बी के झा
NSK news Ind

पटना, 12 सितंबर
सत्ता के गलियारों से दूर बैठे उस आम आदमी के लिए, जिसकी आवाज थाने की चौखट पर दब जाती है, न्याय की तलाश अक्सर किसी लंबे और अंधेरे रास्ते जैसी होती है। ऐसे ही एक मामले में मधुबनी के हरलाखी थाना क्षेत्र से एक बुजुर्ग पिता अपनी फरियाद लेकर पटना पहुंचा। उसकी उम्मीद थी कि शायद जन सुराज का जन सेवा केंद्र उसकी आवाज उन अधिकारियों तक पहुंचा सके, जिनके दरवाजे पर वह लंबे समय से दस्तक दे रहा है।
मधुबनी के हरलाखी थाना क्षेत्र निवासी मनोज कुमार शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को पुलिसकर्मियों ने घर से उठाकर उसके साथ मारपीट की। उनका दावा है कि उनके बेटे ने कथित तौर पर छह पुलिसकर्मियों द्वारा पैसे लिए जाने का वीडियो बनाया था, जिसके बाद मामला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
मनोज शर्मा का आरोप है कि इसके बाद उनके परिवार की मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ गईं।‘बेटे को घर से उठाया, फिर गांजा तस्करी के केस में भेज दिया जेल’जन सेवा केंद्र पहुंचकर मनोज कुमार शर्मा ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए दावा किया कि हरलाखी थाना क्षेत्र के छह पुलिसकर्मियों ने उनके बेटे को घर से उठाया और उसके साथ मारपीट की। उनका कहना है कि मामले की जानकारी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, जिसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई।
मनोज का आरोप है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों में उनके परिवार के प्रति नाराजगी बढ़ गई और उनके बेटे को दोबारा घर से उठाकर गांजा तस्करी के आरोप में जेल भेज दिया गया।उनके मुताबिक उनका बेटा पिछले आठ-दस महीने से जेल में बंद है। पिता का दावा है कि उन्होंने पुलिस अधीक्षक से लेकर थाना स्तर तक कई बार गुहार लगाई, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
RTI से लेकर DGP तक दस्तक, फिर भी नहीं मिला रास्ता
मनोज कुमार शर्मा का कहना है कि उन्होंने मामले की जानकारी हासिल करने के लिए RTI का सहारा लिया और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी आवेदन दिए। उनका आरोप है कि उन्होंने एसपी और थाना स्तर पर भी शिकायत की, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच के बजाय कथित तौर पर पूरे प्रकरण को दबाने की कोशिश की जा रही है।
सबसे गंभीर आरोप उस कथित दबाव को लेकर है, जिसका जिक्र मनोज शर्मा ने किया है।उनका दावा है कि पुलिस की ओर से उन पर समझौता करने और अदालत में चल रहे मामले को वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। मनोज के मुताबिक उन्हें कथित तौर पर धमकी दी गई कि यदि उन्होंने समझौता नहीं किया तो उनके पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया जाएगा।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे गंभीर आरोपों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
एक वीडियो से शुरू हुआ विवाद या उसके बाद बढ़ी दुश्मनी?
बताई गई घटनाओं के मुताबिक इस पूरे मामले की जड़ वर्ष 2025 में हुई एक कथित घटना से जुड़ी है। मनोज शर्मा के अनुसार, उनके बेटे ने छह पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से पैसे लिए जाने का वीडियो बनाया था, जिसे बाद में वायरल किया गया।इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होने की बात सामने आई। परिवार का आरोप है कि कार्रवाई के बाद उनके बेटे को ही निशाना बनाया गया और बाद में उसे एक आपराधिक मामले में जेल भेज दिया गया।
यहीं से इस प्रकरण का सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—क्या किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ शिकायत या कथित भ्रष्टाचार का वीडियो सामने आने के बाद शिकायतकर्ता या उसके परिवार को प्रताड़ित किया गया?
या फिर बेटे के खिलाफ दर्ज मामला वास्तव में स्वतंत्र आपराधिक जांच का परिणाम है?
इन दोनों सवालों का जवाब निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से ही सामने आ सकता है।
जन सेवा केंद्र ने लिया संज्ञान, DGP तक पहुंचेगी फरियाद
मधुबनी से पटना पहुंचे मनोज कुमार शर्मा ने अपनी फरियाद जन सुराज के जन सेवा केंद्र में रखी है। बताया गया है कि केंद्र की ओर से मामले को लेकर पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र देने और प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से मामले को उनके संज्ञान में लाने की बात कही गई है।इस पूरे प्रकरण में अब नजर इस बात पर होगी कि पुलिस मुख्यालय इन आरोपों को किस गंभीरता से लेता है और क्या मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाती है।क्योंकि सवाल सिर्फ एक परिवार का नहीं है। सवाल यह भी है कि अगर किसी नागरिक को पुलिस के खिलाफ शिकायत करने के बाद ही पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़े, तो आम आदमी न्याय के लिए आखिर किस दरवाजे पर दस्तक देगा?
एनएसके के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है—कानून के रखवाले पर आरोप लगे तो जांच भी उसी व्यवस्था के भीतर होगी
या शिकायतकर्ता को ऐसी स्वतंत्र व्यवस्था मिलेगी, जहां उसकी आवाज बिना किसी दबाव के सुनी जा सके?
