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रामबन(जम्मू कश्मीर), 23 सितंबर
जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के बटोत से सामने आई एक घटना ने पुलिस महकमे से लेकर स्थानीय लोगों तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार शाम सना इलाके के जियारत मोड़ पर एक कार के भीतर दो पुलिसकर्मी बेहोशी की हालत में मिले। दोनों को आनन-फानन में जिला अस्पताल रामबन ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दोनों पुलिसकर्मियों की मौत कार के भीतर किन परिस्थितियों में हुई?
मृतकों की पहचान हेड कांस्टेबल फरीद अहमद (408/Rbn) और सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल मोहम्मद याकूब (309/Rbn) के रूप में हुई है। दोनों रामबन की डिस्ट्रिक्ट पुलिस लाइंस (DPL) में तैनात थे। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों को जियारत मोड़ पर एक कार के भीतर अचेत अवस्था में पाया गया था। स्थानीय लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
कार के भीतर क्या हुआ?जांच के केंद्र में कई सवाल
रिपोर्टों के मुताबिक दोनों पुलिसकर्मी करीब रात 8:30 बजे जियारत मोड़ के पास कार में पाए गए। वाहन की पहचान Fiat कार, नंबर JK-19/5299 के तौर पर हुई है। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल अधिकारियों ने मौत की सटीक वजह या उन परिस्थितियों का खुलासा नहीं किया है, जिनमें दोनों पुलिसकर्मी कार के अंदर बेहोश हुए।अब जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि दोनों पुलिसकर्मी उस स्थान पर क्यों पहुंचे थे, कार कितनी देर से वहां खड़ी थी और मौत से पहले उनके साथ आखिर क्या हुआ। हालांकि इन सवालों के जवाब जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेंगे।दोनों शवों को जिला अस्पताल में मेडिको-लीगल औपचारिकताओं के लिए रखा गया है। पुलिस ने घटना की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
पोस्टमार्टम से खुलेगा मौत का राज?
इस पूरे मामले में पोस्टमार्टम और अन्य मेडिकल जांच अहम मानी जा रही है। अभी तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में मौत का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। ऐसे में किसी भी संभावना को अंतिम निष्कर्ष मानना जल्दबाजी होगी।पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों की मौत किस परिस्थिति में हुई और क्या कार के भीतर कोई ऐसा तथ्य मौजूद है, जो इस रहस्य से पर्दा उठा सके। जांच के आगे बढ़ने के साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट तस्वीर साफ कर सकते हैं।
कुछ ही समय पहले आतंकियों ने ली थी एक पुलिसकर्मी की जान
रामबन की इस घटना के बीच जम्मू-कश्मीर में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर चर्चा एक बार फिर सामने आई है। इससे पहले 22 जुलाई 2026 को अनंतनाग में आतंकी हमले में IRP की तीसरी बटालियन के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन की मौत हो गई थी। वह अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे। अधिकारियों के अनुसार उन्हें गोली लगने के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। घटना के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया था।लेकिन रामबन की मौजूदा घटना की परिस्थितियां अलग हैं। यहां दो पुलिसकर्मी एक कार के भीतर अचेत मिले और मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है। यही वजह है कि जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल ‘दोनों की मौत आखिर कैसे हुई?’ का है।
एन एसके की नजर अब जांच की अगली कड़ी पर है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि जियारत मोड़ पर खड़ी उस कार के भीतर आखिर हुआ क्या था।
बी. के. झा , एन एस के
