महादलित बस्तियों में न्याय की दस्तक: दो मामलों की जांच के बाद मुसहर सेवा संघ ने मांगी कार्रवाई, रिपोर्ट जीतन राम मांझी और संतोष मांझी को सौंपी, बोले प्रतिनिधि—न्याय नहीं मिला तो लोकतांत्रिक आंदोलन करेंगे, तेजस्वी ने सरकार को घेरा

बी के झा

NSK news India

गया/बोधगया, 27 सितंबर

महादलित बस्तियों में सामने आए दो गंभीर मामलों ने एक बार फिर पुलिस कार्रवाई, पीड़ित परिवारों की सुरक्षा और न्याय की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिहार मुसहर सेवा संघ के एक शिष्टमंडल ने खिजरसराय थाना क्षेत्र के कुड़वा बाजार महादलित टोला पहुंचकर मृतक अजय मांझी के परिजनों और ग्रामीणों से मुलाकात की। इसके बाद शिष्टमंडल ने पथरा गांव में महादलित महिला के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के आरोप से जुड़े मामले की भी जानकारी जुटाई।संघ के प्रतिनिधियों ने रविवार को बोधगया के सक्सेना मोड़ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दोनों मामलों में पुलिस कार्रवाई को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।

प्रतिनिधियों के अनुसार, पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि अब तक अपेक्षित कार्रवाई और गिरफ्तारी नहीं हुई है। संघ ने अपनी जांच के बाद तैयार रिपोर्ट केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष मांझी को सौंप दी है।

पीड़ित परिवारों तक पहुंचा शिष्टमंडल, बयानों के आधार पर तैयार हुई रिपोर्ट

संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिष्टमंडल ने घटनास्थल और प्रभावित परिवारों से बातचीत कर मामले की जानकारी जुटाई। संगठन की ओर से संबंधित आरोपितों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की गई है।प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों को राजनीतिक लाभ का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए और न ही इनके बहाने सामाजिक तनाव पैदा करने की कोशिश होनी चाहिए। उनका कहना है कि प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

संघ ने चेतावनी दी कि यदि पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता है तो वह लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा और जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करेगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिवक्ता नंदलाल मांझी, शंकर मांझी, नारायण प्रसाद मांझी समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।

मुद्दा अब सियासी बयानबाजी के केंद्र में, घटना को लेकर बिहार की राजनीति भी गरमा गई है।

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर सवाल उठाए हैं।तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार सरकार में मंत्री डॉ. संतोष मांझी अपने राजनीतिक पदों को बचाए रखने के लिए मामले पर चुप हैं। उन्होंने मांझी पर अपने ही समुदाय की महिला से जुड़े गंभीर मामले को लेकर ‘दिखावे की राजनीति’ करने का आरोप लगाया।

हालांकि ये आरोप तेजस्वी यादव के राजनीतिक बयान हैं और इनके संबंध में संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब भी खबर में शामिल किया जाना महत्वपूर्ण होगा।

कांग्रेस ने भी सरकार से पूछे सवाल

मामले को लेकर बिहार कांग्रेस ने भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की ओर से पुलिस कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया है।

इस तरह एक ही घटना पर तीन अलग-अलग स्तरों पर सवाल सामने आ रहे हैं—पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं,

सामाजिक संगठन निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की बात कर रहा है, जबकि विपक्ष सरकार की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर रहा है।

असली कसौटी बयान नहीं, कार्रवाई होगी

इन मामलों में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अब यह है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और पुलिस की कार्रवाई क्या रहती है। किसी भी गंभीर आपराधिक मामले में आरोप और राजनीतिक बयान अपनी जगह हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच, साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया से ही निकलता है।

बिहार मुसहर सेवा संघ ने भी राजनीतिक लाभ और सामाजिक तनाव से बचते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती केवल आरोपों का जवाब देना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों का भरोसा कायम करना और कानून के अनुसार पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

महादलित बस्तियों से उठी यह आवाज अब केवल एक संगठन की मांग तक सीमित नहीं रह गई है।

मामला जिस तरह राजनीतिक बहस में प्रवेश कर चुका है, उसमें आने वाले दिनों में पुलिस कार्रवाई और जांच की प्रगति ही यह तय करेगी कि न्याय को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब किस रूप में सामने आता है।

बी. के. झा, एन एस के

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *