बी के झा
नई दिल्ली, 1 अगस्त
देशभर में एलपीजी गैस उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित e-KYC (इलेक्ट्रॉनिक नॉ-योर-कस्टमर) प्रक्रिया तेजी से लागू की जा रही है। सरकार का उद्देश्य फर्जी गैस कनेक्शनों पर रोक लगाना, सब्सिडी केवल पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाना और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोकना बताया जा रहा है। हालांकि इस प्रक्रिया के बीच लाखों उपभोक्ताओं, विशेषकर बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को तकनीकी और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।रिपोर्टों के अनुसार अनेक उपभोक्ताओं को e-KYC पूरा नहीं होने की स्थिति में गैस कनेक्शन और सब्सिडी को लेकर चिंता सताने लगी है। हालांकि संबंधित गैस कंपनियों या सरकार की ओर से किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन स्वतः समाप्त किए जाने की पुष्टि आधिकारिक रूप से नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को अफवाहों पर नहीं, बल्कि अपनी गैस कंपनी की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना चाहिए और समय रहते e-KYC की प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए।
क्यों जरूरी है e-KYC?
सरकार का कहना है कि वर्षों से फर्जी या डुप्लीकेट गैस कनेक्शनों के कारण सब्सिडी व्यवस्था प्रभावित होती रही है। आधार आधारित सत्यापन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी सहायता केवल वास्तविक और पात्र उपभोक्ताओं तक पहुंचे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार होगा।
सबसे अधिक परेशानी किन लोगों को?
जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। बुजुर्ग, दिव्यांग, दूरदराज़ गांवों में रहने वाले उपभोक्ता तथा तकनीकी जानकारी से दूर लोग इस प्रक्रिया को पूरा करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। कई स्थानों पर इंटरनेट की कमजोर उपलब्धता, ओटीपी न मिलना, सर्वर की धीमी गति, फिंगरप्रिंट या फेस ऑथेंटिकेशन में दिक्कत और गैस एजेंसियों में सीमित कर्मचारियों की वजह से प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।कई उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस वितरण करने वाले कर्मचारियों के पास भी कई बार पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण नहीं होता, जिससे मौके पर e-KYC पूरा नहीं हो पाता।
अपने मोबाइल से ऐसे करें e-KYC
यदि आपके पास स्मार्टफोन है, तो आप स्वयं भी e-KYC कर सकते हैं—सबसे पहले अपनी गैस कंपनी (इंडेन, भारत गैस या एचपी गैस) का आधिकारिक मोबाइल ऐप डाउनलोड करें।साथ ही Aadhaar FaceRD ऐप भी इंस्टॉल करें।अपने गैस कनेक्शन से जुड़े मोबाइल नंबर से लॉग-इन करें।प्रोफाइल में जाकर e-KYC या Aadhaar Authentication विकल्प चुनें।FaceRD ऐप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करें।स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।सत्यापन पूरा होने पर e-KYC सफल हो जाएगा।यदि मोबाइल से प्रक्रिया पूरी न हो सके तो गैस एजेंसी या गैस डिलीवरी कर्मी के बायोमेट्रिक उपकरण की सहायता से भी e-KYC कराया जा सकता है।
आम जनता की प्रतिक्रिया
कई उपभोक्ताओं ने सरकार की मंशा का समर्थन करते हुए कहा कि फर्जी कनेक्शनों पर रोक लगनी चाहिए, लेकिन प्रक्रिया इतनी सरल हो कि तकनीकी जानकारी न रखने वाले लोग भी आसानी से इसे पूरा कर सकें। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि सरकार डिजिटल प्रक्रिया लागू कर रही है तो गांव-गांव जागरूकता अभियान और मोबाइल सहायता शिविर भी चलाए जाने चाहिए।
विपक्ष का आरोप
विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि डिजिटलीकरण का स्वागत है, लेकिन पर्याप्त तैयारी के बिना लागू की गई व्यवस्था आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार को पहले डिजिटल ढांचा, इंटरनेट सुविधा और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए थे, ताकि उपभोक्ताओं को एजेंसियों के चक्कर न लगाने पड़ें।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और आधार आधारित सत्यापन सरकार की प्रमुख प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि तकनीकी ढांचे को मजबूत किया जाए तो इससे सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन यदि जमीनी स्तर की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो यही प्रक्रिया असंतोष का कारण भी बन सकती है।
कानूनविदों की टिप्पणी
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को किसी भी कल्याणकारी योजना में पहचान सत्यापन का अधिकार है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि किसी पात्र नागरिक को केवल तकनीकी कारणों से उसके अधिकारों से वंचित न होना पड़े। उनका सुझाव है कि अपील, सुधार और वैकल्पिक सत्यापन की व्यवस्था प्रभावी रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।
शिक्षाविदों की राय
शिक्षाविदों का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटलीकरण के साथ डिजिटल साक्षरता भी उतनी ही आवश्यक है। केवल मोबाइल ऐप उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को उसका उपयोग सिखाना भी सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।
समाजसेवी संस्थाओं की मांग
सामाजिक संगठनों ने सरकार और तेल कंपनियों से मांग की है कि बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और दूरदराज़ क्षेत्रों के लोगों के लिए विशेष सहायता अभियान चलाए जाएं। उनका सुझाव है कि पंचायत स्तर पर e-KYC शिविर, मोबाइल वैन और घर-घर सत्यापन जैसी सुविधाएं बढ़ाई जाएं ताकि कोई भी पात्र उपभोक्ता केवल तकनीकी कारणों से असुविधा का सामना न करे।
निष्कर्ष
एलपीजी e-KYC का उद्देश्य व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक आम नागरिक के लिए कितनी सरल और सुलभ बनती है। विशेषज्ञों की राय है कि पारदर्शिता और जनसुविधा—दोनों को साथ लेकर चलना ही इस अभियान की वास्तविक सफलता होगी। ऐसे में उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी गैस कंपनी की आधिकारिक सूचना के अनुसार समय रहते e-KYC पूरा कर लें और किसी भी भ्रामक सूचना पर भरोसा न करें।
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