लॉजिस्टिक्स से लेकर MSME तक मोदी सरकार का बड़ा दांव, ITLA को मंजूरी; छोटे उद्योगों के लिए ₹10,000 करोड़ का ग्रोथ फंड

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर

देश की अर्थव्यवस्था जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उसी के अनुरूप बुनियादी ढांचे और कारोबार की क्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को दो बड़े फैसले लिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी (ITLA) के गठन को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों यानी MSME सेक्टर के लिए ₹10,000 करोड़ के ग्रोथ फंड की स्थापना का फैसला हुआ।केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि भारत की GDP करीब 7 से 8 फीसदी की दर से बढ़ रही है, जबकि लॉजिस्टिक्स की मांग लगभग 10 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है।

ऐसे में परिवहन और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अलग-अलग परियोजनाओं के बजाय एकीकृत दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।

ITLA बनेगी देश की इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स प्लानिंग की शीर्ष संस्था

सरकार का ताजा फैसला केवल एक नई अथॉरिटी बनाने तक सीमित नहीं है। ITLA को देश की भविष्य की परिवहन और लॉजिस्टिक्स जरूरतों की योजना तैयार करने वाली शीर्ष संस्था के रूप में विकसित किया जाएगा।यह प्राधिकरण इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स प्लानिंग, रिसर्च, प्रोजेक्ट अप्रेजल, मॉनिटरिंग, पॉलिसी सपोर्ट और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करेगा।

यानी सड़क अलग, रेलवे अलग, एयरपोर्ट अलग और बंदरगाह अलग तरीके से विकसित करने के बजाय आने वाले दशकों की जरूरत को एक ही फ्रेमवर्क में रखकर योजना बनाई जाएगी।

10 नहीं, 30 साल आगे देखकर बनेगा इंफ्रास्ट्रक्चर का रोडमैप

ITLA की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका देश की दीर्घकालिक परिवहन जरूरतों का आकलन करना होगी। सरकार के मुताबिक यह संस्था 10 से 30 साल आगे की जरूरतों को ध्यान में रखकर अध्ययन करेगी।मसलन, भविष्य में देश को कितने नए रेलवे नेटवर्क की जरूरत होगी, कहां नए हाईवे चाहिए होंगे, किन क्षेत्रों में एयरपोर्ट और सी-पोर्ट की आवश्यकता होगी और इनलैंड वाटरवे तथा शहरी परिवहन का विस्तार किस दिशा में होना चाहिए—इन सवालों का वैज्ञानिक और डेटा आधारित आकलन किया जाएगा।यह व्यवस्था पीएम गतिशक्ति के जरिए शुरू किए गए इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग मॉडल को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।

सड़क से बंदरगाह तक एक नेटवर्क, अलग-अलग परियोजनाएं नहीं

ITLA के तहत सड़क, रेल, बंदरगाह, नागरिक उड्डयन, तटीय शिपिंग और शहरी गतिशीलता जैसे परिवहन माध्यमों को एक-दूसरे से जोड़कर देखने पर जोर होगा।इसका सीधा असर माल ढुलाई की लागत, परिवहन समय और लॉजिस्टिक्स की दक्षता पर पड़ सकता है। भारत जैसे विशाल देश में जहां एक राज्य से दूसरे राज्य तक माल पहुंचाने के लिए कई परिवहन माध्यमों का इस्तेमाल होता है, वहां बेहतर तालमेल कारोबार की लागत घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।सरकार का व्यापक लक्ष्य यही है कि भारत की बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के साथ उसका लॉजिस्टिक्स नेटवर्क भी उसी अनुपात में मजबूत हो।

MSME के लिए ₹10,000 करोड़ का ग्रोथ फंड

कैबिनेट का दूसरा बड़ा फैसला देश के छोटे और मध्यम कारोबारों से जुड़ा है। सरकार ने MSME सेक्टर के लिए ₹10,000 करोड़ का विशेष ग्रोथ फंड बनाने को मंजूरी दी है।इस फंड का उद्देश्य ऐसे छोटे और मध्यम उद्योगों को ग्रोथ कैपिटल उपलब्ध कराना है, जिन्हें अपने कारोबार का विस्तार करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए पूंजी की जरूरत होती है।MSME सेक्टर को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में इस फंड का असली महत्व केवल ₹10,000 करोड़ की राशि में नहीं, बल्कि इस बात में है कि छोटे कारोबारों को स्केल-अप करने का अवसर कितना मिलता है।

अगर पूंजी का इस्तेमाल उत्पादन क्षमता, तकनीकी उन्नयन, निर्यात और रोजगार बढ़ाने वाले क्षेत्रों में प्रभावी तरीके से होता है, तो इसका असर व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

कैबिनेट में मोदी के 25 साल के संवैधानिक सफर का भी उल्लेख

कैबिनेट बैठक की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के उल्लेख के साथ हुई। मंत्रिमंडल ने संवैधानिक पद पर गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक 25 वर्ष पूरे करने के अवसर पर प्रधानमंत्री को बधाई प्रस्ताव पारित किया। 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद उन्होंने करीब 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और मई 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने।इस तरह एक निर्वाचित सरकार के प्रमुख के रूप में उनका लगातार संवैधानिक पद पर बने रहने का सफर 25 वर्ष पूरे कर रहा है।

एक फैसला भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर का, दूसरा छोटे कारोबार की ताकत काकैबिनेट के दोनों बड़े फैसलों को एक साथ देखें तो सरकार की आर्थिक रणनीति की दो अलग लेकिन जुड़ी हुई तस्वीरें सामने आती हैं। ITLA जहां देश के अगले 10 से 30 वर्षों के परिवहन और लॉजिस्टिक्स ढांचे को वैज्ञानिक तरीके से तैयार करने की कोशिश है, वहीं ₹10,000 करोड़ का MSME ग्रोथ फंड छोटे कारोबारों को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने की दिशा में वित्तीय आधार मजबूत करने का प्रयास है।

एक तरफ देश के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की लंबी छलांग की तैयारी है, तो दूसरी तरफ उस इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करने वाले लाखों छोटे उद्योगों को पूंजी और विस्तार की ताकत देने की कोशिश।

यानी मंगलवार की कैबिनेट बैठक के फैसलों को केवल प्रशासनिक निर्णय मानना तस्वीर को छोटा करके देखना होगा।

इनके पीछे भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को बेहतर लॉजिस्टिक्स, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और ज्यादा प्रतिस्पर्धी MSME सेक्टर के सहारे अगले चरण में ले जाने की बड़ी रणनीति दिखाई देती है।

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