बी के झा पटना, 27 अक्टूबर
बिहार की राजनीति में आज का दिन कई दिग्गजों के सियासी प्रभाव की परीक्षा लेने जा रहा है। पटना की स्नातक और शिक्षक विधान परिषद सीटों के चुनाव परिणाम पर सबकी निगाहें टिकी हैं। इन दोनों सीटों पर होने वाली मतगणना केवल उम्मीदवारों की जीत-हार तय नहीं करेगी, बल्कि जदयू के भीतर बगावत, जन सुराज की राजनीतिक महत्वाकांक्षा और प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति का भी इम्तिहान लेगी।
सबसे दिलचस्प मुकाबला पटना स्नातक सीट पर है, जहां जदयू उम्मीदवार और निवर्तमान विधान पार्षद नीरज कुमार के सामने जन सुराज पार्टी के डॉ. अनुज सिंह समेत कुल 18 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस चुनाव ने उस समय राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पार्टी लाइन से हटकर अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार किया। इसके बाद जदयू ने अनंत सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया। अब सवाल यह है कि अनंत सिंह का यह सियासी दांव मतदाताओं के बीच कितना असरदार साबित हुआ।
अनंत सिंह की बगावत का क्या निकलेगा नतीजा?
पटना स्नातक सीट का चुनाव इस बार सामान्य राजनीतिक मुकाबले से आगे निकल चुका है। जदयू के अपने विधायक रहे अनंत सिंह का जन सुराज उम्मीदवार के पक्ष में उतरना पार्टी नेतृत्व के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला घटनाक्रम रहा। जदयू ने इसे गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की। उनकी विधायिकी समाप्त करने की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजे जाने की बात भी सामने आई है।
दूसरी ओर, अनंत सिंह के समर्थन ने डॉ. अनुज सिंह के चुनाव को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब मतगणना के दौरान यह देखना अहम होगा कि इस समर्थन का वास्तविक चुनावी लाभ जन सुराज उम्मीदवार को मिलता है या जदयू के नीरज कुमार अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखते हैं।यह परिणाम अनंत सिंह की व्यक्तिगत राजनीतिक ताकत के आकलन का आधार भी बन सकता है। हालांकि, किसी उम्मीदवार की जीत या हार को केवल एक नेता के प्रभाव से जोड़ना जल्दबाजी होगी। अंतिम तस्वीर मतगणना पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
नीरज कुमार के सामने अपनी सियासी जमीन बचाने की चुनौती
पटना स्नातक सीट पर जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। उनके मुकाबले में राष्ट्रीय जनता दल के दिलीप कुमार, जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह और कांग्रेस के डॉ. असदुल्लाह खान समेत कुल 18 प्रत्याशी हैं।इस सीट पर कुल 87,583 मतदाता हैं और मतदान का प्रतिशत 36.19 रहा। अब मतगणना के दौरान यह स्पष्ट होगा कि स्नातक मतदाताओं ने किस उम्मीदवार पर भरोसा जताया है।नीरज कुमार के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी के भीतर से मिली चुनौती ने मुकाबले को राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना दिया है। वहीं, जन सुराज के लिए यह चुनाव अपनी चुनावी पहुंच और संगठनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर है।
शिक्षक सीट पर प्रशांत किशोर की रणनीति की परीक्षा
पटना शिक्षक विधान परिषद सीट पर भी मुकाबला कम दिलचस्प नहीं है। यहां भाजपा के निवर्तमान विधान पार्षद नवल किशोर यादव, राजद के डॉ. संजीव कुमार सिंह, जन सुराज पार्टी की दिव्या ज्योति और कांग्रेस के डॉ. संजय यादव प्रमुख उम्मीदवार हैं।जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दिव्या ज्योति के समर्थन में जोरदार प्रचार किया था। ऐसे में इस सीट का परिणाम उनकी रणनीति के प्रभाव का आकलन करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।प्रशांत किशोर के सामने चुनौती केवल उम्मीदवार को चुनाव जिताने की नहीं, बल्कि स्थापित राजनीतिक दलों के प्रभाव वाले चुनावी क्षेत्र में जन सुराज की स्वीकार्यता साबित करने की भी है। यदि पार्टी का प्रदर्शन मजबूत रहता है, तो इससे उसके राजनीतिक अभियान को नई ऊर्जा मिल सकती है। दूसरी ओर, कमजोर प्रदर्शन उसकी रणनीति पर सवाल खड़े कर सकता है।हालांकि, शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग सामान्य विधानसभा चुनाव के मतदाता वर्ग से अलग होता है। इसलिए इन परिणामों को पूरे बिहार की राजनीतिक दिशा का सीधा संकेत मानना उचित नहीं होगा।
सुबह आठ बजे से मतगणना, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
पटना की दोनों विधान परिषद सीटों के लिए मतगणना बांकीपुर राजकीय कन्या सीनियर सेकेंड्री स्कूल में कराई जा रही है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह आठ बजे से वोटों की गिनती शुरू होनी है। मतगणना केंद्र पर प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम किए हैं और आम लोगों के प्रवेश पर रोक रखी गई है।
मतगणना के लिए स्नातक सीट पर 14 टेबल और शिक्षक सीट पर सात टेबल निर्धारित किए गए हैं। दोनों सीटों पर मतगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
पटना के नतीजों पर पूरे बिहार की नजर
पटना की इन दोनों सीटों के नतीजों को लेकर राजनीतिक दलों और समर्थकों में उत्सुकता है। स्नातक सीट पर अनंत सिंह की बगावत और शिक्षक सीट पर प्रशांत किशोर के प्रचार ने मुकाबले को खास बना दिया है।एक तरफ जदयू अपने उम्मीदवार नीरज कुमार की जीत के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत बनाए रखने की उम्मीद कर रही है, तो दूसरी तरफ जन सुराज अपनी चुनावी संभावनाओं को साबित करने के लिए मैदान में है।
भाजपा और राजद के उम्मीदवार भी अपनी-अपनी सीटों पर मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाताओं का फैसला किसके पक्ष में जाता है।
क्या नीरज कुमार अपनी सीट बचाने में सफल होंगे?
क्या अनंत सिंह के समर्थन से डॉ. अनुज सिंह को फायदा मिलेगा?
और क्या दिव्या ज्योति के जरिए प्रशांत किशोर शिक्षक सीट पर अपनी रणनीति का असर दिखा पाएंगे?
इन सवालों का जवाब मतगणना पूरी होने के साथ सामने आएगा। फिलहाल, पटना की दोनों सीटों पर मुकाबले के हर राउंड पर राजनीतिक निगाहें टिकी हैं।
एन एस के – बिहार की राजनीति पर पैनी नजर
NSK news India

