बी के झा
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पटना, 22 अक्टूबर
बिहार विधान परिषद के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव से ठीक पहले पटना में मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पटना साइंस कॉलेज की शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित मतदाता सूची में पांच ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनका कॉलेज के आधिकारिक सेवा रिकॉर्ड में कोई मिलान नहीं मिला। कॉलेज प्रशासन की जांच में इन पांचों व्यक्तियों के संस्थान में कार्यरत नहीं होने की बात सामने आने के बाद मामले की सूचना निर्वाचन आयोग को दी गई है। मतदान से ठीक एक दिन पहले इस घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर बहस तेज कर दी है।हालांकि, कॉलेज के रिकॉर्ड में नाम नहीं मिलने का अर्थ अपने आप में यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति फर्जी मतदाता हैं। उनकी पात्रता, मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के आधार और संभावित अनियमितता की पुष्टि निर्वाचन आयोग की जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल, इस मामले ने चुनाव से पहले मतदाता सूची के सत्यापन की अहमियत को एक बार फिर सामने ला दिया है।
कॉलेज के रिकॉर्ड से हुआ मिलान, पांच नामों पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के लिए जारी मतदाता सूची पटना साइंस कॉलेज प्रशासन को प्राप्त हुई थी। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने सूची में दर्ज नामों का संस्थान के आधिकारिक सेवा रिकॉर्ड से मिलान किया।जांच के दौरान पांच ऐसे नाम सामने आए, जिनके कॉलेज में कार्यरत शिक्षक होने का रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित नामों की जानकारी निर्वाचन आयोग को भेज दी।मतदाता सूची में नाम दर्ज होने और संबंधित संस्थान में कार्यरत होने के बीच विसंगति सामने आने से यह सवाल उठने लगा है कि इन नामों को सूची में शामिल करने का आधार क्या था। क्या नाम दर्ज करने के दौरान सत्यापन में चूक हुई या इसके पीछे कोई दूसरी वजह है?
इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही मिल सकेगा।मतदाता सूची में सामने आए पांच नामकॉलेज प्रशासन के रिकॉर्ड से मिलान के दौरान जिन पांच नामों पर सवाल उठे हैं, वे हैं:
1. राकेश रंजन
2. तरुण कुमार
3. कौशलेंद्र
4. विकास कुमार
5. शिव शंकर
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन व्यक्तियों के नाम पटना साइंस कॉलेज से संबंधित बताते हुए शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज थे, लेकिन कॉलेज के आधिकारिक रिकॉर्ड में इनके संस्थान में कार्यरत होने की पुष्टि नहीं हुई।महत्वपूर्ण बात यह है कि इन नामों को लेकर अंतिम निष्कर्ष निर्वाचन आयोग की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही निकाला जा सकता है। फिलहाल, केवल कॉलेज के रिकॉर्ड में नाम नहीं मिलने के आधार पर संबंधित व्यक्तियों को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
निर्वाचन आयोग को भेजी गई जानकारी, अब जांच पर निगाहें
मामले की जानकारी सामने आने के बाद पटना साइंस कॉलेज प्रशासन ने निर्वाचन आयोग को सूचित किया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग इस विसंगति की जांच किस तरह करता है और मतदान से पहले किसी सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता पड़ती है या नहीं।चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची की शुद्धता बुनियादी महत्व रखती है। खासकर शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता बनने के लिए निर्धारित पात्रता और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी होता है। ऐसे में किसी संस्थान से जुड़े मतदाताओं के नामों में विसंगति सामने आने पर उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
इस मामले में तीन सवाल अहम हैं:
पांचों नाम मतदाता सूची में किस आधार पर दर्ज किए गए?
क्या संबंधित व्यक्तियों की शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता के रूप में पात्रता की जांच की गई थी?
निर्वाचन आयोग इस विसंगति की पुष्टि होने पर क्या कदम उठाएगा?
इन सवालों के जवाब से ही मामले की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट हो सकेगी।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को मतगणना
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव प्रचार बुधवार शाम चार बजे समाप्त हो गया। इन सीटों में चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। मतदान 23 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।चुनाव के मैदान में स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से 90 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से 60 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान कराया जाना है।मतदान बैलेट पेपर के माध्यम से होगा। चुनाव आयोग के निर्देश पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और संबंधित चुनाव क्षेत्रों में प्रेक्षकों की तैनाती भी की गई है।ऐसे समय में जब चुनाव प्रचार थम चुका है और मतदान की घड़ी करीब है, पटना साइंस कॉलेज की मतदाता सूची में पांच नामों को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक सतर्कता की अहमियत बढ़ा दी है।
मतदाता सूची की विश्वसनीयता ही चुनावी निष्पक्षता की कसौटी
चुनाव में निष्पक्षता केवल मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने से नहीं आती, बल्कि इसकी शुरुआत मतदाता सूची की शुद्धता से होती है। पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना और अपात्र नामों की पहचान के लिए उचित सत्यापन करना चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।पटना साइंस कॉलेज से जुड़े इस मामले में निर्वाचन आयोग की जांच अब महत्वपूर्ण होगी। यदि सूची तैयार करने या सत्यापन के दौरान कोई अनियमितता हुई है, तो उसके कारणों की पहचान और नियमानुसार कार्रवाई जरूरी होगी।
वहीं, यदि संबंधित व्यक्तियों की मतदाता के रूप में पात्रता कॉलेज में कार्यरत होने से अलग किसी वैध आधार पर है, तो उसे भी दस्तावेजों के जरिए स्पष्ट किया जाना चाहिए।
एनएसके का सवाल:
मतदान से ठीक पहले मतदाता सूची में सामने आई इस विसंगति की सच्चाई क्या है?
क्या यह सत्यापन में हुई चूक है या किसी बड़ी अनियमितता का संकेत?
इसका फैसला आरोपों से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों से होना चाहिए।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की विश्वसनीयता और प्रत्येक पात्र मतदाता के अधिकारों की रक्षा, दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
बी. के. झा – एनएसके
