दिशा सालियान केस में आदित्य ठाकरे के नाम पर फिर गरमाई सियासत, संजय राउत बोले- ‘ठाकरे परिवार को बदनाम करने की साजिश; BJP ने पूछा- उद्धव सरकार के समय जांच क्यों नहीं बढ़ी?

बी के झा

NSK news Ind

मुंबई, 16 सितंबर

करीब छह साल से रहस्य और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उलझा दिशा सालियान मौत मामला अब एक बार फिर महाराष्ट्र की सियासत के केंद्र में आ गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने मामले में FIR दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली है।

FIR में कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में होने की बात सामने आई है, जिनमें शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे का नाम भी शामिल बताया गया है। हालांकि, नाम का FIR में उल्लेख अपने आप में आरोपी या दोषी होने का प्रमाण नहीं है।

CBI की कार्रवाई के बाद शिवसेना (UBT) ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। पार्टी सांसद संजय राउत ने सीधे केंद्र और महाराष्ट्र की सत्ता पर निशाना साधते हुए दावा किया कि दिशा सालियान मामले का इस्तेमाल ठाकरे परिवार की छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है।

दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया है कि यदि मामले में गंभीर आरोप थे तो तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार के कार्यकाल में इसकी जांच आगे क्यों नहीं बढ़ाई गई।यानी दिशा सालियान केस अब एक बार फिर जांच बनाम राजनीति के दोहरे सवाल के बीच खड़ा है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI की एंट्री

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को मुंबई पुलिस की लंबे समय से चली आ रही जांच पर सवाल उठाते हुए CBI को मामले की जांच सौंपने का निर्देश दिया था। अदालत के निर्देश के बाद CBI ने FIR दर्ज की और मामले की नए सिरे से जांच शुरू की।रिपोर्टों के मुताबिक FIR में हत्या, सामूहिक दुष्कर्म और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित धाराओं में जांच की जा रही है। CBI ने इस मामले के लिए विशेष टीम भी गठित की है।मामले में दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान भी जांच का महत्वपूर्ण आधार बना है।

अब CBI उन लोगों के बयान दर्ज कर रही है जो घटना से पहले की परिस्थितियों और उस रात हुई घटनाओं से जुड़े बताए जाते हैं।

आदित्य ठाकरे का नाम और महाराष्ट्र में सियासी विस्फोट

CBI की FIR में आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों की भूमिका जांच के लिए दर्ज होने की खबर सामने आते ही महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई। रिपोर्टों के मुताबिक दस्तावेज में

रिया चक्रवर्ती,

शोविक चक्रवर्ती,

दिनो मोरिया,

सूरज पंचोली,

रोहन रॉय और कुछ पूर्व पुलिस अधिकारियों समेत कई अन्य लोगों का भी उल्लेख है।यहीं से राजनीतिक विवाद ने नया मोड़ लिया।

शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने CBI की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे ठाकरे परिवार को बदनाम करने की राजनीतिक साजिश बताया।राउत का दावा है कि मुंबई पुलिस की जांच में आदित्य ठाकरे का इस मामले से कोई संबंध नहीं पाया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अदालत ने CBI जांच का निर्देश देते हुए किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर पेश नहीं करने की बात कही थी, इसके बावजूद नामों को लेकर राजनीतिक और मीडिया बहस शुरू हो गई।

राउत का अमित शाह और एकनाथ शिंदे पर बड़ा आरोप

संजय राउत ने इस पूरे घटनाक्रम को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मुलाकात से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाया है।राउत के मुताबिक, अमित शाह के महाराष्ट्र दौरे के दौरान उनकी एकनाथ शिंदे से मुलाकात हुई और दोनों कुछ समय तक एक ही कार में रहे। राउत का दावा है कि इसके बाद CBI की FIR में कई नाम सामने आए।राउत ने इसे “दिल्ली की राजनीतिक साजिश” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य ठाकरे परिवार की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाना है।

ये राउत के राजनीतिक आरोप हैं; उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यानी शिवसेना (UBT) की रणनीति साफ दिखाई देती है—मामले की जांच को सीधे केंद्र बनाम ठाकरे परिवार की राजनीतिक लड़ाई से जोड़ना।

BJP का पलटवार—‘उद्धव सरकार के समय जांच क्यों नहीं हुई?

’दूसरी ओर भाजपा विधायक राम कदम ने तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जब दिशा सालियान के परिवार की ओर से गंभीर आशंकाएं जताई जा रही थीं, तब तत्कालीन सरकार ने मामले को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया।राम कदम ने यह भी सवाल उठाया कि यदि परिवार की ओर से हत्या जैसी आशंकाएं व्यक्त की गई थीं तो उस समय FIR दर्ज कर जांच आगे क्यों नहीं बढ़ाई गई।भाजपा नेता ने पुराने दावों और कथित स्टिंग से जुड़े सवाल भी उठाए और कहा कि यदि किसी को बचाने की कोशिश नहीं थी तो मामले की स्वतंत्र जांच से परहेज क्यों किया गया।

हालांकि, इन आरोपों और पुराने दावों की वास्तविकता का निर्धारण अब CBI की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही हो सकेगा।

संजय राउत बनाम BJP: जांच के साथ शुरू हुआ राजनीतिक मुकदमा

दिशा सालियान मामले की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि CBI ने जांच शुरू की है, लेकिन उसके साथ ही राजनीतिक आरोपों का सिलसिला भी तेज हो गया है।

शिवसेना (UBT) का सवाल है—क्या जांच एजेंसी की कार्रवाई का इस्तेमाल ठाकरे परिवार को राजनीतिक रूप से घेरने के लिए किया जा रहा है?

वहीं भाजपा का सवाल है—अगर मामले में गंभीर संदेह थे तो उद्धव ठाकरे सरकार के समय जांच निर्णायक दिशा में क्यों नहीं बढ़ी?

दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक सवाल उठा रहे हैं। लेकिन इन सवालों का अंतिम जवाब राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि CBI की जांच, सबूत और अदालत की प्रक्रिया से सामने आएगा।

JDU ने कहा—जांच से सामने आएगा सच

इस राजनीतिक घमासान के बीच जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने CBI जांच का स्वागत किया है। उनका कहना है कि मामले में लंबे समय से कई नामों और प्रभावशाली लोगों को लेकर चर्चा होती रही है और दिशा सालियान के पिता भी जांच की मांग करते रहे हैं।जेडीयू का कहना है कि अब जब केंद्रीय एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है तो उम्मीद की जानी चाहिए कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।

दिशा सालियान से सुशांत सिंह राजपूत तक—पुराने सवाल फिर जिंदा

दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई में हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। उनकी मौत के कुछ दिन बाद सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हुई, जिसके कारण दोनों घटनाओं को लेकर लंबे समय से सार्वजनिक बहस होती रही है।हालांकि दोनों मामलों के बीच किसी आपराधिक संबंध को तथ्य के रूप में स्थापित करना जांच का विषय है। CBI अब दिशा सालियान की मौत की परिस्थितियों, उस रात मौजूद लोगों, कथित घटनाक्रम और जांच में सामने आए आरोपों की पड़ताल करेगी।

NSK विश्लेषण:

अब सवाल आरोपों का नहीं, सबूतों का है

दिशा सालियान मामले ने छह साल बाद फिर महाराष्ट्र की राजनीति को दो हिस्सों में बांट दिया है।एक तरफ संजय राउत हैं, जो इसे ठाकरे परिवार को बदनाम करने की राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।

दूसरी तरफ भाजपा नेता पुराने शासनकाल की जांच और कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।

केंद्र की एजेंसी CBI अब मामले की जांच कर रही है।लेकिन इस बार राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा महत्वपूर्ण होगा सबूतों का सामने आना।

क्या दिशा सालियान की मौत के पीछे वास्तव में कोई आपराधिक साजिश थी?

क्या शुरुआती जांच में कोई गंभीर चूक हुई?

क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश हुई?

क्या FIR में जिन लोगों की भूमिका जांच के लिए दर्ज की गई है, उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य सामने आते हैं?

और सबसे महत्वपूर्ण—क्या छह साल पुराने इस मामले में CBI उन सवालों का जवाब तलाश पाएगी, जिनका इंतजार दिशा के परिवार को लंबे समय से है?

फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के गर्भ में हैं।एक बात जरूर साफ है—दिशा सालियान केस अब केवल एक पुरानी मौत की जांच नहीं रहा।

यह महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता, विपक्ष, ठाकरे परिवार और केंद्रीय जांच एजेंसी के बीच टकराव का नया केंद्र बन चुका है।

अब फैसला राजनीतिक मंच पर नहीं, जांच की फाइल और अदालत के सामने रखे जाने वाले सबूतों से होगा।

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