बिहार में बाढ़ का कहर: गंडक ने निगली 5 एकड़ जमीन, कहीं सड़कें टूटीं तो कहीं पुलिया बही; हजारों की जिंदगी पानी में फंसी, गन्ने की 2000 एकड़ फसल तबाह, कोसी के रौद्र रूप से पलायन; नेपाल में तबाही से 939 मौतें

बी के झा

NSK news Ind

पटना, 1 सितंबर

नेपाल में हुई मूसलाधार बारिश का असर अब बिहार की नदियों में साफ दिखाई देने लगा है। गंडक और कोसी समेत कई नदियां उफान पर हैं। पश्चिम चंपारण से लेकर सहरसा, सुपौल और दरभंगा तक बाढ़ और कटाव ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कहीं नदी खेतों को निगल रही है तो कहीं तेज बहाव सड़कों और पुल-पुलियों को अपने साथ बहा ले जा रहा है।

हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।एक घंटे में 200 मीटर जमीन नदी में समाईपश्चिम चंपारण के मधुबनी प्रखंड स्थित रेवहिया गांव में गंडक नदी का कटाव सोमवार को इतना भयावह हो गया कि देखते ही देखते करीब पांच एकड़ जमीन नदी में समा गई। नदी की तेज धारा ने महज एक घंटे में करीब 200 मीटर लंबाई तक जमीन को काट डाला। इसी दौरान एक घर भी नदी की धारा में विलीन हो गया।

कटाव रोकने के लिए लगाए गए बंबू रोल भी नदी के प्रचंड वेग के सामने टिक नहीं सके और बह गए। गंडक के इस रौद्र रूप ने नदी पार रहने वाले किसानों में दहशत पैदा कर दी है।

गन्ने की 2000 एकड़ फसल बर्बाद

गंडक की बाढ़ और कटाव का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है। बगहा चीनी मिल यानी तिरुपति शुगर मिल के रिजर्व एरिया में करीब 3000 एकड़ गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। इनमें लगभग 2000 एकड़ फसल गंडक की तेज धारा में बह चुकी है।

मधुबनी और पिपरासी प्रखंड के एक दर्जन से अधिक गांवों के सैकड़ों किसान इससे प्रभावित हैं। मधुबनी प्रखंड के सिसई, नरकहवा, घोड़हवा और चिउरही गांव कटाव से सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। उधर, गोपालगंज और सारण में भी गंडक का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।

पिछले 24 घंटे में गोपालगंज के पताहरा में जलस्तर करीब 50 सेंटीमीटर और डुमरिया घाट में 42 सेंटीमीटर बढ़ा है। सारण के तरैया में गंडक का जलस्तर बढ़ने के कारण पुल निर्माण का काम भी ठप हो गया है।हालांकि वाल्मीकिनगर बराज से सोमवार को जलस्राव घटकर करीब 1.19 लाख क्यूसेक रह गया, लेकिन नदी का कटाव अब भी कई इलाकों में चुनौती बना हुआ है।

कोसी ने बढ़ाई चिंता, दरभंगा में पलायन शुरू

उत्तर बिहार में गंडक के साथ-साथ कोसी भी अपना तेवर दिखा रही है। सहरसा और सुपौल के निचले इलाकों में कोसी का पानी फैलने लगा है। सहरसा के नवहट्टा के ग्रामीण क्षेत्रों और सुपौल सदर प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर रहा है।दरभंगा के गौड़ाबौराम प्रखंड के निचले इलाकों में स्थिति और चिंताजनक हो गई है। यहां पानी बढ़ने के साथ ही ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है।सोमवार शाम छह बजे वीरपुर बराज से करीब 1,88,995 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे कोसी के किनारे बसे इलाकों में चिंता और बढ़ गई है।

सड़कों पर नदियां, पुलिया बनीं पानी की धार

दक्षिण बिहार में भी लगातार बारिश और नदियों के तेज बहाव ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गया और औरंगाबाद के कई प्रखंडों में सड़कें पानी में डूब गई हैं। कई पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त होने से हजारों लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है।गया के इमामगंज में भगहर नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण नदी पार बसे भगहर गांव के करीब 1500 लोग चार दिनों से फंसे हुए हैं।भूतनी नदी पर बनी ह्यूम पाइप की अस्थायी पुलिया बह जाने से करीब 3000 लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। बांकेबाजार की लुटुआ पंचायत में सोनदाहा-धनेता के बीच बनी अस्थायी पुलिया ढहने से एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है।

डुमरिया के छकरबंधा पंचायत में वेलबा घाट नदी पर बनी पुलिया भी तेज बहाव की भेंट चढ़ गई। इससे महुलनिया समेत करीब सात गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हो गया है।

औरंगाबाद में सड़क नदी के तेज बहाव में बही

औरंगाबाद के देव प्रखंड में भी बाढ़ का असर व्यापक है। कटैया टोले केश्वर बिगहा गांव के पास पुलिया के ऊपर से पानी बहने लगा है। देव नगर पंचायत के वार्ड नंबर एक में देव थाना मोड़ के पास टेकरी नदी के तेज बहाव ने सड़क को ही काट दिया।धावा नदी का जलस्तर बढ़ने से माड़ीपुर के पास पुल के ऊपर पानी बहने लगा। इसके चलते रफीगंज-भदवा-औरंगाबाद मार्ग पर आवागमन ठप हो गया है।

जनाजा भी नदी के पानी का मोहताज

किशनगंज के बहादुरगंज में बाढ़ और बदहाल संपर्क व्यवस्था की तस्वीर ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैसा कब्रिस्तान में शव दफनाने के लिए लोगों को खकवा नदी पैदल पार करनी पड़ती है।सोमवार को सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 20 वर्षीय शहनसवी बेगम के जनाजे को परिजन कंधे पर लेकर नदी पार करते दिखाई दिए। नोदिया टोली-बैसा घाट पर पुल नहीं होने के कारण दर्जनों गांवों के हजारों लोग लंबे समय से परेशानी झेल रहे हैं।

सहरसा में कच्ची सड़कें डूबीं, तटबंध पर बढ़ा सीपेज

सहरसा के नवहट्टा में कोसी का पानी कच्ची सड़कों पर फैल गया है। कई गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ है। बलवा चौक के समीप स्पर के ऊपर से पानी बहने लगा है।असैय पुनर्वास, चाही टोला, रामपुर, छतवन, धोबियाही और बगहा खाल में लोगों के साथ-साथ मवेशियों की परेशानी भी बढ़ गई है। तटबंध के किनारे सीपेज बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता और गहरा गई है।

नेपाल की तबाही का असर बिहार तक

उधर, नेपाल में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या 939 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 4000 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

लापता लोगों में 99 सुरक्षाकर्मी और 591 विदेशी नागरिक शामिल हैं।महाराष्ट्र के 262 लोग भी बाढ़ प्रभावित नेपाल और चीन में फंसे बताए गए हैं।

नेपाल की पहाड़ियों में लगातार बारिश और वहां से आने वाले पानी का सीधा असर बिहार की नदियों पर पड़ रहा है।

ऐसे में गंडक और कोसी के किनारे बसे इलाकों में आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण होने की आशंका बनी हुई है।बाढ़ सिर्फ पानी नहीं लाई, अपने साथ खेत, सड़क, पुल और हजारों परिवारों की चिंता भी बहा लाई है।

अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि नदी के बढ़ते वेग के बीच इंसानी बस्तियों और किसानों की जमीन को कैसे बचाया जाए।

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