विनय कुमार के बाद कौन संभालेगा बिहार की पुलिस कमान? शुरू हुई ‘कुर्सी’ की कवायद, DGP की रेस में ये दिग्गज

बी के झा

NSK news India

पटना, 12 सितंबर

बिहार की पुलिस व्यवस्था में अब अगली बड़ी तस्वीर उभरने लगी है। मौजूदा डीजीपी विनय कुमार का दो साल का कार्यकाल 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। इसके साथ ही राज्य की पुलिस कमान किस वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के हाथों में जाएगी, इसे लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। बिहार सरकार के गृह विभाग ने नए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया के तहत 30 वर्ष की पुलिस सेवा पूरी कर चुके पात्र आईपीएस अधिकारियों की सूची केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी है।

सूत्रों के मुताबिक सूची में नौ डीजी रैंक के अधिकारी और 1996 बैच तक के 14 एडीजी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय और यूपीएससी इस सूची पर विचार-विमर्श कर संभावित अधिकारियों में से तीन नामों का पैनल तैयार करेंगे।

यही पैनल बिहार सरकार को भेजा जाएगा और इसके बाद मुख्यमंत्री की पसंद से राज्य के अगले पुलिस महानिदेशक के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।

वरिष्ठता के साथ ‘कौन कितना फिट’ भी बनेगा कसौटी

डीजीपी का चयन महज वरिष्ठता की सीधी गणित नहीं होगी। पुलिस सेवा में अनुभव, प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व कौशल, सेवा रिकॉर्ड और राज्य की पुलिस व्यवस्था को संभालने की क्षमता जैसे पहलुओं पर भी गौर किया जा सकता है।वरिष्ठ पुलिस सूत्रों के अनुसार, चयन प्रक्रिया के दौरान सूची में शामिल अधिकारियों से उनकी व्यक्तिगत राय भी ली जाएगी।

यानी सवाल केवल यह नहीं होगा कि कौन सबसे वरिष्ठ है, बल्कि यह भी अहम होगा कि कौन बिहार जैसे बड़े और जटिल राज्य की पुलिस व्यवस्था की कमान संभालने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।बिहार कैडर में वर्तमान डीजीपी विनय कुमार को छोड़कर नौ डीजी रैंक के आईपीएस अधिकारी हैं। इनमें 1991 बैच की डीजी होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवाएं प्रीता वर्मा सबसे वरिष्ठ हैं।

इसके बाद 1992 बैच के बी. श्रीनिवासन का नाम महत्वपूर्ण है। वे फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर एनएसजी में तैनात हैं और डीजीपी पद की संभावित दौड़ में शामिल माने जा रहे हैं।

1993 बैच में डीजी निगरानी जितेंद्र सिंह गंगवार सबसे वरिष्ठ हैं। इसी बैच के जितेंद्र कुमार, जो केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के डीजी हैं, का नाम भी संभावित दावेदारों में है।

1994 बैच में कुंदन कृष्णन का नाम सबसे आगे

डीजीपी की संभावित दौड़ में 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन का नाम खास तौर पर चर्चा में है। इसी बैच में डॉ. परेश सक्सेना और निर्मल कुमार आजाद भी डीजी स्तर पर हैं। कुंदन कृष्णन की लंबी प्रशासनिक एवं पुलिस सेवा और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का अनुभव उनकी दावेदारी को मजबूत बनाता है।

वहीं डॉ. परेश सक्सेना वर्तमान में डीजी सिविल डिफेंस हैं और उनका कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त होने वाला है। दूसरी ओर निर्मल कुमार आजाद का कार्यकाल दिसंबर 2027 तक है।इसी बैच के अमित कुमार और एएस निलेकर चंद्रा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और बिहार में एडीजी का दर्जा रखते हैं।

1995-96 बैच के अधिकारी भी रेस में

डीजीपी की चयन प्रक्रिया को केवल वर्तमान डीजी रैंक तक सीमित नहीं रखा गया है। 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके 1995 और 1996 बैच के एडीजी स्तर के अधिकारियों के नाम भी सूची में शामिल किए गए हैं।इनमें बिहार में तैनात आर. मलार विजि,

पंकज कुमार दराद,

अमित कुमार जैन,

सुधांशु कुमार,

नैय्यर हसनैन खान,

सुनील कुमार,

डॉ. कमल किशोर सिंह और पारस नाथ के नाम शामिल हैं।

वहीं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारियों में

सुशील एम. खोपड़े,

एस. रवींद्रण,

जगमोहन

और अनिल किशोर यादव के नाम भी सूची में भेजे गए हैं।

असली मुकाबला अब दिल्ली से पटना तक

नए डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया अब उस मोड़ पर पहुंच गई है जहां वरिष्ठता के साथ-साथ प्रशासनिक जरूरत और नेतृत्व क्षमता निर्णायक हो सकती है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय और यूपीएससी की प्रक्रिया के बाद तीन नामों का पैनल बिहार पहुंचेगा, लेकिन अंतिम फैसला राज्य सरकार के स्तर पर होगा।यही वजह है कि फिलहाल बिहार पुलिस की सबसे बड़ी कुर्सी को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। कई वरिष्ठ अधिकारी पात्रता की कसौटी पर हैं, लेकिन रेस में होना और अंतिम तीन में जगह बनाना दो अलग-अलग पड़ाव हैं।

आने वाले महीनों में जैसे-जैसे यूपीएससी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे संभावित नामों को लेकर तस्वीर भी साफ होती जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि विनय कुमार के बाद बिहार की पुलिस कमान किसके हाथ में होगी, इसका फैसला वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड, नेतृत्व क्षमता और सरकार की पसंद के बीच संतुलन से निकलने वाला है।

बिहार के अगले डीजीपी का नाम केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं होगा।

यह राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिसिंग की प्राथमिकताओं और आने वाले समय में पुलिस नेतृत्व की दिशा का भी संकेत माना जाएगा।

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