Form-6 से SIR का अतिरिक्त कॉलम हटा, चुनाव आयोग के फैसले के बाद CJP फाउंडर ने पूछा- ‘पहले क्यों जरूरत थी, ज्ञानू?’; दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बीच हुआ था Form-6 को लेकर विवाद

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने Form-6 से जुड़े एक अहम बदलाव को वापस ले लिया है। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां ऑनलाइन Form-6 से SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया गया है। अब नए मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित वैधानिक Form-6 ही भरना होगा।

चुनाव आयोग के इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर Form-6 में बदलाव से जुड़ी खबर साझा करते हुए लिखा— “पहले क्यों जरूरत थी, ज्ञानू?

”दीपके की यह टिप्पणी उस विवाद की ओर इशारा करती है, जिसमें Form-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त जानकारी जोड़े जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।

आखिर Form-6 में क्या जोड़ा गया था?

Form-6 नए मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। SIR के दौरान ऑनलाइन Form-6 में एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। इसके तहत आवेदक को यह बताना होता था कि उसका नाम या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली संबंधित गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान तैयार मतदाता सूची में शामिल था या नहीं।इसी अतिरिक्त घोषणा को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form-6 में किए गए बदलाव पर आपत्ति जताई थी और सवाल उठाया था कि वैधानिक Form-6 में बदलाव किस अधिकार के तहत किया गया।

अब क्या बदला?

26 सितंबर की पूर्ण आयोग की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि SIR की अवधि समाप्त होने के बाद नियमों के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे। इसके बाद 30 सितंबर को उन राज्यों में ऑनलाइन Form-6 से अतिरिक्त SIR घोषणा हटा दी गई, जहां SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।हालांकि, जहां SIR अभी जारी है, वहां यह अतिरिक्त घोषणा अभी उपलब्ध है। यानी चुनाव आयोग का फैसला सभी राज्यों में एक साथ लागू नहीं हुआ है।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से गरमाया था मामला

Form-6 का विवाद ऐसे समय सामने आया जब चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर मतभेद की खबरें भी सुर्खियों में थीं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर विभिन्न फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें Form-6 में बदलाव से जुड़ा मामला भी शामिल था।

हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों ने इन रिपोर्टों के बाद यह कहा था कि आयोग के फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे और SIR समेत अन्य फैसलों पर एकमत था।

अभिजीत दीपके का हमला, अब आगे क्या?

Form-6 से अतिरिक्त घोषणा हटने के बाद अभिजीत दीपके ने अपने संक्षिप्त लेकिन तीखे अंदाज में चुनाव आयोग से सवाल किया है। उनका सवाल मूल रूप से यही है कि जिस अतिरिक्त घोषणा को अब हटाया गया है, उसे पहले जोड़े जाने की जरूरत क्यों पड़ी थी।इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर SIR की प्रक्रिया, मतदाता पंजीकरण के नियमों और चुनाव आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

इधर SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से भी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग अपने फैसलों और प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण देता रहा है। ऐसे में Form-6 से अतिरिक्त घोषणा को हटाया जाना इस पूरे विवाद की अगली महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है।

एन एस के की नजर

Form-6 से अतिरिक्त घोषणा हट गई, लेकिन उससे जुड़े सवाल अभी खत्म नहीं हुए हैं। विवाद का केंद्र अब सिर्फ यह नहीं है कि क्या हटाया गया, बल्कि यह भी है कि वह जोड़ा क्यों गया था, किस प्रक्रिया के तहत जोड़ा गया और उस पर उठाई गई आपत्तियों का निपटारा किस तरह हुआ।

चुनावी व्यवस्था में हर प्रक्रिया की स्पष्टता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला सीधे मतदाता और उसके अधिकार से जुड़ा है।

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