IAS की कुर्सी छोड़ी, अब नई राह पर दिव्या मित्तल! चर्चित IAS अधिकारी का इस्तीफा केंद्र ने किया मंजूर, सोशल मीडिया पर लिखा- ‘प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो’; वैष्णो देवी से लेकर लंदन तक की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 15 सितंबर

भारतीय प्रशासनिक सेवा की चर्चित अधिकारी दिव्या मित्तल ने सरकारी सेवा की उस राह को अलविदा कह दिया है, जिस पर चलते हुए उन्होंने करीब 13 वर्षों तक अपनी अलग पहचान बनाई।

उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल का इस्तीफा केंद्र सरकार ने मंजूर कर लिया है। खास बात यह है कि जब उन्होंने इस्तीफा दिया, तब उनकी सरकारी सेवा के करीब 17 वर्ष अभी बाकी थे।

दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को निजी कारणों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जिंदगी के नए उद्देश्य का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था।

सोमवार रात करीब 11 बजे उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए इस्तीफा मंजूर होने की जानकारी साझा की। लेकिन उनके संदेश ने जितना बताया, उससे कहीं अधिक संकेत भी दे दिया।

दिव्या ने अपने अगले सफर के लिए जयशंकर प्रसाद के प्रसिद्ध नाटक ‘चंद्रगुप्त’ की पंक्ति लिखी-“प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो।”यह महज एक पंक्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी अधिकारी के अगले अध्याय का संकेत भी मानी जा रही है, जिसने अब तक के करियर में कई बार परंपरागत रास्तों से अलग निर्णय लिए हैं।

मां वैष्णो देवी के दरबार में पहुंचीं, लिखा- ‘आगे की राह कठिन है’

इस्तीफा मंजूर होने से महज दो दिन पहले दिव्या मित्तल माता वैष्णो देवी के दर्शन करने पहुंची थीं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा था—“आगे की राह कठिन है… सदबुद्धि देना मां।”उनकी इस पोस्ट के बाद से ही उनके भविष्य को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था।

अब इस्तीफा मंजूर होने के बाद यह साफ हो गया है कि दिव्या मित्तल ने अपने जीवन में एक बड़ा मोड़ लेने का फैसला कर लिया है।हालांकि, आगे उनकी दिशा क्या होगी, इसे लेकर उन्होंने अभी कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

IIT-IIM से लंदन तक… फिर UPSC की राह

दिव्या मित्तल की कहानी केवल एक IAS अधिकारी बनने की कहानी नहीं है। यह उस महत्वाकांक्षा की कहानी भी है, जिसमें एक अच्छी-खासी नौकरी और विदेश का करियर छोड़कर देश की प्रशासनिक सेवा को चुना गया।

हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या ने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बेंगलुरु से MBA किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की। लेकिन विदेश की आकर्षक नौकरी उन्हें लंबे समय तक रोक नहीं सकी।उन्होंने भारत लौटकर UPSC की तैयारी शुरू की। पहले ही प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर IPS हासिल किया और उन्हें गुजरात कैडर मिला। लेकिन लककिले अभी पूरा नहीं हुआ था।

IPS प्रशिक्षण के दौरान भी उन्होंने IAS की तैयारी जारी रखी और अगले ही वर्ष 2013 में IAS परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। यानी UPSC की कठिन परीक्षा में लगातार दो वर्षों में दो बड़ी सफलताएं हासिल कर दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा में अपनी जगह बनाई।

मिर्जापुर से देवरिया तक दिखा सख्त प्रशासनिक अंदाज

IAS बनने के बाद दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह मिर्जापुर, बस्ती और देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकी हैं।उनकी छवि एक सख्त, बेबाक और जमीन पर उतरकर काम करने वाली अधिकारी की रही। प्रशासनिक कामकाज में लापरवाही मिलने पर अधिकारियों और कर्मचारियों को मौके पर ही फटकार लगाने के उनके वीडियो और तस्वीरें समय-समय पर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनते रहे।उनकी कार्यशैली ने जहां समर्थकों के बीच उन्हें लोकप्रिय बनाया, वहीं उनकी बेबाकी को लेकर चर्चाएं भी होती रहीं। यही वजह है कि दिव्या मित्तल का नाम उत्तर प्रदेश की चर्चित महिला IAS अधिकारियों में लिया जाता रहा।

देवरिया से लखनऊ और फिर सरकारी सेवा को अलविदा

मई में दिव्या मित्तल को देवरिया के जिलाधिकारी पद से हटाकर लखनऊ में राजस्व विभाग का विशेष सचिव बनाया गया था। यानी देवरिया से तबादले के कुछ ही महीनों बाद उन्होंने सरकारी सेवा से ही विदाई लेने का फैसला कर लिया।यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके करियर का बड़ा हिस्सा अभी बाकी था। सामान्य तौर पर IAS अधिकारी अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए सेवा में बने रहते हैं। ऐसे में करीब 17 वर्ष की संभावित सेवा शेष रहते इस्तीफा देना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया है।

पति ने भी छोड़ी थी सरकारी नौकरी, अब खुद का कारोबार

दिव्या मित्तल के पति गगनदीप सिंह भी सरकारी सेवा में रह चुके हैं। वह 2011 बैच के भारतीय व्यापार सेवा (ITS) अधिकारी थे। उन्होंने IIT दिल्ली से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और IIM बेंगलुरु से मैनेजमेंट की पढ़ाई की।गगनदीप सिंह ने भी 2022 में सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। सरकारी सेवा छोड़ने के बाद उन्होंने ‘न्यूरोकैप’ नाम की कंपनी शुरू की, जो भारत और विदेशों से जुड़े ट्रेडिंग कारोबार में सक्रिय है।इस लिहाज से दिव्या मित्तल का हालिया फैसला उनके परिवार के लिए सरकारी सेवा से बाहर निकलने का बिल्कुल नया अनुभव नहीं है।

लंदन में हुई मुलाकात, फिर दोनों ने बदली जिंदगी की दिशा

दिव्या मित्तल और गगनदीप सिंह की मुलाकात लंदन में नौकरी के दौरान हुई थी। दोनों ने प्रेम विवाह किया। इसके बाद दोनों ने विदेश की नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया।एक तरफ विदेश में करियर की संभावनाएं थीं और दूसरी तरफ भारत लौटकर UPSC जैसी कठिन परीक्षा की चुनौती।

दिव्या ने चुनौती को चुना और प्रशासनिक सेवा में पहुंचीं।अब करीब 13 साल की सरकारी सेवा के बाद उन्होंने एक बार फिर अपने जीवन की दिशा बदलने का फैसला किया है।

अब सवाल सिर्फ इस्तीफे का नहीं, अगली पारी का है

दिव्या मित्तल का इस्तीफा इसलिए भी सामान्य प्रशासनिक घटना नहीं माना जा रहा क्योंकि उन्होंने अपनी नौकरी उस समय छोड़ी है, जब उनके सामने अभी लंबा प्रशासनिक करियर बाकी था।उन्होंने अपने इस्तीफे के कारणों में निजी परिस्थितियों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जिंदगी के नए उद्देश्य का उल्लेख किया है।

लेकिन ‘आगे की राह कठिन है’ और फिर ‘बढ़े चलो, बढ़े चलो’ जैसे संदेश यह जरूर संकेत देते हैं कि यह अंत नहीं, बल्कि किसी नई शुरुआत की तैयारी है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि IIT-IIM से लंदन, UPSC से प्रशासन और जिलाधिकारी की कुर्सी से लेकर अब निजी जीवन के नए अध्याय तक पहुंची दिव्या मित्तल आगे कौन-सा रास्ता चुनती हैं।

सरकारी सेवा का अध्याय बंद हो चुका है, लेकिन दिव्या मित्तल की कहानी शायद अभी खत्म नहीं हुई—संभव है, असली नई पारी अब शुरू हो रही हो।—

बी. के. झा , NSK दिल्ली

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