अब कागजी फाइलों से आजादी की तैयारी, डिजिटल होगी सम्राट की कैबिनेट मीटिंग; टैबलेट-लैपटॉप पर दिखेंगे बिहार के मंत्री; डिजिटल व्यवस्था के बावजूद मंत्रियों की उपस्थिति रहेगी अनिवार्य

बी के झा , एन एस के

NSK news India

पटना, 27 अक्टूबर

बिहार में सरकारी कामकाज को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की तैयारी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठकें अब कागजी फाइलों के बजाय डिजिटल दस्तावेजों के सहारे संचालित करने की योजना है। आने वाले दिनों में बिहार के मंत्री हाथों में मोटी-मोटी फाइलों के बजाय टैबलेट और लैपटॉप के साथ कैबिनेट की बैठक में नजर आ सकते हैं।

बैठक का एजेंडा हो या सरकार के सामने रखे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रस्ताव, इनसे संबंधित दस्तावेज डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।राज्य मंत्रिमंडल इस व्यवस्था से जुड़े प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे चुका है। अब इसे धरातल पर उतारने के लिए ई-कैबिनेट पोर्टल विकसित करने का काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इस पोर्टल के निर्माण और तकनीकी व्यवस्था की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) को सौंपी गई है। पोर्टल तैयार होने के बाद कैबिनेट की बैठक से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को ऑनलाइन माध्यम से पूरा करने का रास्ता साफ होगा।

एक डिजिटल मंच पर मिलेंगे एजेंडे और प्रस्ताव

नई व्यवस्था के तहत कैबिनेट की बैठक का एजेंडा तैयार करने से लेकर मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले प्रस्तावों और उनसे जुड़े दस्तावेजों को मंत्रियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया डिजिटल बनाने की योजना है। इससे मंत्रियों को बैठक से पहले जरूरी जानकारियों और कागजात के लिए अलग-अलग फाइलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वे एक ही डिजिटल मंच पर संबंधित दस्तावेजों को देख सकेंगे।

फिलहाल इस पहल का उद्देश्य कैबिनेट की कार्यप्रणाली को तकनीक आधारित बनाना और दस्तावेजों के प्रबंधन को अधिक सुविधाजनक बनाना है। पोर्टल के माध्यम से सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रिया भी व्यवस्थित होने की उम्मीद है। हालांकि, इसके वास्तविक लाभ पोर्टल की कार्यक्षमता और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।

कागज की खपत घटेगी, कामकाज में आएगी सुविधा

कैबिनेट की बैठकों में प्रस्तावों और दस्तावेजों की छपाई पर निर्भरता कम होने से कागज की खपत घटने की उम्मीद है। साथ ही, दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने, बैठक से पहले मंत्रियों तक पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर संबंधित जानकारी देखने में भी सुविधा हो सकती है। डिजिटल व्यवस्था का एक अहम पहलू यह भी है कि सरकारी कामकाज में सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बढ़ेगा।

हालांकि, दस्तावेजों की गोपनीयता, डिजिटल सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्था की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि कैबिनेट के सामने आने वाले कई प्रस्ताव प्रशासनिक और नीतिगत दृष्टि से संवेदनशील होते हैं।

डिजिटल दस्तावेज, लेकिन बैठक में मौजूद रहना जरूरी

ई-कैबिनेट व्यवस्था लागू होने का अर्थ यह नहीं होगा कि मंत्रियों को बैठक में उपस्थित होने से छूट मिल जाएगी। टैबलेट या लैपटॉप पर दस्तावेज देखने की सुविधा मिलने के बावजूद मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रियों की उपस्थिति आवश्यक रहेगी।कुल मिलाकर, बिहार सरकार की यह पहल कैबिनेट की पारंपरिक कागजी कार्यप्रणाली को डिजिटल स्वरूप देने की दिशा में एक कदम है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि ई-कैबिनेट पोर्टल कब तक तैयार होता है और नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकारी निर्णय प्रक्रिया में किस स्तर तक बदलाव देखने को मिलता है।

एनएसके – पटना विशेष टिप्पणी:

डिजिटल कैबिनेट का असली उद्देश्य सिर्फ कागज बचाना नहीं, बल्कि सरकारी कामकाज को अधिक व्यवस्थित, सुलभ और तकनीक-सक्षम बनाना होगा।

इसकी सफलता इस बात से तय होगी कि नई व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है और इससे निर्णय प्रक्रिया को कितना व्यावहारिक लाभ मिलता है।

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