बी के झा
NSK news Ind


संभल, (उत्तर प्रदेश) 21 अगस्त
उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद के आसपास प्रशासन ने मास्टर प्लान–2031 के तहत बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। निरीक्षण के दौरान 36 मकान और दुकानों के नक्शे स्वीकृत न पाए जाने पर उन्हें नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शहरी नियोजन, अवैध निर्माण और अतिक्रमण के विरुद्ध है। वहीं इस कदम ने राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रशासनिक टीम ने एक सप्ताह पहले मस्जिद के पीछे स्थित क्षेत्र का सर्वे किया। एसडीएम विकास चंद्र के अनुसार जांच में 36 ऐसे भवन मिले जिनके निर्माण का स्वीकृत नक्शा उपलब्ध नहीं था।
सभी भवन मालिकों को नोटिस देकर पहले जवाब देने का अवसर दिया जाएगा, उसके बाद ही नियमानुसार निर्णय होगा।कार्रवाई का पहला चरण चौधरी सराय से टंडन क्रॉसिंग तक सीमित रखा गया है, जबकि आगे इसे अन्य इलाकों तक बढ़ाने की तैयारी है।
कानून क्या कहता है?
कानूनविदों के अनुसार किसी भी भवन को गिराने या दंडात्मक कार्रवाई से पहले नोटिस, सुनवाई और जवाब का अवसर देना प्राकृतिक न्याय का मूल सिद्धांत है। यदि किसी भवन का निर्माण वास्तव में बिना स्वीकृति हुआ है तो स्थानीय विकास प्राधिकरण और नगर नियोजन कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन प्रक्रिया पारदर्शी होना आवश्यक है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
सत्तापक्ष का कहना है कि मास्टर प्लान सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा और अवैध निर्माण चाहे किसी का भी हो, कार्रवाई नियमों के अनुसार होगी।
विपक्षी दलों ने मांग की है कि प्रशासन किसी भी कार्रवाई में भेदभाव की आशंका समाप्त करने के लिए पूरी सूची, सर्वे रिपोर्ट और कानूनी आधार सार्वजनिक करे तथा किसी निर्दोष नागरिक के साथ अन्याय न हो।
सामाजिक और धार्मिक पक्ष
स्थानीय हिंदू संगठनों ने सड़क अतिक्रमण हटाने और मास्टर प्लान लागू करने का समर्थन करते हुए कहा कि कानून का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए।
वहीं स्थानीय मुस्लिम संगठनों और मौलानाओं ने कहा कि यदि कार्रवाई वास्तव में नियम आधारित है तो लोगों को पूरा अवसर मिलना चाहिए, लेकिन किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाने जैसी स्थिति नहीं बननी चाहिए। उन्होंने निष्पक्ष सुनवाई और संवाद की मांग की।
शिक्षाविद और समाजसेवियों की राय
शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने शहरों में वर्षों से अनियोजित निर्माण के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं। यदि मास्टर प्लान लागू करना है तो पुनर्वास, वैकल्पिक व्यवस्था और जनभागीदारी के साथ संतुलित मॉडल अपनाना होगा।
स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं ने सुझाव दिया कि प्रशासन सर्वे की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करे और नागरिकों के लिए कानूनी सहायता शिविर भी लगाए, ताकि वास्तविक दस्तावेज रखने वाले लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।
आगे क्या होगा?
36 भवन मालिकों को नोटिस जारी होंगे।
प्रत्येक को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
बिना स्वीकृत निर्माण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
सड़क पर हुए अतिक्रमण हटाकर निर्धारित चौड़ाई बहाल करने की तैयारी है।
मास्टर प्लान–2031 के तहत सर्वे अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ाया जाएगा।
निष्कर्ष:
संभल की यह कार्रवाई केवल अवैध निर्माण का मामला नहीं, बल्कि कानून, शहरी विकास, धार्मिक संवेदनशीलता और राजनीतिक विमर्श—चारों के संगम पर खड़ी है।
अब सबसे महत्वपूर्ण कसौटी होगी कि प्रशासन पूरी प्रक्रिया को कितना निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत तरीके से लागू करता है।
