बी. के. झा
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नई दिल्ली, 10 अक्टूबर
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी चेन्नई रवाना हो गए। राजधानी में जहां जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पुलिस की कार्रवाई चर्चा में रही, वहीं राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र की मोदी सरकार को लेकर तीखा राजनीतिक संदेश दिया।
उनके एक वाक्य—‘ज्ञानेश कुमार जाएंगे।
यह सरकार जाएगी’—ने चुनावी प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक टकराव को फिर सुर्खियों में ला दिया।राहुल गांधी चेन्नई में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। दूसरी ओर, दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन और उसके नेताओं को हिरासत में लिए जाने की घटनाओं ने यह सवाल खड़ा किया है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़कों से लेकर राजनीतिक मंचों तक किस तरह आगे बढ़ रहा है।
दिल्ली में प्रदर्शन की कोशिश, कई नेताओं को हिरासत में लिया गया
सीजेपी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। इसके बावजूद कुछ समर्थकों ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।इसी घटनाक्रम के बीच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका को भी दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई के बीच राजधानी में एसआईआर तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक तनाव का माहौल बना रहा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष निर्वाचन आयोग की भूमिका पर लगातार सवाल उठा रहा है। वहीं, इस पूरे विवाद में प्रदर्शन की अनुमति, सार्वजनिक व्यवस्था और राजनीतिक विरोध के अधिकार जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में हैं।
राहुल गांधी की पोस्ट के क्या हैं मायने?
चेन्नई रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, ‘ज्ञानेश कुमार जाएंगे। यह सरकार जाएगी। फिर लोकतंत्र को दुरुस्त करने का काम शुरू होगा।’इस बयान के जरिए कांग्रेस नेता ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी पार्टी और विपक्ष की लड़ाई को सीधे केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष से जोड़ने की कोशिश की। राहुल गांधी का संदेश स्पष्ट था कि उनके अनुसार मौजूदा विवाद केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े व्यापक सवाल हैं।
हालांकि, सरकार के भविष्य को लेकर राहुल गांधी का दावा उनका राजनीतिक आकलन है। इसे किसी निश्चित घटनाक्रम या सरकार के गिरने की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता। इस बयान का वास्तविक राजनीतिक प्रभाव आने वाले दिनों में विपक्ष की रणनीति, उसके आंदोलन और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया से तय होगा।
संसद के सेंट्रल हॉल में भी सरकार पर साधा था निशाना
राहुल गांधी ने एक्स पर संसद के सेंट्रल हॉल में INDIA गठबंधन के सांसदों के बीच दिए गए अपने भाषण की वीडियो क्लिप भी साझा की। इससे पहले शुक्रवार को उन्होंने कहा था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मुद्दा मौजूदा राजनीतिक संकट का केवल एक हिस्सा है और इसका समाधान मौजूदा सरकार को हटाने से जुड़ा है।संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में विपक्षी सांसदों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि विपक्ष के हालिया प्रदर्शनों ने सरकार की नींव हिला दी है।
उन्होंने कहा था कि यदि विपक्ष पिछले तीन-चार दिनों की तरह अपना दबाव बनाए रखता है, तो सरकार गिर जाएगी।राहुल गांधी ने अपने भाषण में इस संघर्ष को लोकतंत्र से जुड़ी बड़ी लड़ाई बताते हुए कहा था कि इसके लिए संघर्ष करना और जान तक देना सार्थक है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि कांग्रेस नेतृत्व एसआईआर के मुद्दे को केवल चुनावी प्रक्रिया से संबंधित तकनीकी विवाद के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है।
SIR पर विवाद और निर्वाचन आयोग की भूमिका सवालों के घेरे में
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच टकराव लगातार राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। निर्वाचन आयोग की भूमिका और उसके फैसलों पर उठ रहे सवालों के बीच एसआईआर अब संसद से लेकर सड़कों तक राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है।इसी संदर्भ में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसमें दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें अधिकांश आपत्तियां एसआईआर से संबंधित फैसलों और आदेशों को लेकर थीं। इन आपत्तियों की प्रकृति और उनका आधिकारिक संदर्भ इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, किसी रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों को अपने आप में किसी अनियमितता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों, आपत्तियों के विषय और निर्वाचन आयोग की आधिकारिक स्थिति को भी समझना जरूरी है।
दिल्ली का प्रदर्शन, चेन्नई की यात्रा और विपक्ष की रणनीति
एक तरफ दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर पुलिस की कार्रवाई हुई, दूसरी तरफ राहुल गांधी ने चेन्नई रवाना होते समय अपने बयान के जरिए केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने का संदेश दिया। दोनों घटनाक्रमों ने एसआईआर विवाद के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखा है।राहुल गांधी के बयान से साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे को मुख्य निर्वाचन आयुक्त तक सीमित रखने के बजाय केंद्र सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाना चाहती है।
लेकिन विपक्ष के दावों, निर्वाचन आयोग की सफाई और सरकार के रुख के बीच असली सवाल यही है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान किस तरह होगा।
फिलहाल, दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच एसआईआर का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष अपने आंदोलन को किस दिशा में ले जाता है और निर्वाचन आयोग तथा केंद्र सरकार इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

