बी के झा, एनएसके विशेष रिपोर्ट
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उज्जैन , 23 अक्टूबर
धर्मनगरी उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध महाकाल मंदिर परिसर में आधी रात को अचानक हलचल तेज हो गई। काली वर्दी में आधुनिक हथियारों से लैस एनएसजी के ब्लैक कमांडो तेजी से आगे बढ़ रहे थे। कोई खंभे की आड़ लेकर संभावित दुश्मन पर नजर रख रहा था, तो कोई अपने साथी को कवर देते हुए मिशन की दिशा में बढ़ रहा था। कुछ ही देर में परिसर में अंधेरा छा गया, लेकिन कमांडो के कदम नहीं रुके। उनकी नजरें लक्ष्य पर थीं और हर गतिविधि किसी बड़े ऑपरेशन का हिस्सा नजर आ रही थी। अचानक सामने आए इस नजारे को देखकर कुछ देर तक लोगों को समझ नहीं आया कि आखिर महाकाल लोक में हो क्या रहा है।
हालांकि, यह कोई वास्तविक आतंकी हमला नहीं था, बल्कि किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) का एक हाई-लेवल सुरक्षा अभ्यास था। इस मॉक ड्रिल के जरिए यह परखा गया कि यदि महाकाल मंदिर जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल पर आतंकी घुसपैठ या कोई गंभीर सुरक्षा संकट पैदा होता है, तो सुरक्षा एजेंसियां कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर सकती हैं।
आधी रात को शुरू हुआ ऑपरेशन, नंदी द्वार से मानसरोवर तक कमांडो की तैनाती
जानकारी के मुताबिक, एनएसजी मुंबई की टीम ने रात 12 बजे से दो बजे के बीच महाकाल लोक परिसर में मॉक ड्रिल की। इसका शुरुआती चरण नंदी द्वार के पास से शुरू हुआ और अभ्यास मानसरोवर क्षेत्र तक चला। इस दौरान स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौजूद रहीं।रात करीब साढ़े 12 बजे ब्लैक ड्रेस में कमांडो आधुनिक हथियारों के साथ पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दिए। उनकी गतिविधियों में अनुशासन, सतर्कता और आपसी तालमेल साफ नजर आया। अभ्यास के दौरान संभावित खतरे की स्थिति मानकर आगे बढ़ने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई करने की प्रक्रिया का पूर्वाभ्यास किया गया।
महाकाल लोक में बने विशाल खंभे कमांडो के लिए आड़ का काम कर रहे थे। एक जवान आगे बढ़ता, तो दूसरा उसे सुरक्षा कवच देते हुए उसके पीछे अपनी स्थिति संभालता। इस तरह पूरी टीम निर्धारित रणनीति के तहत लक्ष्य की ओर बढ़ती रही।अचानक छाया अंधेरा, फिर भी नहीं थमी कमांडो की रफ्तार
मॉक ड्रिल का सबसे दिलचस्प दृश्य उस समय सामने आया, जब लक्ष्य की तलाश के दौरान परिसर में अचानक अंधेरा हो गया। आम परिस्थितियों में रोशनी का अभाव किसी भी अभियान को चुनौतीपूर्ण बना सकता है, लेकिन कमांडो की गतिविधियों पर इसका कोई खास असर दिखाई नहीं दिया।जवानों ने अंधेरे में भी अपनी रणनीति के मुताबिक आगे बढ़ना जारी रखा। वे परिसर में मौजूद खंभों और दूसरी संरचनाओं की आड़ लेकर संभावित खतरे की दिशा में बढ़ रहे थे।
उनके बीच समन्वय और सावधानी इस अभ्यास का अहम हिस्सा था।इसका उद्देश्य केवल किसी संदिग्ध तक पहुंचना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया, आपसी तालमेल और कार्रवाई की क्षमता को परखना भी था, जब दृश्यता सीमित हो और स्थिति तेजी से बदल रही हो।
कोने में छिपा था संदिग्ध, श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने का भी अभ्यास
अभ्यास के दौरान एक व्यक्ति को संदिग्ध की भूमिका में रखा गया था, जो परिसर के एक कोने में छिपा हुआ था। कमांडो ने तलाश अभियान चलाकर उसे ढूंढ निकाला। इसके साथ ही संभावित संकट के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की प्रक्रिया का भी पूर्वाभ्यास किया गया।मॉक ड्रिल में घायल श्रद्धालु को अस्पताल पहुंचाने का दृश्य भी शामिल था। संदिग्ध और श्रद्धालुओं की भूमिका निभाने वाले लोग इस अभ्यास का हिस्सा थे। इस तरह सुरक्षा बलों ने केवल खतरे से निपटने की रणनीति ही नहीं, बल्कि संकट के दौरान आम लोगों की सुरक्षा और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया।इस पूरे अभियान में स्थानीय पुलिस और मंदिर प्रशासन की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। किसी बड़े धार्मिक आयोजन या संवेदनशील स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था केवल कमांडो की तैनाती तक सीमित नहीं होती। वहां स्थानीय पुलिस, प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल भी उतना ही जरूरी होता है।
देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है महाकाल मंदिर
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष अवसरों, त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी होती है। ऐसे में मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।महाकाल लोक के विस्तार और श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही के बीच सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह आवश्यक है कि वे किसी भी संभावित आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए लगातार तैयार रहें। मॉक ड्रिल इसी तैयारी का हिस्सा है, जिसके जरिए सुरक्षा व्यवस्था की व्यावहारिक चुनौतियों को समझने और अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर करने का प्रयास किया जाता है।
2023 में भी हुआ था सुरक्षा अभ्यास
महाकाल मंदिर परिसर में सुरक्षा संबंधी पूर्वाभ्यास पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले 26 सितंबर 2023 को भी मंदिर परिसर में आतंकी घटनाओं जैसी संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास किया गया था।इस तरह के अभ्यासों का उद्देश्य किसी वास्तविक खतरे की आशंका की घोषणा करना नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों को संभावित परिस्थितियों के लिए तैयार रखना है। किसी भी संवेदनशील धार्मिक स्थल पर सुरक्षा की मजबूती का आकलन केवल सामान्य दिनों की व्यवस्था से नहीं, बल्कि संकट के समय एजेंसियों की प्रतिक्रिया से भी होता है।
100 से अधिक NSG कमांडो हुए शामिल
मॉक ड्रिल को लेकर उज्जैन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा ने बताया कि महाकाल मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। किसी भी प्रकार की आपातकालीन परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए यह उन्नत स्तर का अभ्यास किया गया।उनके मुताबिक, इस मॉक ड्रिल में 100 से अधिक एनएसजी कमांडो शामिल हुए। इसके अलावा मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस की टीमें भी मौजूद रहीं।इस अभ्यास का व्यापक उद्देश्य संभावित खतरे की स्थिति में त्वरित कार्रवाई, सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की तैयारियों को परखना था।
एनएसके का विश्लेषण:
सुरक्षा की असली परीक्षा संकट के समय होती है
महाकाल मंदिर में आधी रात को हुई इस मॉक ड्रिल ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा केवल स्थायी इंतजामों से सुनिश्चित नहीं की जा सकती। इसके लिए लगातार अभ्यास, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित सुरक्षा बल और स्थानीय प्रशासन के बीच मजबूत तालमेल आवश्यक है।
हालांकि, इस अभ्यास को वास्तविक आतंकी घुसपैठ या हमले की घटना के रूप में देखना सही नहीं होगा। यह संभावित खतरे से निपटने की तैयारियों का पूर्वाभ्यास था। इसकी वास्तविक उपयोगिता इसी बात में है कि किसी अप्रत्याशित परिस्थिति में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे और संबंधित एजेंसियां बिना घबराहट के प्रभावी कार्रवाई कर सकें।
महाकाल की नगरी में आधी रात को उतरे ब्लैक कमांडो का यह अभ्यास एक स्पष्ट संदेश देता है—आस्था के केंद्रों की सुरक्षा में सतर्कता, तैयारी और समन्वय से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
एनएसके न्यूज डेस्क
