आंध्र को ₹17,900 करोड़ की विकास सौगात: पीएम मोदी ने भोगपुरम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का किया उद्घाटन, बोले— ‘यही उत्तर आंध्र की नई उड़ान का रनवे’

बी के झा

‘ विजयनगरम/नई दिल्ली, 1 अगस्त

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगपुरम में लगभग 17,900 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण किया। इनमें भोगपुरम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, सड़क अवसंरचना, ऊर्जा, परिवहन तथा तटीय विकास से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि “विकसित भारत” के संकल्प को गति देने वाला ऐतिहासिक क्षण है।

प्रधानमंत्री ने भोगपुरम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का उद्घाटन करते हुए कहा कि “यह एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर आंध्र के आर्थिक परिवर्तन का रनवे और युवाओं के सपनों को नई ऊंचाई देने वाला लॉन्चपैड है।” उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जिस भूमि ने आदिवासी स्वाभिमान और स्वतंत्रता संघर्ष का नेतृत्व किया, वहीं से अब विकास की नई उड़ान शुरू हो रही है।’

ब्लू इकोनॉमी’ बनेगी विकास की नई धुरी

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत समुद्री अर्थव्यवस्था (ब्लू इकोनॉमी) को नई ताकत देने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य पूरे पूर्वी तटीय क्षेत्र को कोस्टल इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करना है। इसी सोच के तहत विशाखापट्टनम से कृष्णापट्टनम तक पुराने बंदरगाहों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जबकि मुलापेटा और रामायापट्टनम में नए बंदरगाह विकसित किए जा रहे हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि मजबूत बंदरगाह, आधुनिक सड़कें, बेहतर रेल नेटवर्क और विश्वस्तरीय हवाई अड्डे किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति की रीढ़ होते हैं और आंध्र प्रदेश आने वाले वर्षों में देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है।

राज्य सरकार ने बताया ‘ऐतिहासिक दिन

‘आंध्र प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री की यात्रा को राज्य के लिए “ऐतिहासिक अवसर” बताया। राज्य सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से औद्योगिक निवेश, पर्यटन, निर्यात, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। सरकार के अनुसार भोगपुरम एयरपोर्ट उत्तर आंध्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देगा तथा विशाखापट्टनम पर बढ़ते दबाव को भी कम करेगा।

विपक्ष ने उठाए सवाल

विपक्षी दलों ने परियोजनाओं का स्वागत करते हुए कुछ सवाल भी उठाए। उनका कहना है कि केवल शिलान्यास और उद्घाटन पर्याप्त नहीं है, बल्कि परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन, स्थानीय युवाओं को रोजगार, किसानों को उचित मुआवजा तथा पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।विपक्ष का आरोप है कि विकास परियोजनाओं के साथ-साथ पुनर्वास, भूमि अधिग्रहण और स्थानीय हितों को भी समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हालांकि केंद्र और राज्य सरकार का कहना है कि सभी परियोजनाएं निर्धारित कानूनी और पर्यावरणीय प्रक्रियाओं के अनुरूप लागू की जा रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आंध्र प्रदेश में आधारभूत ढांचे पर केंद्र का बढ़ता निवेश केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार दक्षिण भारत में कनेक्टिविटी, औद्योगिक निवेश और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करना केंद्र सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। विश्लेषकों का कहना है कि बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाएं रोजगार, निवेश और क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी देती हैं।

शिक्षाविदों का दृष्टिकोण

शिक्षाविदों का कहना है कि आधुनिक हवाई अड्डे, सड़कें और बंदरगाह केवल परिवहन सुविधाएं नहीं बढ़ाते, बल्कि उच्च शिक्षा, अनुसंधान, पर्यटन, व्यापार और वैश्विक निवेश के नए अवसर भी पैदा करते हैं। उनका मानना है कि यदि इन परियोजनाओं के साथ कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा को जोड़ा जाए तो स्थानीय युवाओं को सबसे अधिक लाभ मिलेगा।

कानूनविदों की टिप्पणी

कानूनविदों का कहना है कि बड़े अवसंरचना प्रकल्पों की सफलता केवल निर्माण पर निर्भर नहीं करती, बल्कि भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी, पुनर्वास और पारदर्शिता जैसे कानूनी पहलुओं के प्रभावी अनुपालन पर भी आधारित होती है। उनका मानना है कि यदि सभी प्रक्रियाएं कानून के अनुरूप पूरी की जाएं तो ऐसी परियोजनाएं दीर्घकालिक विकास का मजबूत आधार बनती हैं।

समाजसेवी संगठनों की अपेक्षाएं

सामाजिक संगठनों ने परियोजनाओं का स्वागत करते हुए आग्रह किया कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, तटीय पारिस्थितिकी, मछुआरा समुदायों के हित और स्थानीय लोगों के पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और स्थानीय समुदाय उसकी विकास यात्रा का सहभागी बने।

विकास और राजनीति—दोनों के केंद्र में आंध्रभोगपुरम

अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और लगभग ₹17,900 करोड़ की परियोजनाओं के साथ आंध्र प्रदेश एक बार फिर राष्ट्रीय विकास विमर्श के केंद्र में आ गया है। एक ओर केंद्र सरकार इसे “विकसित भारत” के विजन की बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनहित से जुड़े पहलुओं पर सरकार को जवाबदेह बनाए रखने की बात कर रहा है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ये परियोजनाएं कितनी तेजी से धरातल पर उतरती हैं और आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था, रोजगार, निवेश तथा पूर्वी तट के समग्र विकास को कितना नया आयाम देती हैं।

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