बी के झा
NSK news Ind

नई दिल्ली/इस्लामाबाद ,22 अगस्त
वैश्विक चावल कारोबार में भारत को चुनौती देने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान अब चीन के विशाल बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति में जुट गया है। चीन द्वारा कुछ भारतीय चावल निर्यातकों पर गुणवत्ता मानकों और कीटनाशक अवशेषों से जुड़े प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पाकिस्तान इसे अपने लिए बड़ा व्यावसायिक अवसर मान रहा है। पाकिस्तानी निर्यातकों का दावा है कि वर्ष 2026 के अंत तक चीन को उसका नॉन-बासमती चावल निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।
6 लाख मीट्रिक टन निर्यात का लक्ष्य
राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान (REAP) के अनुसार, इस वर्ष चीन को 5 से 6 लाख मीट्रिक टन हाइब्रिड नॉन-बासमती चावल भेजे जाने की संभावना है। पिछले वित्त वर्ष में पाकिस्तान ने चीन को लगभग 4.56 लाख मीट्रिक टन चावल निर्यात किया था, जिसकी कीमत करीब 162 मिलियन डॉलर रही।
REAP के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जावेद जिलानी का कहना है कि भारतीय आपूर्तिकर्ताओं पर लगे गैर-शुल्क प्रतिबंधों से चीनी बाजार में जो कमी आई है, उसे भरने के लिए पाकिस्तान तेजी से अपने निर्यात अनुबंध बढ़ा रहा है।
चीन दौरे में मिले नए ऑर्डर
पिछले महीने REAP का एक प्रतिनिधिमंडल चीन पहुंचा, जहां प्रमुख आयातकों, अनाज कंपनियों और चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ कई दौर की व्यावसायिक बैठकें हुईं। इन वार्ताओं के दौरान लगभग 60,000 मीट्रिक टन चावल के नए निर्यात समझौते अंतिम रूप दिए गए।जिलानी का दावा है कि यदि मौजूदा गति बनी रही तो दिसंबर तक 5–6 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य आसानी से पार किया जा सकता है।
हाइब्रिड चावल बना पाकिस्तान की ताकत
REAP के संस्थापक चेयरमैन शहजाद मलिक के अनुसार, पाकिस्तान में उगाए जाने वाले नॉन-बासमती चावल का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा हाइब्रिड किस्म का है। चूंकि इन फसलों के लिए बड़ी मात्रा में बीज चीन से आयात किए जाते हैं, इसलिए पाकिस्तान वही किस्म पैदा करता है जिसकी मांग चीनी उपभोक्ताओं के बीच सबसे अधिक है।उनका अनुमान है कि आने वाले समय में चीन को चावल निर्यात से पाकिस्तान 400 से 500 मिलियन डॉलर तक का कारोबार हासिल कर सकता है।
भारत के लिए चुनौती या अस्थायी अवसर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति स्थायी बढ़त की गारंटी नहीं है। भारत अब भी दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है और उसकी उत्पादन क्षमता, आपूर्ति नेटवर्क तथा वैश्विक बाजार हिस्सेदारी पाकिस्तान से कहीं अधिक है।
यदि भारतीय निर्यातक चीनी गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए प्रतिबंधों से बाहर निकल आते हैं, तो प्रतिस्पर्धा फिर से संतुलित हो सकती है।
फिलहाल इतना तय है कि चीन के बाजार में पैदा हुई सप्लाई गैप को भरने के लिए पाकिस्तान पूरी ताकत झोंक रहा है और दक्षिण एशिया की यह प्रतिस्पर्धा वैश्विक चावल व्यापार में नए समीकरण बना रही है।
