50-50 हजार के निजी मुचलके और जमानतदार की शर्त पर मिली रिहाई; सौरव दास-आशुतोष रांका को तिहाड़ से बाहर निकालने वाली लीगल टीम कौन? CJP की रत्ना सिंह ने जारी की वकीलों की लिस्ट

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद अब उनकी कानूनी लड़ाई लड़ने वाली टीम चर्चा में है। दोनों नेताओं को जमानत मिलने के बाद CJP की लीगल टीम की प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उन वकीलों का नाम सार्वजनिक किया, जिन्होंने मामले में कानूनी पैरवी की। उन्होंने एडवोकेट अभिक चिमनी और उनकी टीम सहित कई अन्य अधिवक्ताओं का आभार जताया।

जंतर-मंतर के आसपास कथित तौर पर शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए सौरव दास और आशुतोष रांका को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के आदेश के बाद रिहा किया गया। हालांकि, उनकी रिहाई कुछ शर्तों के साथ हुई।

दोनों को ₹50-50 हजार के निजी मुचलके और जमानतदार पेश करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, उन्होंने हलफनामा देकर शांति बनाए रखने और जंतर-मंतर को अधिसूचित धरना स्थल घोषित किए जाने तक वहां विरोध-प्रदर्शन का आह्वान नहीं करने की बात कही।

रत्ना सिंह ने बताई कानूनी टीम, इन वकीलों का जताया आभार

सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के बाद CJP की लीगल टीम की प्रमुख रत्ना सिंह ने पूरी कानूनी टीम को बधाई दी। उन्होंने अपनी पोस्ट में एडवोकेट अभिक चिमनी और उनकी टीम के योगदान की सराहना की।रत्ना सिंह के मुताबिक, इस कानूनी प्रयास में निम्नलिखित अधिवक्ताओं ने भूमिका निभाई:

अभिक चिमनी: कानूनी पैरवी में प्रमुख भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता।

प्रांजल अब्रोल: अभिक चिमनी की टीम के सदस्य।

मोक्षा शर्मा: कानूनी टीम की सदस्य।

अभिष्ट हेला: शुरुआती चरण से मामले की पैरवी में शामिल।

पुष्प शर्मा: SEM कोर्ट में कानूनी कार्यवाही संभालने वाली टीम का हिस्सा।

अंगद: शुरुआती कानूनी कार्यवाही में सहयोग देने वाले सदस्य।

शिवांगी शर्मा: रत्ना सिंह ने उनके सहयोग और साथ देने के लिए विशेष रूप से आभार जताया।

रत्ना सिंह ने अपनी पोस्ट में कहा कि अभिष्ट हेला, पुष्प शर्मा और अंगद ने पहले दिन से ही SEM कोर्ट में मामले की कार्यवाही संभाली। उन्होंने एडवोकेट शिवांगी शर्मा का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने उनके साथ खड़े रहकर मदद की।उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिवक्ताओं के प्रति भी आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके बहुमूल्य कानूनी सुझावों और निर्देशों से टीम को मार्गदर्शन मिला।

कानूनी लड़ाई में अभिक चिमनी की टीम की भूमिका

CJP की ओर से जारी जानकारी में एडवोकेट अभिक चिमनी और उनकी टीम को विशेष धन्यवाद दिया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अभिक चिमनी दिल्ली में वकालत करते हैं और दिल्ली हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में मामलों से जुड़े रहे हैं।रत्ना सिंह की पोस्ट का मुख्य उद्देश्य उन सभी अधिवक्ताओं के योगदान को सामने लाना था, जिन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया में हिस्सा लिया।

इस मामले में कानूनी टीम की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि दोनों नेताओं की रिहाई का रास्ता संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष शर्तों के पालन और आवश्यक मुचलके पेश किए जाने के बाद खुला।

₹50-50 हजार के मुचलके, हलफनामे के बाद रिहाई का आदेश

सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर के निकट कथित तौर पर शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वे तिहाड़ जेल में बंद थे।बुधवार को मामले में अहम घटनाक्रम सामने आया, जब विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य कर रहीं सहायक पुलिस आयुक्त रितु राज ने दोनों नेताओं की रिहाई का आदेश दिया।

रिहाई से पहले दोनों ने हलफनामा दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जंतर-मंतर को अधिसूचित धरना स्थल का दर्जा प्राप्त नहीं है, तब तक वहां विरोध-प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।इसके बाद दोनों को ₹50-50 हजार के निजी मुचलके भरने और जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया गया।

आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनकी रिहाई का आदेश जारी हुआ।यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रिहाई का आदेश निर्धारित शर्तों के पालन के आधार पर दिया गया है। इसे मामले में लगे आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।

CJP के लिए राहत, लेकिन कानूनी विवाद अभी अहम

सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई CJP के लिए तत्काल राहत का घटनाक्रम है। वहीं, इस प्रकरण ने राजधानी में विरोध-प्रदर्शन, निर्धारित धरना स्थलों और प्रशासनिक प्रतिबंधों को लेकर चल रही बहस को भी चर्चा में ला दिया है।रत्ना सिंह की ओर से वकीलों की सूची सार्वजनिक किए जाने के बाद अब इस मामले में कानूनी टीम के योगदान पर भी ध्यान गया है। पार्टी के लिए यह घटनाक्रम केवल दो नेताओं की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके आंदोलन से जुड़े कानूनी मोर्चे की सक्रियता को भी सामने लाता है।

हालांकि, आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित नेता रिहाई के समय दी गई शर्तों का पालन कैसे करते हैं और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

एनएसके का निष्कर्ष

सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के बाद CJP ने अपनी कानूनी टीम के योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है।

अभिक चिमनी, प्रांजल अब्रोल, मोक्षा शर्मा, अभिष्ट हेला, पुष्प शर्मा, अंगद और शिवांगी शर्मा सहित अन्य सहयोगियों के प्रति रत्ना सिंह का आभार इस कानूनी लड़ाई में टीमवर्क की भूमिका को रेखांकित करता है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि रिहाई की शर्तों और मामले की आगे की कार्यवाही का घटनाक्रम क्या रहता है।

रिपोर्ट: बी. के. झा – एनएसके

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