रैलियों से रील तक पहुंची BJP की चुनावी रणनीति, अब CM योगी शेयर करेंगे कार्यकर्ताओं के वीडियो; 25 हजार ‘सक्सेस स्टोरी’ होंगी शॉर्टलिस्ट

बी के झा

NSK news Ind

लखनऊ, 3 सितंबर

उत्तर प्रदेश की सियासत अब सिर्फ मंच, माइक और पोस्टर तक सीमित नहीं रहने वाली। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी संचार रणनीति को सोशल मीडिया की नई भाषा के मुताबिक ढालने की तैयारी कर ली है। पार्टी अब सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को भाषणों के बजाय 60 सेकंड की रील, लाभार्थियों की कहानी और स्थानीय वीडियो के जरिए खासकर Gen-Z तक पहुंचाने की तैयारी में है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रस्तावित ‘सेवा संकल्प अभियान’ को भाजपा केवल सेवा और जनसंपर्क कार्यक्रम के तौर पर नहीं, बल्कि चुनाव से पहले संगठन की ताकत परखने और डिजिटल नेटवर्क को सक्रिय करने के बड़े प्रयोग के रूप में देख रही है।

अभियान में 13 प्रमुख कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।सबसे बड़ा बदलाव यह है कि भाजपा ने पहली बार अभियान के कार्यक्रमों में रील और डिजिटल कंटेंट को संगठनात्मक जिम्मेदारी से जोड़ दिया है। प्रदेश के 27 हजार से अधिक शक्ति केंद्रों में प्रत्येक से कम से कम 10 रील तैयार कराने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों की वास्तविक कहानियां, स्थानीय विकास कार्य और सरकार की उपलब्धियां प्रमुख रूप से दिखाई जाएंगी।

पार्टी ऐसी करीब 25 हजार कहानियों को शॉर्टलिस्ट कर बड़े डिजिटल अभियान का हिस्सा बनाएगी।

लाभार्थी बनेगा ‘कंटेंट’, कार्यकर्ता बनेगा रिपोर्टर

भाजपा की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस बार पार्टी का संदेश केवल नेता नहीं देंगे। कार्यकर्ता खुद अपने क्षेत्र में जाएंगे, लाभार्थियों से बातचीत करेंगे और उनके अनुभव को कैमरे में रिकॉर्ड करेंगे।वीडियो में लाभार्थी का नाम, स्थान, जिला, संबंधित सरकारी योजना और उससे हुए बदलाव जैसी जानकारी शामिल करने की योजना है।

इसके बाद इन अनुभवों को अधिकतम 60 सेकंड के वीडियो में बदलकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया जाएगा।यानी पार्टी की कोशिश है कि ‘सरकार ने क्या किया’ के बजाय ‘सरकार से किसकी जिंदगी बदली’ को चुनावी संदेश बनाया जाए।

राजनीतिक संचार के लिहाज से यह रणनीति महत्वपूर्ण है। क्योंकि सोशल मीडिया पर लंबे भाषणों की तुलना में वास्तविक व्यक्ति की छोटी और भावनात्मक कहानी कहीं तेजी से लोगों का ध्यान खींचती है।

CM योगी की सोशल मीडिया पहुंच बनेगी बड़ा हथियार

भाजपा की योजना में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डिजिटल मौजूदगी को भी अहम भूमिका दी गई है। पार्टी के मुताबिक बेहतर प्रदर्शन करने वाली रीलों को मुख्यमंत्री अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी साझा कर सकते हैं।यही व्यवस्था कार्यकर्ताओं के लिए एक तरह का डिजिटल प्रोत्साहन भी बन सकती है। जिस स्थानीय कार्यकर्ता का बनाया वीडियो मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट से साझा होगा, वह अपने क्षेत्र में पार्टी के डिजिटल प्रचार का चेहरा भी बन जाएगा।

पार्टी ने मंत्रियों से भी प्रतिदिन कम से कम दो ऐसी कहानियां साझा करने की अपेक्षा की है, जबकि मुख्यमंत्री के साथ नियमित रूप से दो से पांच मिनट का संकलन साझा करने की योजना बताई गई है।

मोदी के 25 साल की कहानी,

2027 का चुनावी संदेश‘

सेवा संकल्प अभियान’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जुड़ा है। उत्तर प्रदेश में इसका उद्देश्य केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं, सुशासन, विकास और जनकल्याण के कामों को जनता तक पहुंचाना बताया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कार्यकर्ताओं से सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों और युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने पर जोर दिया है। पार्टी का फोकस उन स्थानीय कहानियों पर है, जिन्हें वह सरकार के कामकाज के प्रत्यक्ष प्रमाण के तौर पर पेश कर सके।इस रणनीति का एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी है—2027 की लड़ाई सिर्फ बूथ पर नहीं, मोबाइल स्क्रीन पर भी लड़ी जाएगी।

Gen-Z क्यों है BJP के निशाने पर?

जेन-Z राजनीति को पारंपरिक तरीके से नहीं देखती। यह पीढ़ी लंबे राजनीतिक भाषणों से ज्यादा छोटे वीडियो, विजुअल कंटेंट, मीम, इंस्टाग्राम रील और त्वरित डिजिटल संवाद से प्रभावित होती है।यही वजह है कि भाजपा अब युवाओं तक पहुंचने के लिए राजनीतिक प्रचार की भाषा बदल रही है।हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश सरकार और भाजपा दोनों की ओर से युवाओं के बीच शॉर्ट वीडियो के इस्तेमाल पर जोर बढ़ा है।

पर्यटन विभाग ने भी Gen-Z को जोड़ने के लिए 60 सेकंड की रील के जरिए प्रदेश की संस्कृति, विरासत और स्थानीय अनुभवों को प्रचारित करने की पहल की है।

राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से देखें तो भाजपा एक साथ दो मोर्चों पर काम कर रही है—एक तरफ पुराने संगठनात्मक ढांचे को बूथ और शक्ति केंद्र तक सक्रिय करना, दूसरी तरफ उसी संगठन को डिजिटल कंटेंट मशीन में बदलना।

विपक्ष के लिए नई चुनौती, लेकिन सवाल भी कम नहीं

भाजपा की इस डिजिटल रणनीति ने विपक्ष के सामने भी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे दलों को अब सिर्फ राजनीतिक सभाओं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए भाजपा के नैरेटिव का मुकाबला करना पर्याप्त नहीं होगा।

समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच सोशल मीडिया को लेकर मुकाबला पहले से तेज हो चुका है। हाल में अखिलेश यादव द्वारा AI-generated वीडियो साझा किए जाने और उस पर भाजपा की प्रतिक्रिया ने भी संकेत दिया है कि 2027 के चुनाव में डिजिटल प्लेटफॉर्म एक बड़ा राजनीतिक अखाड़ा बनने जा रहा है।

हालांकि विपक्ष के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि वह भाजपा की ‘सक्सेस स्टोरी’ के मुकाबले बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था, शिक्षा और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों को उसी डिजिटल भाषा में कैसे पेश करता है।

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में असली लड़ाई ‘कहानी’ की होगी

राजनीतिक संचार के जानकारों के अनुसार सोशल मीडिया पर चुनावी सफलता सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि किसके पास ज्यादा वीडियो हैं, बल्कि इस बात से होती है कि किसकी कहानी जनता को ज्यादा विश्वसनीय और अपनी लगती है।

भाजपा के सामने चुनौती यह भी होगी कि लाभार्थियों के वीडियो महज पार्टी प्रचार न दिखाई दें। यदि वीडियो में वास्तविक अनुभव, स्थानीय संदर्भ और प्रमाण नजर आते हैं तो उनका असर अधिक हो सकता है। लेकिन यदि हर वीडियो एक जैसा राजनीतिक विज्ञापन दिखाई देने लगा तो Gen-Z उसे आसानी से नजरअंदाज भी कर सकती है। यही वह बिंदु है जहां भाजपा की डिजिटल रणनीति की असली परीक्षा होगी।

समाजसेवी संगठनों के लिए भी खुला नया सवाल

समाजसेवी संस्थाओं और जमीनी संगठनों की भूमिका भी इस पूरे विमर्श में महत्वपूर्ण हो सकती है। सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक कितना पहुंचा, किस वर्ग को कितना फायदा मिला और किन लोगों तक योजनाएं नहीं पहुंच पाईं—इन सवालों का स्वतंत्र सामाजिक आकलन राजनीतिक दावों को परखने में मदद कर सकता है।

क्योंकि चुनावी रील में दिखाई देने वाली एक सफलता की कहानी पूरी तस्वीर नहीं होती। असली राजनीतिक प्रभाव तब बनेगा, जब हजारों ऐसी कहानियां जमीन पर भी सत्यापित हों।

मोदी की रील से योगी की डिजिटल टीम तक

युवाओं से डिजिटल माध्यमों पर जुड़ने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सोशल मीडिया और शॉर्ट वीडियो के इस्तेमाल पर जोर दे चुके हैं।

अब उत्तर प्रदेश में उसी रणनीति को संगठनात्मक स्तर तक ले जाने की कोशिश दिखाई दे रही है।

यानी भाजपा का नया फॉर्मूला साफ है—नेता भाषण देगा, कार्यकर्ता वीडियो बनाएगा, लाभार्थी अपनी कहानी बताएगा और संगठन उसे लाखों लोगों तक पहुंचाएगा।

यूपी की राजनीति में यह बदलाव महज तकनीकी नहीं है। यह उस राजनीतिक परिवर्तन का संकेत है जिसमें चुनावी प्रचार का केंद्र मैदान से निकलकर मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच चुका है।

अब सवाल यह नहीं कि कौन कितनी रैलियां करेगा, सवाल यह है कि किसकी रील जनता के मोबाइल पर रुकती है।

और 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव में संभव है कि बूथ के साथ-साथ ‘व्यूज’, ‘शेयर’ और ‘कमेंट’ भी राजनीतिक ताकत का नया पैमाना बन जाएं।

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