बच्चों की सुरक्षा पर आखिर जागा सिस्टम! शमसाबाद में जर्जर स्कूल भवनों पर चला हथौड़ा, 28 में से 5 का ध्वस्तीकरण शुरू, लंबे समय से अधर में था ध्वस्तीकरण का काम; शिक्षकों और बच्चों ने ली राहत की सांस, अब बाकी 23 विद्यालयों की बारी

बी के झा

NSK news Ind

फर्रुखाबाद, 23 सितंबर एन एस के

स्कूल की घंटी बजती थी, बच्चे पढ़ने पहुंचते थे, शिक्षक कक्षाओं में पढ़ाते थे और इसी बीच विद्यालय परिसर में खड़े जर्जर भवन एक अनदेखे खतरे की तरह मौजूद थे। लंबे समय से जिस कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा था, वह अब आखिरकार शुरू हो गई है।

फर्रुखाबाद के शमसाबाद क्षेत्र में जर्जर विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण का काम जमीन पर उतर आया है।दलेलगंज, भटपुरा, कासिमपुर तराई और चिलसरा समेत पांच विद्यालयों में जर्जर भवनों को गिराने की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। क्षेत्र में कुल 28 विद्यालय भवन जर्जर हालत में चिह्नित किए गए हैं। इन भवनों की हालत को लेकर लंबे समय से शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच सुरक्षा की चिंता बनी हुई थी।अब पांच विद्यालयों में कार्रवाई शुरू होने से विद्यालयों में राहत का माहौल है।

लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई कार्रवाई

जर्जर विद्यालय भवनों का ध्वस्तीकरण लंबे समय से लंबित था। भवनों की खराब हालत के बावजूद जब तक कार्रवाई नहीं हुई, तब तक विद्यालय परिसरों में सुरक्षा का सवाल बना रहा।शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि पुराने और कमजोर भवन किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं। खासकर प्राथमिक विद्यालयों में छोटे बच्चों की मौजूदगी को देखते हुए जोखिम और गंभीर हो जाता है।अब ध्वस्तीकरण शुरू होने के बाद शिक्षकों को उम्मीद है कि विद्यालय परिसर पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित होगा।

28 में से पांच विद्यालयों पर पहली कार्रवाई

खंड शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि शमसाबाद क्षेत्र में कुल 28 जर्जर विद्यालय भवन चिह्नित किए गए हैं। इनमें से पांच विद्यालयों में ध्वस्तीकरण का कार्य शुरू करा दिया गया है।यानी पहली कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी 23 जर्जर विद्यालय भवन ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया के इंतजार में हैं।यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ कार्रवाई शुरू होने का नहीं, बल्कि बाकी भवनों का नंबर कब आएगा, इसका भी है।

दलेलगंज से चिलसरा तक सुरक्षा का सवाल

दलेलगंज, भटपुरा, कासिमपुर तराई और चिलसरा समेत जिन विद्यालयों में जर्जर भवनों को हटाने का काम शुरू हुआ है, वहां शिक्षकों में संतोष है।शिक्षकों का कहना है कि जर्जर ढांचे को हटाए जाने के बाद विद्यालय परिसर में दुर्घटना की आशंका कम होगी। साथ ही बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं है। यह वह स्थान है जहां बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा बिताते हैं। ऐसे में विद्यालय परिसर में मौजूद कमजोर भवन, टूटती दीवारें या क्षतिग्रस्त ढांचे को नजरअंदाज करना सीधे तौर पर सुरक्षा के सवाल से जुड़ा है।

अब सिर्फ भवन गिराना नहीं, सुरक्षित स्कूल बनाना चुनौती

ध्वस्तीकरण शुरू होना निश्चित रूप से राहत की खबर है, लेकिन असली काम इसके बाद शुरू होगा।जर्जर भवन हटने के बाद खाली हुई जगह का क्या उपयोग होगा?

क्या वहां नए कक्ष बनाए जाएंगे?

क्या बच्चों के लिए पर्याप्त कक्षाएं उपलब्ध हैं?

क्या विद्यालय परिसर की चारदीवारी, शौचालय, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी समीक्षा होगी?

इन सवालों का जवाब आने वाले समय में जरूरी होगा।क्योंकि सिर्फ खतरनाक भवन हटाना सुरक्षा का पहला कदम है; सुरक्षित और बेहतर विद्यालय तैयार करना उसका अगला चरण होना चाहिए।

अभिभावकों की चिंता भी कम होगी

विद्यालय भवनों की खराब स्थिति का असर केवल शिक्षकों और विद्यार्थियों पर नहीं पड़ता। अभिभावक भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।विशेषकर प्राथमिक स्तर के बच्चों के मामले में अभिभावकों की अपेक्षा होती है कि विद्यालय परिसर पूरी तरह सुरक्षित हो।ऐसे में जर्जर भवनों को हटाने की कार्रवाई से अभिभावकों में भी भरोसा बढ़ सकता है कि प्रशासन विद्यालयों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है।

एनएसके विश्लेषण:

पांच भवनों से शुरुआत, अब 23 का इंतजार

शमसाबाद में 28 जर्जर विद्यालय भवनों की पहचान अपने आप में बताती है कि समस्या छोटी नहीं थी। अब पांच विद्यालयों में ध्वस्तीकरण शुरू होना प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसे अंतिम समाधान नहीं माना जा सकता।

असली परीक्षा यह होगी कि बाकी 23 भवनों पर कार्रवाई कितनी तेजी से होती है और ध्वस्तीकरण के बाद विद्यालयों में सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था कितनी जल्दी तैयार की जाती है।किसी स्कूल में बच्चे पढ़ रहे हों और उसी परिसर में जर्जर भवन खड़ा हो, तो वहां शिक्षा से पहले सुरक्षा का सवाल खड़ा होता है।इसलिए अब उम्मीद यही है कि ध्वस्तीकरण की यह शुरुआत केवल पांच विद्यालयों तक सीमित न रहे, बल्कि क्षेत्र के सभी चिह्नित जर्जर भवनों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचे।

बच्चों की सुरक्षा में देरी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

आज जर्जर दीवारें गिर रही हैं, कल उन्हीं जगहों पर सुरक्षित शिक्षा के नए ढांचे खड़े हों—यही इस कार्रवाई की वास्तविक सफलता होगी।

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