बी के झा – एनएसके
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पटना/नई दिल्ली, 27 अक्टूबर
पटना से दिल्ली तक अनंत सिंह प्रकरण ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर पार्टी ने मोकामा विधायक अनंत सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है, तो दूसरी ओर उनकी विधायकी खत्म कराने की पहल ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। इस बीच संसद परिसर में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से जब अनंत सिंह पर कार्रवाई को लेकर सवाल पूछे गए, तो दोनों नेताओं के जवाब ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी।
पत्रकारों के सवाल पर ललन सिंह ने कहा कि इस मामले में संजय झा से बात कीजिए। वहीं, जब सवालों का रुख संजय झा की ओर हुआ, तो उन्होंने प्रतिक्रिया देने से परहेज किया और हाथ के इशारे से आगे बढ़ गए। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं के सामने होने के बावजूद अनंत सिंह पर कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।
ललन सिंह ने कहा- संजय झा जी से पूछिए
संसद परिसर में पत्रकारों ने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से पूछा कि अनंत सिंह के खिलाफ पार्टी की कार्रवाई में उनकी सदस्यता का मुद्दा भी शामिल है या नहीं। सवाल सुनने के बाद ललन सिंह अपनी गाड़ी की ओर बढ़े। वहां पहुंचकर उन्होंने पत्रकारों से कहा, “संजय झा जी से बात करिए।”इसके बाद गाड़ी में बैठने से पहले उन्होंने संजय झा की ओर देखकर मुस्कुराते हुए कुछ कहा। उनके इस अंदाज को लेकर भी चर्चा हुई।
हालांकि, इस संक्षिप्त बातचीत से यह स्पष्ट नहीं हुआ कि अनंत सिंह की सदस्यता को लेकर पार्टी नेतृत्व की आगे की रणनीति क्या है।ललन सिंह का जवाब सामने आते ही पत्रकारों ने संजय झा से स्पष्टीकरण मांगा।
लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वह हाथ के इशारे से मना करते हुए आगे बढ़ गए।इस घटनाक्रम ने एक अहम सवाल खड़ा किया है: जब पार्टी के एक वरिष्ठ नेता दूसरे वरिष्ठ नेता की ओर जवाबदेही का संकेत दें और दूसरे नेता प्रतिक्रिया देने से बचें, तो क्या अनंत सिंह प्रकरण पर जदयू की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट हो पाती है? फिलहाल, सार्वजनिक रूप से सामने आए इस संवाद से उस सवाल का उत्तर नहीं मिला।

पहले संजय झा ने ललन सिंह की ओर मोड़ी थी गेंद
इस प्रकरण का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि इससे पहले पटना में संजय झा से अनंत सिंह और जदयू के एमएलसी उम्मीदवार नीरज कुमार के बीच विवाद को लेकर सवाल पूछा गया था। उस समय संजय झा ने जिम्मेदारी ललन सिंह की ओर बढ़ा दी थी।उन्होंने कहा था कि अनंत सिंह और नीरज कुमार से जुड़ा मामला पार्टी के संज्ञान में है। साथ ही, उन्होंने इसे ललन सिंह के क्षेत्र से जुड़ा विषय बताते हुए कहा था कि पार्टी ने उनसे बातचीत कर समाधान निकालने की जिम्मेदारी दी है।
अब दिल्ली में ललन सिंह ने इसी मुद्दे पर संजय झा से बात करने को कहा। इस तरह दोनों नेताओं के बीच सवालों को एक-दूसरे की ओर मोड़ने का घटनाक्रम राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।हालांकि, इस संवाद के आधार पर दोनों नेताओं के बीच किसी मतभेद का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इतना जरूर है कि अनंत सिंह पर कार्रवाई जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पार्टी की ओर से स्पष्ट और एकीकृत सार्वजनिक बयान सामने आने की प्रतीक्षा बनी हुई है।### अनंत सिंह की विधायकी खत्म कराने की दिशा में जदयू का कदमउधर, पटना में इस मामले से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा विधानसभा पहुंचे।
उनके हाथ में एक पत्र था, जिसे विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को सौंपे जाने की बात सामने आई।उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पत्र में अनंत सिंह की विधायकी समाप्त करने का अनुरोध किया गया है। हालांकि, सदस्यता समाप्त करने के अनुरोध और विधानसभा अध्यक्ष के अंतिम निर्णय के बीच कानूनी तथा संवैधानिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। केवल पत्र सौंपे जाने से किसी विधायक की सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं हो जाती।
इस दौरान उमेश कुशवाहा ने भी पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया और विधानसभा के भीतर चले गए।इस घटनाक्रम से अनंत सिंह प्रकरण का राजनीतिक और संस्थागत, दोनों स्तरों पर महत्व बढ़ गया है। अब निगाह इस बात पर है कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष रखे गए अनुरोध पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और जदयू नेतृत्व इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है।
स्थानीय समर्थकों के आरोप, जदयू की राजनीति पर सवाल
इस पूरे प्रकरण के बीच कुछ स्थानीय नीतीश समर्थकों ने संजय झा की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संजय झा पार्टी के भीतर ऐसे फैसलों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिनसे नीतीश कुमार के पुराने सहयोगियों और समर्थकों की राजनीतिक भूमिका कमजोर हो सकती है।कुछ समर्थकों ने आरोप लगाया कि संजय झा अंदरूनी तौर पर भाजपा के हित में काम कर रहे हैं और उनकी राजनीतिक भूमिका जदयू को कमजोर कर सकती है। उनका दावा है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने समय रहते अपने संगठन और राजनीतिक दिशा पर ध्यान नहीं दिया, तो बिहार में जदयू की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, ये स्थानीय समर्थकों के आरोप और राजनीतिक आशंकाएं हैं। इनके समर्थन में स्वतंत्र प्रमाण सामने आए बिना इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। संजय झा की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
राजद ने भी साधा निशाना
इस विवाद पर राजद प्रवक्ता प्रियंका भारती ने भी जदयू पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व बिहार में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए जदयू को कमजोर करना चाहता है। उनके आरोप के मुताबिक, संजय झा की भूमिका इस राजनीतिक घटनाक्रम में महत्वपूर्ण रही है।
प्रियंका भारती ने नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री अपनी पार्टी की स्थिति को लेकर क्या कदम उठाते हैं। राजद प्रवक्ता के बयान को विपक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए।
भाजपा या संजय झा की मंशा को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
अनंत सिंह प्रकरण से जदयू के सामने कई सवाल
अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई अब केवल पार्टी अनुशासन तक सीमित नहीं रह गई है। मामला विधायकी, संगठनात्मक जवाबदेही और बिहार की गठबंधन राजनीति से भी जुड़ गया है।एक तरफ पार्टी की ओर से विधानसभा अध्यक्ष तक मामला पहुंचाने की पहल हुई है, तो दूसरी तरफ पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं से पूछे गए सवालों पर स्पष्ट सार्वजनिक जवाब नहीं मिल सका। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि जदयू नेतृत्व आगे की रणनीति कैसे तय करता है और अनंत सिंह के मामले में कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।
फिलहाल, संसद परिसर में ललन सिंह और संजय झा के बीच पत्रकारों के सवालों पर सामने आए अलग-अलग रुख ने राजनीतिक चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है। लेकिन इस घटनाक्रम को पार्टी के भीतर किसी निश्चित टकराव या साजिश का प्रमाण मानने के बजाय आधिकारिक बयानों, दस्तावेजों और आगे की कार्रवाई के आधार पर परखना अधिक उचित होगा।
बिहार की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है—अनंत सिंह पर कार्रवाई को लेकर जदयू की अगली आधिकारिक घोषणा क्या होगी और विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उठाए गए मुद्दे का कानूनी परिणाम क्या निकलता है?
