बी के झा
NSK news Ind

पटना/समस्तीपुर, 16 सितंबर
बिहार में कानून-व्यवस्था और सत्ता के गलियारों से जुड़ा एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता और सिने कारोबारी अंट्टू ईस्सर को STF, DIU और नगर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने मंगलवार शाम गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, हाजीपुर कोर्ट से उनके खिलाफ भानु कुमार हत्याकांड में गिरफ्तारी वारंट जारी था।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को उनके आवास पर कमरे का ताला तक तोड़ना पड़ा। इसके बाद मामला केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस कार्रवाई को लेकर चिराग पासवान, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दिल्ली की केंद्र सरकार पर गंभीर राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।खास तौर पर बिहार के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के अचानक छुट्टी पर जाने और उनमें DGP की लंबी छुट्टी को लेकर तेजस्वी ने ऐसा सवाल उठाया है, जिसने पूरे घटनाक्रम को नया राजनीतिक रंग दे दिया है।
पुलिस ने घर घेरा, कमरे में बंद हो गए अंट्टू
पुलिस के मुताबिक, अंट्टू ईस्सर की गिरफ्तारी के लिए कई दिनों से कार्रवाई चल रही थी। मंगलवार को गुप्त सूचना के आधार पर STF, DIU और नगर थाना पुलिस की टीम ने समस्तीपुर के बहादुरपुर स्थित उनके आवास पर छापेमारी की।पुलिस टीम ने मकान को चारों तरफ से घेर लिया। इसी दौरान अंट्टू ईस्सर कथित तौर पर खुद को एक कमरे में बंद कर लिया।दरवाजा खोलने के लिए पुलिस ने प्रयास किया, लेकिन जब दरवाजा नहीं खुला तो मौके पर मजिस्ट्रेट के रूप में मौजूद समस्तीपुर के सीओ आदित्य शंकर की मौजूदगी में कमरे का ताला तोड़ा गया। इसके बाद पुलिस उन्हें बाहर निकालकर नगर थाने ले गई।
रात करीब 8:40 बजे उन्हें नगर थाने लाया गया। कार्रवाई के दौरान हथियार बरामदगी से जुड़े पहलुओं की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है।
भानु कुमार की मौत से जुड़ा है मामलाअंट्टू ईस्सर की गिरफ्तारी का मामला
19 फरवरी को गांधी सेतु के पास मिले भानु कुमार के शव से जुड़ा है।हाजीपुर के गंगाब्रिज थाना क्षेत्र में गांधी सेतु के पिलर नंबर एक के पास खड़ी एक ऑल्टो कार से जहानाबाद के हुलासगंज निवासी भानु कुमार का शव बरामद हुआ था।पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान भानु कुमार का संबंध अंट्टू ईस्सर के समस्तीपुर स्थित आवास के बाहर हुई फायरिंग की घटना से सामने आया। पुलिस ने जांच में यह दावा किया कि भानु की मौत अंट्टू ईस्सर की गोली से हुई।इसी आधार पर हाजीपुर कोर्ट से अंट्टू ईस्सर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात पुलिस ने कही है।
हालांकि, पुलिस का आरोप या FIR किसी व्यक्ति को दोषी सिद्ध नहीं करता। अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
17 मार्च की फायरिंग ने जोड़ी एक और कड़ी
मामले में 17 मार्च की घटना भी अहम है। पुलिस के मुताबिक, कार और बाइक पर सवार लोगों ने अंट्टू ईस्सर के घर के बाहर फायरिंग की थी। इस घटना में उनके साथी शुभम सिंह उर्फ ईशू के घायल होने की बात कही गई थी।अब पुलिस फायरिंग, भानु कुमार की मौत और हाजीपुर के हत्या मामले के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है।यानी जांच एजेंसियों के सामने अब घटनाओं की पूरी कड़ी जोड़ने की चुनौती है।
तेजस्वी का हमला—‘चिराग के पाले हुए गुंडों पर शिकंजा’
अंट्टू ईस्सर की गिरफ्तारी के बाद आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने LJP(R) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान पर सीधा हमला बोला।तेजस्वी ने आरोप लगाया कि आखिरकार बिहार पुलिस ने “केंद्रीय मंत्री और LJP(R) के मुखिया चिराग पासवान के पाले हुए गुंडों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।”तेजस्वी का यह बयान एक राजनीतिक आरोप है। इस आरोप के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने आया है या नहीं, यह अलग जांच का विषय है।
चिराग पासवान और LJP(R) की ओर से इस आरोप पर प्रतिक्रिया भी इस राजनीतिक विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
तीन बड़े अधिकारियों की छुट्टी पर तेजस्वी का बड़ा सवाल
तेजस्वी यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को बिहार के प्रशासनिक स्तर पर हुए हालिया घटनाक्रम से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि बिहार के तीन प्रमुख वरिष्ठ अधिकारी अचानक छुट्टी पर चले गए, जिनमें बिहार के DGP का कथित तौर पर 21 दिनों की छुट्टी पर जाना भी शामिल है।यहीं से तेजस्वी ने सवाल खड़ा किया कि—“कहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दिल्ली में बैठे केंद्रीय गृह मंत्री के दबाव के कारण तो ये अधिकारी छुट्टी पर नहीं चले गए?
”तेजस्वी का संकेत यह था कि अंट्टू ईस्सर की गिरफ्तारी और बिहार के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के अचानक छुट्टी पर जाने की घटनाओं को एक साथ देखने की जरूरत है।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सत्ता के स्तर पर किसी तरह का दबाव था, जिसके चलते तीन वरिष्ठ अधिकारी अचानक छुट्टी पर चले गए?
हालांकि, इन अधिकारियों के छुट्टी पर जाने और किसी राजनीतिक दबाव के बीच प्रत्यक्ष संबंध की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह फिलहाल तेजस्वी यादव द्वारा उठाया गया राजनीतिक सवाल है, स्थापित तथ्य नहीं।
लेकिन इस सवाल ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद जरूर खड़ा कर दिया है।‘आज नहीं तो कल सच्चाई सामने आएगी’तेजस्वी यादव ने दावा किया कि अंट्टू ईस्सर की गिरफ्तारी से जुड़े घटनाक्रम और प्रशासनिक स्तर पर हो रही गतिविधियों की सच्चाई आखिरकार बिहार की जनता के सामने आएगी।
उनका कहना है कि आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि आखिर किन परिस्थितियों में कार्रवाई हुई और प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों के अचानक छुट्टी पर जाने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
क्या सिर्फ संयोग है या कोई बड़ी कहानी?
यहीं इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प राजनीतिक पहलू सामने आता है।एक तरफ एक राजनीतिक दल से जुड़े नेता की हत्या के मामले में गिरफ्तारी होती है। दूसरी तरफ उसी समय विपक्ष सत्ता और दिल्ली के दबाव का आरोप लगाता है। इसके साथ ही शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की छुट्टी को लेकर सवाल खड़े किए जाते हैं।लेकिन फिलहाल इन घटनाओं को जोड़ने वाली कोई सार्वजनिक रूप से स्थापित कड़ी सामने नहीं है।इसलिए असली सवाल यही है—क्या अंट्टू ईस्सर की गिरफ्तारी सिर्फ अदालत के वारंट पर हुई सामान्य पुलिस कार्रवाई है?
या फिर इसके पीछे घटनाओं की कोई ऐसी कड़ी है, जिसकी पूरी तस्वीर अभी सामने आना बाकी है?
और तेजस्वी यादव द्वारा उठाया गया दूसरा सवाल इससे भी ज्यादा राजनीतिक है—क्या बिहार के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के अचानक छुट्टी पर जाने के पीछे केवल प्रशासनिक कारण हैं, या वास्तव में किसी राजनीतिक दबाव की भूमिका रही है?
इन सवालों का जवाब फिलहाल आरोपों और दावों के बीच उलझा हुआ है।
NSK विश्लेषण:
ताला कमरे का टूटा है, लेकिन सवाल सत्ता के गलियारों तक पहुंच गए
अंट्टू ईस्सर की गिरफ्तारी अपने आप में गंभीर कानूनी घटनाक्रम है। लेकिन जिस तरह गिरफ्तारी के बाद तेजस्वी यादव ने इसे चिराग पासवान से लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व तक से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, उससे यह मामला अब राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है।
एक तरफ पुलिस कह रही है कि कोर्ट का वारंट था और उसी के आधार पर गिरफ्तारी हुई। दूसरी तरफ विपक्ष पूछ रहा है कि इसी घटनाक्रम के दौरान बिहार के तीन वरिष्ठ अधिकारी अचानक छुट्टी पर क्यों चले गए?
सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के DGP की कथित 21 दिनों की छुट्टी को लेकर है।क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है?
क्या किसी अधिकारी पर राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव था?
क्या अंट्टू ईस्सर प्रकरण में आगे और गिरफ्तारियां होंगी?
क्या 17 मार्च की फायरिंग और भानु कुमार की मौत की पूरी कड़ी पुलिस जोड़ पाएगी?
और क्या तेजस्वी यादव के लगाए गए राजनीतिक आरोपों के समर्थन में कोई तथ्य सामने आता है?
फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के पास हैं।अंट्टू ईस्सर के कमरे का ताला पुलिस ने तोड़ दिया है, लेकिन इस मामले की असली कहानी अभी पुलिस की जांच, अदालत की कार्रवाई और सामने आने वाले सबूतों के बीच खुलनी बाकी है।
बिहार की सियासत में अब सवाल सिर्फ एक गिरफ्तारी का नहीं है—सवाल यह भी है कि इस गिरफ्तारी के पीछे कानून की कार्रवाई कितनी है और राजनीति का शोर कितना।
