बाजार का अचार छोड़िए! घर पर बनाइए मिथिला स्पेशल हरी मिर्च का चटपटा अचार, स्वाद ऐसा कि सादा खाना भी लगे खास, मिनटों में तैयार होगा मिथिला का खट्टा-तीखा अचार, सही तरीके से रखें तो लंबे समय तक रहेगा स्वाद बरकरार

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 23 सितंबर

दाल-चावल हो, गर्मागर्म पराठा हो या फिर सादा खिचड़ी… अगर साथ में चटपटा अचार मिल जाए तो खाने का स्वाद अपने आप बदल जाता है। खासकर मिथिला के खान-पान में अचार का अपना अलग ही महत्व है। यहां के देसी मसालों और सरसों के तेल की खुशबू किसी भी साधारण खाने को खास बना देती है।अगर आपको भी तीखा, खट्टा और मसालेदार अचार पसंद है, तो बाजार से महंगे अचार खरीदने की जरूरत नहीं। आप घर पर ही मिथिला स्टाइल हरी मिर्च का अचार तैयार कर सकते हैं। इसे बनाने की प्रक्रिया आसान है और सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर मसाले घर की रसोई में आसानी से मिल जाते हैं।

क्या है मिथिला वाले हरी मिर्च के अचार का देसी राज?

इस अचार की असली पहचान है दरदरी पिसी राई, सौंफ और सरसों का तेल। इसके साथ अमचूर, अजवाइन, कलौंजी और हल्दी मसाले को ऐसा स्वाद देते हैं कि अचार का हर टुकड़ा तीखा होने के साथ खुशबूदार भी लगता है।यह अचार सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाता, बल्कि मिथिला की पारंपरिक रसोई की उस सादगी को भी सामने लाता है, जिसमें कम सामग्री से भरपूर स्वाद पैदा किया जाता है।अचार के लिए चाहिए ये सामग्री-

हरी मिर्च – लगभग 250-300 ग्राम

पीली या काली राई, दरदरी पिसी –3 बड़े चम्मच

सौंफ, दरदरी पिसी – 2 बड़े चम्मच

अमचूर पाउडर – 1½ बड़ा चम्मच

हल्दी पाउडर – 1 बड़ा चम्मच-

अजवाइन – 1 छोटा चम्मच

कलौंजी (मंगरैल) – ½ छोटा चम्मच

हींग – ¼ छोटा चम्मच-

सरसों का तेल – ½ कप-

नमक – करीब 2 बड़े चम्मच या स्वादानुसार

वैकल्पिक: अमचूर की जगह स्वाद के अनुसार नींबू का रस इस्तेमाल किया जा सकता है।

सबसे पहले मिर्च की तैयारी

हरी मिर्च को अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इसे सूती या साफ कपड़े से पूरी तरह सुखाना बेहद जरूरी है। याद रखिए—अचार में नमी रह गई तो उसके जल्दी खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए मिर्च धोने के बाद उसे तब तक सुखाएं, जब तक उस पर पानी की बूंदें बिल्कुल न रहें।अब मिर्च के डंठल हटा दें। आप चाहें तो मिर्च को बीच से चीरा लगाकर पूरा रखें या छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।

मसालों में ऐसे लगेगा देसी तड़का

एक बड़े और बिल्कुल सूखे बर्तन में कटी हुई हरी मिर्च डालें। अब इसमें दरदरी पिसी राई, सौंफ, हल्दी, अमचूर, अजवाइन, कलौंजी, हींग और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें।

अब आती है इस अचार की सबसे अहम कड़ी—सरसों का तेल।‌एक पैन में सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें। जब तेल से धुआं उठने लगे तो गैस बंद कर दें। तेल को थोड़ा ठंडा होने दें, ताकि वह बहुत ज्यादा गर्म न रहे।अब गुनगुना सरसों का तेल मिर्च और मसालों के ऊपर डालें। चम्मच की मदद से अच्छी तरह मिलाएं, ताकि मसाला हर मिर्च पर समान रूप से चिपक जाए।

1-2 दिन का इंतजार और स्वाद होगा और भी जबरदस्त

मसाले और तेल के साथ मिर्च को अच्छी तरह मिलाने के बाद इसे पूरी तरह ठंडा होने दें।अब अचार को साफ, सूखे और अच्छी तरह सूखाए गए कांच के जार में भर दें। अचार को तुरंत भी खाया जा सकता है, लेकिन अगर मौसम और धूप अनुकूल हो तो जार को 1-2 दिन हल्की धूप दिखाने से मसालों का स्वाद और अच्छी तरह मिल सकता है।धूप दिखाते समय जार को अच्छी तरह बंद रखें और उसे नमी से बचाएं।महीनों तक अचार खराब न हो, इसके लिए इन बातों का रखें ध्यानअचार की उम्र बढ़ाने में सिर्फ मसाले नहीं, बल्कि सफाई और नमी से बचाव सबसे अहम है।

पहली बात: मिर्च में पानी बिल्कुल नहीं रहना चाहिए।

दूसरी बात: जिस जार में अचार भर रहे हैं, वह पूरी तरह साफ और सूखा होना चाहिए।

तीसरी बात: अचार निकालने के लिए हमेशा साफ और सूखा चम्मच इस्तेमाल करें।

चौथी बात: अचार को ऐसी जगह रखें जहां नमी और पानी का संपर्क न हो।अगर अचार में बदबू, फफूंदी या असामान्य बदलाव नजर आए तो उसे खाने से बचें।

दाल-भात से लेकर पराठे तक, हर खाने का स्वाद बढ़ाएगा

मिथिला स्टाइल हरी मिर्च का यह अचार दाल-भात, खिचड़ी, पराठा, पूरी और सत्तू के साथ खास तौर पर खूब जमता है। इसकी खासियत यही है कि इसे बनाने में बहुत ज्यादा मेहनत नहीं लगती, लेकिन खाने की मेज पर पहुंचते ही इसकी मौजूदगी महसूस होने लगती है।

तो अगली बार जब घर में हरी मिर्च ज्यादा बच जाए, उसे यूं ही मत छोड़िए। कुछ देसी मसाले, सरसों का तेल और थोड़ी सी तैयारी से उसे बदल दीजिए मिथिला के चटपटे और खुशबूदार हरी मिर्च के अचार में।

एन एस के डेस्क

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