बी के झा
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बेगूसराय, 18 अगस्त
सावन की तीसरी सोमवारी पर भगवान शिव को जल अर्पित करने पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं के बीच बिहार के बेगूसराय स्थित बाबा हरिगिरि धाम से एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए। वायरल वीडियो में गढ़पुरा थाने में तैनात एक सब-इंस्पेक्टर कतार में खड़े कांवरिया श्रद्धालुओं पर डंडे बरसाते दिखाई दे रहे हैं।वीडियो सार्वजनिक होते ही बेगूसराय के पुलिस अधीक्षक मनीष ने तत्काल संज्ञान लिया और आरोपी सब-इंस्पेक्टर किशन कुमार को निलंबित कर दिया। साथ ही बखरी डीएसपी को पूरे मामले की विभागीय जांच सौंप दी गई है।
आस्था की कतार में अचानक बरसी लाठी
हरिगिरि धाम, चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। सोमवारी के अवसर पर हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए लंबी कतार में शांतिपूर्वक अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान आरोप है कि सब-इंस्पेक्टर किशन कुमार ने बिना किसी स्पष्ट उकसावे के कई श्रद्धालुओं को डंडे से पीटना शुरू कर दिया।घटना का वीडियो वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी फैल गई।
पुलिस मुख्यालय की त्वरित कार्रवाई
मुख्यालय डीएसपी निखिल कुमार ने पुष्टि की कि वायरल वीडियो के आधार पर प्रथम दृष्टया पुलिसकर्मी का आचरण अनुचित प्रतीत हुआ है। इसी आधार पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई की गई है।प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि और गंभीर तथ्य सामने आते हैं तो विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: सत्ता और विपक्ष आमने-सामने
सत्तापक्ष-: सरकार समर्थक नेताओं ने कहा कि किसी भी पुलिसकर्मी को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। निलंबन इस बात का प्रमाण है कि अनुशासनहीनता पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।
विपक्ष-: विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि धार्मिक आयोजनों में भी पुलिस का व्यवहार संवेदनशील नहीं रहा। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि केवल निलंबन नहीं, बल्कि निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए ताकि जिम्मेदारी तय हो सके।> ध्यान दें: मुख्यमंत्री अथवा सरकार पर लगाए गए आरोप विपक्ष और स्थानीय लोगों के राजनीतिक बयान हैं; इनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कानूनविदों की राय: वर्दी अधिकार नहीं, जवाबदेही है
संवैधानिक मामलों के जानकारों का कहना है कि पुलिस को भीड़ नियंत्रण का अधिकार अवश्य है, लेकिन अनावश्यक बल प्रयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के गरिमामय जीवन के अधिकार से जुड़ा प्रश्न बन सकता है।यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि श्रद्धालुओं पर बिना वैध कारण बल प्रयोग हुआ, तो विभागीय दंड के अतिरिक्त संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई संभव है।
शिक्षाविदों और समाजसेवियों की चिंता
शिक्षाविदों का मानना है कि पुलिस प्रशिक्षण में मानवीय व्यवहार, धार्मिक आयोजनों के प्रबंधन और तनाव नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि:-
धार्मिक मेलों में पुलिस के लिए विशेष आचार संहिता लागू हो।
सभी जवानों को भीड़ प्रबंधन का पुनः प्रशिक्षण दिया जाए।
सार्वजनिक स्थलों पर बॉडी कैमरा और निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए।
सबसे बड़ा सवाल
हरिगिरि धाम की यह घटना केवल एक पुलिसकर्मी की गलती है या भीड़ प्रबंधन की व्यापक विफलता? इसका अंतिम उत्तर विभागीय जांच से सामने आएगा।
लेकिन इतना तय है कि आस्था के मार्ग पर खड़ी खाकी से समाज कठोरता नहीं, संवेदनशीलता और संयम की अपेक्षा करता है।
