बी के झा
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नई दिल्ली, 11 सितंबर
दुनिया की बदलती भू-राजनीति के बीच राजधानी दिल्ली एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन गई है। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए दुनिया के प्रमुख नेताओं का भारत पहुंचना शुरू हो चुका है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे पालम एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे। उनके आगमन के साथ ही दिल्ली में BRICS सम्मेलन का कूटनीतिक तापमान भी बढ़ गया है।
अब निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की अहम मुलाकात पर टिकी हैं। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और बदलती वैश्विक परिस्थितियों जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
पुतिन के साथ मोदी की मुलाकात पर दुनिया की नजर
भारत और रूस के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी पर टिके रहे हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति में शक्ति-संतुलन तेजी से बदल रहा है, मोदी-पुतिन वार्ता को खास महत्व दिया जा रहा है।
सूत्रों और संभावित एजेंडा जानकारी के मुताबिक,
बातचीत में सुखोई-57 स्टील्थ फाइटर जेट,
S-400 की डिलीवरी,
ऊर्जा और क्रूड ऑयल,
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार,
अंतरिक्ष सहयोग,
आतंकवाद और ड्रग तस्करी पर लगाम जैसे विषय प्रमुख हो सकते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को गति देने पर भी चर्चा संभव है।
रक्षा क्षेत्र में रूस के साथ संभावित नए समझौते खास आकर्षण का केंद्र हैं।
सुखोई-57 और एयर डिफेंस क्षमता से जुड़े प्रस्तावों को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ने के संकेत हैं। हालांकि अंतिम समझौते को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा।
शनिवार को आएंगे शी जिनपिंग, मोदी के साथ होगी अहम बैठक
रूस के बाद अब चीन पर पूरी दुनिया की निगाह है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को दिल्ली पहुंचेंगे। BRICS के मंच पर मोदी और जिनपिंग की मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में संवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक में सीमा से जुड़े मुद्दों के अलावा व्यापार, आर्थिक संबंध और क्षेत्रीय एवं वैश्विक परिस्थितियों पर बातचीत की संभावना है।
BRICS का मंच भारत और चीन के लिए सिर्फ बहुपक्षीय सहयोग का मंच नहीं, बल्कि अपनी-अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को सामने रखने का अवसर भी है।
ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान भी आज पहुंचेंगे
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी शुक्रवार दोपहर दिल्ली पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी शाम करीब 6:15 बजे द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है।माना जा रहा है कि बैठक में मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया लगातार तनाव के दौर से गुजर रहा है, भारत-ईरान संवाद का अपना अलग रणनीतिक महत्व है।
दिल्ली बनी अभेद्य किला, 30 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात
विश्व के बड़े नेताओं की मौजूदगी के मद्देनजर राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक मजबूत किया गया है। करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किए गए हैं, जिनमें दिल्ली पुलिस के लगभग 15 हजार जवान शामिल हैं।
लुटियंस दिल्ली,
VVIP क्षेत्रों,
प्रमुख होटलों और सम्मेलन स्थल के आसपास सुरक्षा के कई स्तर बनाए गए हैं। यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री एक बस में जाएंगे भारत मंडपम
BRICS सम्मेलन के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के लिए एक खास व्यवस्था की गई है। अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री एक साथ बस से भारत मंडपम जाएंगे।बताया गया है कि सभी नेता पहले संसद भवन में एकत्र होंगे और वहां से एक साथ सम्मेलन स्थल के लिए रवाना होंगे। इसका उद्देश्य VVIP वाहनों की संख्या कम करना और आम लोगों के लिए यातायात व्यवधान को सीमित रखना है।
रूस के विदेश मंत्री लावरोव भी दिल्ली पहुंचे
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच चुके हैं। उनकी मौजूदगी इस सम्मेलन में रूस की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को दर्शाती है।
AIIB प्रमुख और BRICS पार्टनर देशों के प्रतिनिधि भी पहुंचे
एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) की अध्यक्ष ज़ू जियायी भी 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचीं।इसके अलावा नाइजीरिया की विदेश मंत्री बियांका ओडुमेग्वु-ओजुकु भी दिल्ली पहुंच चुकी हैं।
बेलारूस,
बोलीविया,
क्यूबा,
कजाकिस्तान,
मलेशिया,
थाईलैंड,
युगांडा,
उज्बेकिस्तान और वियतनाम समेत कई BRICS पार्टनर देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी सम्मेलन को और व्यापक बना रही है।
BRICS की थीम में छिपा है बदलती दुनिया का एजेंडा
इस वर्ष BRICS की थीम है—“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”
अर्थात लचीली अर्थव्यवस्था,
नवाचार,
सहयोग और टिकाऊ विकास। इस थीम के तहत सदस्य देश व्यापार, वाणिज्य, निवेश, आर्थिक सहयोग और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगे।
BRICS अब केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का मंच नहीं रह गया है। इसके विस्तार के साथ इसका आर्थिक और भू-राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ा है। ऐसे में दिल्ली सम्मेलन को वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
मोदी ने कहा—विश्व कल्याण की भावना से होगी सार्थक चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS सम्मेलन से पहले सोशल मीडिया पर कहा कि आने वाले दिनों में दुनिया भर के नेता BRICS शिखर सम्मेलन के लिए जुटेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में विश्व कल्याण की कामना के साथ विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी।
भारत की मेजबानी, लेकिन निगाहें वैश्विक शक्ति-संतुलन पर
दिल्ली में BRICS का यह जमावड़ा महज एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं है। इसके मंच पर दुनिया की बदलती आर्थिक और रणनीतिक तस्वीर भी दिखाई देगी।
एक तरफ रूस के राष्ट्रपति पुतिन, दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और साथ में ईरान समेत BRICS तथा उसके साझेदार देशों की मौजूदगी—यह बताती है कि दिल्ली कुछ दिनों के लिए वैश्विक कूटनीति का प्रमुख केंद्र बनने जा रही है।
भारत के लिए चुनौती भी बड़ी है और अवसर भी
रूस के साथ रणनीतिक रिश्ते, चीन के साथ संवाद, पश्चिम एशिया में संतुलित कूटनीति और ग्लोबल साउथ की आवाज—इन सभी मोर्चों को एक साथ साधना मोदी सरकार की कूटनीतिक परीक्षा होगी।
अब असली सवाल यह है कि दिल्ली में होने वाली इन बैठकों से कौन-से नए समझौते निकलते हैं और BRICS के मंच से बदलती विश्व व्यवस्था को लेकर भारत कौन-सा बड़ा संदेश देता है।
NSK Delhi इस पूरे सम्मेलन से जुड़ी हर बड़ी राजनीतिक, कूटनीतिक और रणनीतिक हलचल पर लगातार नजर बनाए हुए है।
