बांका में JDU सांसद के घर देर रात पुलिस की छापेमारी, बिना वारंट कार्रवाई का आरोप; सांसद बोले- लोकतंत्र की हत्या

बी के झा

NSK news Ind

बांका, 24‌ अगस्त

बिहार के बांका जिले में पुलिस की एक कार्रवाई ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव के पैतृक आवास समेत तीन ठिकानों पर देर रात पुलिस की छापेमारी को लेकर सांसद और बांका पुलिस प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। सांसद ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उनके घर पर बिना सर्च वारंट के दबिश दी गई। उन्होंने इस कार्रवाई को अपने सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सांसद गिरिधारी यादव का आरोप है कि बांका के एसपी अमितेश कुमार के निर्देश पर पुलिस टीम ने देर रात उनके पैतृक आवास समेत तीन स्थानों पर छापेमारी की। उनका कहना है कि जब पुलिस टीम से कार्रवाई के लिए सर्च वारंट दिखाने को कहा गया तो अधिकारियों ने कथित तौर पर स्पष्ट कर दिया कि उनके पास कोई वारंट नहीं है और कार्रवाई एसपी के निर्देश पर की जा रही है।’

40 साल के राजनीतिक जीवन में कोई आपराधिक मामला नहीं

‘पुलिस कार्रवाई से नाराज सांसद ने कहा कि उनके करीब चार दशक लंबे राजनीतिक जीवन में न तो उन पर और न ही उनके परिवार पर कभी कोई आपराधिक मामला दर्ज रहा है। ऐसे में देर रात उनके आवास पर पुलिस का पहुंचना उन्हें बेहद आपत्तिजनक लगा।सांसद का कहना है कि जिस समय पुलिस टीम उनके घर पहुंची, उस वक्त घर में पुरुष सदस्य मौजूद नहीं थे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या परिस्थिति थी कि पुलिस को देर रात उनके घर पर दबिश देनी पड़ी और वह भी कथित तौर पर बिना सर्च वारंट के?

गिरिधारी यादव ने इस कार्रवाई को अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताते हुए कहा कि पुलिस को कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने मामले में बांका एसपी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

एसपी पर फोन नहीं उठाने का भी आरोप

सांसद ने आरोप लगाया कि उन्होंने मामले को लेकर बांका एसपी अमितेश कुमार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। सांसद के मुताबिक, उन्होंने एसपी से मुलाकात कर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण लेने की भी कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।इसके बाद सांसद ने भागलपुर के आईजी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि पुलिस ने किस आधार पर कार्रवाई की, किन परिस्थितियों में छापेमारी की गई और क्या इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था।

पुलिस का जवाब- सांसद को निशाना बनाकर नहीं हुई कार्रवाई

वहीं, बांका के पुलिस अधीक्षक अमितेश कुमार ने सांसद के आरोपों पर अपनी सफाई दी है। एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्रवाई सांसद गिरिधारी यादव को निशाना बनाकर नहीं की गई थी।पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई एक अवैध मिट्टी खनन मामले में नामजद आरोपी की तलाश के सिलसिले में की गई थी। पुलिस का कहना है कि जिस व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही थी, उसका संबंध सांसद के परिवार से है।

ओढ़नी डैम के पास अवैध मिट्टी खनन का मामला

पूरा विवाद ओढ़नी डैम के समीप बीएसएपी की 10वीं वाहिनी के प्रस्तावित मुख्यालय के लिए चिन्हित जमीन से कथित अवैध रूप से मिट्टी खनन के मामले से जुड़ा है।पुलिस के मुताबिक, इस मामले की जांच के दौरान प्रिंस कंस्ट्रक्शन से जुड़े ओंकार यादव और लालधारी यादव समेत कुछ अन्य स्थानीय लोगों के नाम सामने आए। पुलिस इसी मामले में नामजद आरोपी लालधारी यादव की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी।यहीं से मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया, क्योंकि लालधारी यादव जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव के छोटे भाई हैं।

पुलिस का तर्क है कि कार्रवाई का उद्देश्य किसी सांसद या राजनीतिक व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि एक नामजद आरोपी की गिरफ्तारी करना था। दूसरी ओर सांसद का सवाल है कि यदि कार्रवाई किसी आरोपी की गिरफ्तारी के लिए थी, तो उनके आवास पर देर रात दबिश देने की जरूरत क्यों पड़ी और क्या पुलिस ने सभी निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया?

एक छापेमारी ने खड़े कर दिए कई सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने बांका में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ पुलिस का दावा है कि वह अवैध खनन के मामले में नामजद आरोपी की तलाश में कार्रवाई कर रही थी, वहीं सांसद इसे अपनी प्रतिष्ठा और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं और जांच में पुलिस की कार्रवाई की वैधानिकता को लेकर क्या तस्वीर सामने आती है। यदि सांसद के आरोप सही पाए जाते हैं तो पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। वहीं यदि पुलिस की कार्रवाई नियमों के अनुरूप साबित होती है तो सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों की भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा जरूरी होगी।

फिलहाल, बांका की यह छापेमारी सिर्फ एक आरोपी की तलाश तक सीमित नहीं रह गई है। यह मामला पुलिस की कार्रवाई, कानूनी प्रक्रिया और सत्ता पक्ष के एक सांसद के अधिकारों के बीच टकराव का मुद्दा बन चुका है। अब देखना होगा कि जांच इस विवाद को किस निष्कर्ष तक पहुंचाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *