बी के झा
NSK news Ind

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नई दिल्ली/हैदराबाद, 23 अगस्त
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी का प्रस्तावित अमेरिका दौरा केंद्र सरकार से राजनीतिक क्लीयरेंस न मिलने के कारण रद्द हो गया। उन्हें ब्रिटेन के आधिकारिक कार्यक्रमों की अनुमति मिल गई थी, लेकिन यूके से अमेरिका जाने की मंजूरी विदेश मंत्रालय ने नहीं दी। इस फैसले ने संघीय ढांचे, विदेश नीति और राजनीतिक मर्यादाओं पर नई बहस छेड़ दी है।
क्या है राजनीतिक क्लीयरेंस?
भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार विदेश नीति और विदेशी मामले केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद या वरिष्ठ सरकारी अधिकारी यदि किसी आधिकारिक विदेश यात्रा पर जाते हैं तो विदेश मंत्रालय से Political Clearance लेना अनिवार्य होता है।2015 में कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार राज्य सरकारों को विदेश यात्रा का उद्देश्य, कार्यक्रम, मेजबान संस्था और प्रतिनिधिमंडल का पूरा विवरण केंद्र को देना होता है।
विदेश मंत्रालय किन आधारों पर देता है मंजूरी?
मंत्रालय सामान्यतः इन बिंदुओं का मूल्यांकन करता है:
यात्रा का घोषित उद्देश्य और उसकी आधिकारिक आवश्यकता।
निमंत्रण देने वाली संस्था या व्यक्ति की प्रकृति।
कार्यक्रम मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद के अनुरूप है या नहीं।
संबंधित देश के साथ भारत के कूटनीतिक संबंध।
यात्रा का संभावित राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रत्येक सरकारी विदेश दौरे का मूल्यांकन उसके उद्देश्य और पद की गरिमा के अनुरूप किया जाता है। उनके अनुसार अमेरिका यात्रा प्रस्तावित स्वरूप में उपयुक्त नहीं पाई गई, इसलिए क्लीयरेंस नहीं दी गई।
संविधान विशेषज्ञों की राय
संवैधानिक मामलों के जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री राज्य के निर्वाचित प्रमुख अवश्य हैं, लेकिन विदेश नीति पर उनका स्वतंत्र अधिकार नहीं है। किसी भी आधिकारिक विदेशी संपर्क का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के माध्यम से ही होता है ताकि भारत की एकीकृत विदेश नीति प्रभावित न हो।
रक्षा विशेषज्ञों का विश्लेषण
रक्षा एवं सामरिक मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में विदेशी राजनीतिक हस्तियों या विवादित सार्वजनिक व्यक्तियों से मुलाकात केवल व्यक्तिगत शिष्टाचार का विषय नहीं रहती, बल्कि उसके कूटनीतिक संकेत भी निकाले जाते हैं। इसलिए केंद्र सरकार अत्यधिक सतर्कता बरतती है।
राजनयिकों का दृष्टिकोण
पूर्व राजनयिकों का मानना है कि राजनीतिक क्लीयरेंस किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष या विपक्ष का निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित, अंतरराष्ट्रीय संदेश और राजनयिक संतुलन बनाए रखने की प्रशासनिक प्रक्रिया है। कई बार मित्र देशों की यात्रा भी विशेष परिस्थितियों में रोकी जा सकती है।
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार का कहना है कि निर्णय पूरी तरह स्थापित नियमों के अनुरूप लिया गया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन का कार्यक्रम स्वीकृत था, जबकि अमेरिका यात्रा का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पद और घोषित उद्देश्य से मेल नहीं खाता था।
विपक्ष का पलटवार
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ भेदभाव कर रही है। उनका कहना है कि निवेश और प्रवासी भारतीयों से संवाद के उद्देश्य से होने वाली यात्राओं को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।वहीं भाजपा नेताओं का तर्क है कि विदेश यात्राएं राजनीतिक मंच नहीं बन सकतीं और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है।
वरिष्ठ शिक्षाविद का तीखा बयान
एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने कहा:- “आखिर तेलंगाना के मुख्यमंत्री अमेरिका जाने के लिए इतना व्याकुलता क्यों दिखा रहे हैं और सबसे बड़ी बात वहां जाकर उस मेयर से क्यों मिलना चाहते थे जो हमेशा भारत, भारत सरकार और बहुसंख्यक हिंदुओं के लिए जहर उगलते रहता है।
”उन्होंने आगे कहा:- “आखिर किसके दबाव में रेवंत रेड्डी यह सब करने के लिए मोदी सरकार ही नहीं देश के खिलाफ मोर्चा संभालने का बिड़ा उठा लिया।
”शिक्षाविद ने मांग करते हुए कहा:- “सरकार और जांच एजेंसियों को इस यात्रा पर गहन जांच करना चाहिए और दूध का दूध और पानी का पानी देश के सामने सच्चाई पेश कर एक मिशाल कायम करें।”
पहले भी कई मुख्यमंत्रियों को नहीं मिली अनुमति
यह पहला अवसर नहीं है जब किसी मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा रोकी गई हो। इससे पहले:* अरविंद केजरीवाल (2019, 2022) के कुछ विदेशी कार्यक्रमों को अनुमति नहीं मिली।* ममता बनर्जी के प्रस्तावित चीन और रोम दौरे को क्लीयरेंस नहीं मिली।* तरुण गोगोई और अर्जुन मुंडा के कुछ प्रस्तावित विदेशी दौरों को भी स्वीकृति नहीं दी गई थी।
राजनीतिक निष्कर्ष
रेवंत रेड्डी प्रकरण ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि भारत में मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा केवल राज्य सरकार का निर्णय नहीं होती।
संविधान, कैबिनेट सचिवालय के दिशा-निर्देश, विदेश मंत्रालय का आकलन और राष्ट्रीय कूटनीतिक हित—इन सभी की कसौटी पर खरा उतरने के बाद ही राजनीतिक क्लीयरेंस दी जाती है।
फिलहाल विवाद केवल एक रद्द यात्रा का नहीं, बल्कि संघीय राजनीति और विदेश नीति के संतुलन का विषय बन गया है।
