनाव अपनी ताकत दिखाने का अवसर है।पुराने प्रतिनिधियों को अपने कार्यकाल और मतदाताओं से संपर्क का लाभ मिल सकता है, लेकिन इस आधार पर जीत सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती।
चुनाव में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और मतदाताओं की प्राथमिकताएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
मतदान की तैयारियां पूरी, सुरक्षा और निगरानी पर जोर
मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने आवश्यक तैयारियां की हैं। संबंधित जिलों में प्रेक्षकों की तैनाती की गई है और मतदान दलों को बूथों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।इसी क्रम में निर्वाची पदाधिकारी सह प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने बांकीपुर गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल स्थित वज्रगृह सह मतगणना केंद्र का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान उन्होंने मतगणना केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। प्रशासनिक स्तर पर केंद्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजिस्ट्रेट, पुलिस पदाधिकारियों और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं।
मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि चुनाव निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संपन्न हो सके।शिकायत के लिए जारी किए गए हेल्पलाइन नंबरचुनाव से संबंधित शिकायतों और समस्याओं के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित संपर्क नंबर जारी किए हैं:
निर्वाची पदाधिकारी सह प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय: 0612-2219205, 0612-2233578जिला नियंत्रण कक्ष,
पटना: 0612-2999774जिला नियंत्रण कक्ष,
नालंदा: 18003456323जिला नियंत्रण कक्ष,
नवादा: 06324-299948मतदाताओं और संबंधित पक्षों को किसी भी चुनावी समस्या या शिकायत की स्थिति में इन नंबरों के माध्यम से संपर्क करने की सुविधा दी गई है।
27 अक्टूबर को खुलेगा किस्मत का पिटारा
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों का चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक तरफ NDA अपने प्रभाव और राजनीतिक पकड़ को कायम रखने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ महागठबंधन के घटक दलों के बीच तालमेल की कमी उसकी चुनौती बढ़ा सकती है। वहीं, जनसुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी ने चुनावी समीकरणों में नए कोण जोड़ दिए हैं।सभी आठ सीटों पर निवर्तमान प्रतिनिधियों की मौजूदगी मुकाबले को और रोचक बना रही है। ऐसे में यह चुनाव केवल राजनीतिक दलों की ताकत का आकलन नहीं होगा, बल्कि यह भी बताएगा कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच व्यक्तिगत छवि, स्थानीय संपर्क और संगठनात्मक प्रभाव कितना निर्णायक है।
एनएसके का विश्लेषण:
बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों पर मुकाबला केवल NDA बनाम महागठबंधन तक सीमित नहीं है। विपक्षी दलों के बीच सीटों पर तालमेल का अभाव, निर्दलीय प्रत्याशियों की चुनौती और जनसुराज की मौजूदगी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि, चुनावी दावों और संभावनाओं से अलग वास्तविक तस्वीर 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद ही सामने आएगी।
फिलहाल, सभी उम्मीदवारों की निगाहें 23 अक्टूबर के मतदान पर टिकी हैं।
रिपोर्ट: बी. के. झा –एनएसके
