बी के झा
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अयोध्या, 3 सितंबर
राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन में हुए बड़े बदलाव के बाद अब सबसे अहम नियुक्ति भी सामने आ गई है। सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया गया है। 5585 आवेदनों में से उनका चयन महज औपचारिक प्रक्रिया का परिणाम नहीं माना जा रहा। चयन के अंतिम चरण में तीन नामों पर विचार हुआ, जिनमें एक अन्य सैन्य अधिकारी भी शामिल थे। ऐसे में सवाल स्वाभाविक है कि आखिर जितेंद्र मिश्रा में ऐसी क्या खासियत देखी गई, जिसके चलते उन्हें राम मंदिर जैसे अत्यंत संवेदनशील और विशाल धार्मिक संस्थान की कमान सौंपी गई?
संकट में निर्णय लेने का अनुभव बना सबसे बड़ा आधार
जितेंद्र मिश्रा का करीब चार दशक लंबा सैन्य करियर उनके चयन की सबसे बड़ी वजहों में माना जा रहा है। भारतीय वायुसेना में लगभग 39 वर्षों तक विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने वाले मिश्रा ने ऑपरेशनल प्लानिंग से लेकर युद्ध जैसी परिस्थितियों में निर्णय लेने तक का व्यापक अनुभव हासिल किया है।ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह दिल्ली स्थित पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ थे। यह वही कमान है, जिसके जिम्मे सियाचिन से लेकर दिल्ली तक देश के एक बेहद महत्वपूर्ण हवाई क्षेत्र की सुरक्षा है। ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की ओर से दिल्ली को निशाना बनाने की कोशिश में दागी गई एक मिसाइल को भारतीय वायुसेना ने सिरसा के आसमान में मार गिराया था।
यानी संकट की घड़ी में तेजी से आकलन करना, उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करना और बिना भ्रम के निर्णायक फैसला लेना—ये वे क्षमताएं हैं, जो अब राम मंदिर के प्रबंधन में भी बेहद उपयोगी साबित हो सकती हैं।
मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, हाई-सिक्योरिटी जोन भी
राम मंदिर आज करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर का संचालन केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, प्रशासनिक समन्वय, वीआईपी मूवमेंट, आपात स्थिति से निपटना और विशाल स्तर पर व्यवस्थाओं का संचालन—ये सभी बड़ी चुनौतियां हैं।ऐसे संस्थान में सैन्य पृष्ठभूमि वाले अधिकारी की प्रशासनिक सोच अहम हो सकती है।
जितेंद्र मिश्रा का अनुभव उन्हें जटिल परिस्थितियों में प्राथमिकताएं तय करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद कर सकता है।
फाइटर स्क्वाड्रन से पश्चिमी वायु कमान तक का सफर
जितेंद्र मिश्रा का सैन्य सफर बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से होकर गुजरा है। उन्होंने फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में काम किया। इसके अलावा वह चीफ टेस्ट पायलट रहे और दो फ्रंटलाइन एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग की जिम्मेदारी भी संभाली।वायु मुख्यालय में उन्होंने डायरेक्टर ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप तथा सहायक वायु सेनाध्यक्ष (प्रोजेक्ट्स) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
पश्चिमी वायु कमान की कमान संभालने से पहले वह उप एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख (ऑपरेशंस) भी रहे।इन जिम्मेदारियों ने उन्हें केवल सैन्य संचालन ही नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर रणनीतिक योजना, प्रशासन और संस्थागत प्रबंधन का अनुभव भी दिया।
1986 में शुरू हुआ था फाइटर पायलट का सफर
जितेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन मिला था। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने 3000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव हासिल किया।उनकी पेशेवर ट्रेनिंग भी देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में हुई। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से प्रशिक्षण लिया।
1 जनवरी 2025 को संभाली थी पश्चिमी वायु कमान की कमान
जितेंद्र मिश्रा ने 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ का पद संभाला था। उन्होंने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा का स्थान लिया था।अब सैन्य सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें एक बिल्कुल अलग लेकिन उतनी ही चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी मिली है।
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के रूप में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—आस्था के इस विराट केंद्र को आधुनिक, पारदर्शी, सुरक्षित और पेशेवर प्रबंधन व्यवस्था के साथ आगे बढ़ाना।
5585 आवेदनों से एक नाम तक पहुंचने की कहानी
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए आए 5585 आवेदनों ने चयन प्रक्रिया को बेहद व्यापक बना दिया था। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के बीच अंतिम तीन नामों तक पहुंचना और फिर जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगना बताता है कि ट्रस्ट को केवल एक प्रशासक नहीं, बल्कि संकट प्रबंधन, रणनीतिक सोच, सुरक्षा और बड़े संस्थान को संचालित करने का अनुभव रखने वाला नेतृत्व चाहिए था।
जितेंद्र मिश्रा के सामने अब युद्ध का मैदान नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी एक विशाल व्यवस्था है।
फर्क सिर्फ इतना है कि यहां सफलता का पैमाना दुश्मन को मात देना नहीं, बल्कि हर दिन लाखों श्रद्धालुओं के विश्वास, सुरक्षा और सुविधा को कायम रखना होगा।
