ईरान पर साथ नहीं, तो सैन्य अभ्यास में कटौती! दक्षिण कोरिया पर ट्रंप का बड़ा दांव, दुनिया हैरान

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली/वॉशिंगटन, 17 अगस्त

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ऐसा फैसला लिया है जिसने वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने पेंटागन को दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास (Joint Military Exercise) में व्यापक कटौती करने का निर्देश दिया है। उनका आरोप है कि सियोल ने ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की अमेरिकी पहल में सहयोग देने से इनकार कर दिया, इसलिए अमेरिका अपने सैन्य सहयोग की समीक्षा करेगा।यह फैसला ऐसे समय आया है जब कोरियाई प्रायद्वीप में उत्तर कोरिया की मिसाइल गतिविधियां बढ़ी हैं और अमेरिका–दक्षिण कोरिया की संयुक्त सैन्य तैयारियां क्षेत्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती हैं।

ट्रंप का संदेश: महंगी कवायद, गलत संकेत

सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि इस सप्ताह शुरू होने वाला सैन्य अभ्यास बेहद महंगा है और इससे उत्तर कोरिया को “अनावश्यक रूप से शत्रुतापूर्ण संदेश” जाएगा। उन्होंने दावा किया कि उनके पिछले कार्यकाल में उत्तर कोरिया ने अमेरिका के प्रति सम्मानजनक व्यवहार किया था और उनके किम जोंग उन के साथ अच्छे संबंध रहे हैं।ट्रंप ने लिखा कि चूंकि अभ्यास को पूरी तरह रद्द करने में देर हो चुकी है, इसलिए रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को इसे बड़े स्तर पर सीमित करने का निर्देश दिया गया है।

ईरान बना विवाद की असली वजह

ट्रंप के अनुसार उन्होंने हाल ही में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से पूछा था कि क्या सियोल ईरान के परमाणु निरस्त्रीकरण अभियान में अमेरिका का साथ देगा। उनका दावा है कि दक्षिण कोरिया ने स्पष्ट शब्दों में जवाब दिया—”नहीं, धन्यवाद।

“इसी प्रतिक्रिया को ट्रंप ने अपने फैसले का प्रमुख कारण बताया और संकेत दिया कि सहयोगी देशों से अब अमेरिका अधिक स्पष्ट रणनीतिक समर्थन की अपेक्षा करेगा।

18 हजार सैनिकों की थी तैयारी

11 दिनों तक चलने वाले इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में लगभग 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिकों के शामिल होने की योजना थी। इसका उद्देश्य उत्तर कोरिया की संभावित सैन्य चुनौती का सामना करने के लिए दोनों देशों की संयुक्त अभियान क्षमता, कमांड समन्वय और युद्ध तैयारी को मजबूत करना था।यह अभ्यास उत्तर कोरिया द्वारा संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण दोबारा शुरू करने के बाद तैयार किया गया था।

सहयोगी से दूरी, किम के प्रति नरमी

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम अमेरिकी विदेश नीति में एक असामान्य बदलाव का संकेत देता है। एक ओर वे लंबे समय से सहयोगी रहे दक्षिण कोरिया पर दबाव बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को सकारात्मक उदाहरण के रूप में पेश कर रहे हैं।इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की पारंपरिक सुरक्षा नीति को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

डेमोक्रेट्स का तीखा हमला

डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क केली ने ट्रंप के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि संयुक्त सैन्य अभ्यास को कमजोर करना दूरदर्शिता नहीं बल्कि छोटी सोच का परिचायक है। उनके अनुसार ऐसे अभ्यास ही अमेरिका और उसके सहयोगियों की सामूहिक सुरक्षा की सबसे मजबूत गारंटी हैं।

वैश्विक असर क्या हो सकता है?

यदि सैन्य अभ्यास वास्तव में सीमित होता है, तो इसके प्रभाव केवल कोरियाई प्रायद्वीप तक सीमित नहीं रहेंगे। इससे अमेरिका–

दक्षिण कोरिया संबंधों में तनाव बढ़ सकता है, उत्तर कोरिया को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सकती है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन तथा रूस की रणनीतिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि ट्रंप प्रशासन अब सहयोगी देशों से केवल साझेदारी नहीं, बल्कि अमेरिकी वैश्विक एजेंडे पर खुला समर्थन भी चाहता है।

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