ऑपरेशन सिंदूर के बहाने चीन का ‘हथियार खेल’: पाकिस्तान को गोला-बारूद, राफेल को बदनाम करने का अभियान और दुनिया के सामने खुला बड़ा पर्दाफाश

बी के झा

नई दिल्ली, 22 नवंबर

भारत-पाकिस्तान के बीच मई में भड़की चार दिवसीय झड़प केवल सीमा का तनाव नहीं थी—उसने वैश्विक भू-राजनीति की परतें भी खोल दीं। एक अमेरिकी आयोग की वार्षिक रिपोर्ट ने सनसनीखेज खुलासा किया है कि चीन ने इस संघर्ष को

अवसर” की तरह इस्तेमाल किया—न सिर्फ पाकिस्तान को हथियार देकर, बल्कि खुद के रक्षा तंत्र का मैदान-ए-जंग में परीक्षण, और उस पर आधारित वैश्विक मार्केटिंग का खेल भी जमकर खेला।यूएस–चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) की यह रिपोर्ट बताती है कि चीन ने इस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को HQ-9 एयर डिफेन्स सिस्टम, PL-15 मिसाइलें, और J-10 लड़ाकू विमान मुहैया कराए। आयोग के अनुसार यह पहली बार था जब चीन की आधुनिक हथियार प्रणालियाँ किसी वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति में आज़माई गईं—और फिर इसे एक “रीयल वर्ल्ड एडवर्टाइजिंग कैंपेन” की तरह दुनिया भर के देशों के सामने पेश किया गया।J-35, KJ-500 और मिसाइल रक्षा प्रणाल—

चीन का ‘पोस्ट-कॉम्बैट ऑफर’रिपोर्ट के मुताबिक संघर्ष समाप्त होते ही चीन ने पाकिस्तान को भविष्य के लिए एक बड़ा पैकेज ऑफर किया—

40 J-35 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान,KJ-500 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम,और बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस साधन।यह कदम संकेत देता है कि चीन पाकिस्तान को एक दीर्घकालिक सैन्य ग्राहक बनाने की दिशा में बड़े रणनीतिक निवेश कर रहा है।

संघर्ष समाप्त होने के कुछ दिनों बाद, एशिया के कई देशों में मौजूद चीनी दूतावासों ने इस “सफल हथियार प्रदर्शन” की जमकर प्रशंसा की—जिसका उद्देश्य साफ था: हथियार बिक्री बढ़ाना।राफेल को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार अभियानUSCC की रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि चीन ने इस पूरे प्रकरण के बाद एक संगठित दुष्प्रचार अभियान चलाया—जिसका मकसद था:

राफेल लड़ाकू विमान की वैश्विक बिक्री को नुकसान पहुँचाना

और अपने J-35 को विकल्प के रूप में आक्रामक तरीके से प्रमोट करना फ्रांसीसी खुफिया एजेंसियों ने पाया कि चीन ने:फर्जी सोशल मीडिया अकाउंटों का उपयोग किया AI से बने नकली चित्र पोस्ट किए वीडियो गेम के स्क्रीनशॉट को “राफेल का मलबा” बताकर प्रचारित किया और कई देशों के नीति-निर्माताओं को प्रभावित करने की कोशिश कीरिपोर्ट में यह भी दावा है कि इंडोनेशिया के राफेल खरीद सौदे को प्रभावित करने के लिए वहां मौजूद चीनी दूतावास ने सक्रिय लॉबिंग की।यह पहला मौका है जब किसी रिपोर्ट ने चीन के AI-आधारित दुष्प्रचार नेटवर्क को सीधे तौर पर वैश्विक हथियार प्रतिस्पर्धा से जोड़ा है।भारत-पाक संघर्ष कैसे शुरू हुआ: ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की पृष्ठभूमि

22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई। भारत ने इस हमले में पाकिस्तान की जमीन से सक्रिय नेटवर्क का पता लगाया।इसके बाद:7 मईभारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया—PoK और पाकिस्तान के भीतर कई आतंकी लॉन्चपैड्स पर सटीक हमले किए।8–9 मईपाकिस्तान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें अधिकतर खतरों को भारतीय सिस्टम ने निष्क्रिय कर दिया।भारत की जवाबी कार्रवाई भारतीय

बलों ने पाकिस्तान के दो प्रमुख एयरफील्ड्स पर सफलता पूर्वक लक्ष्य भेदी हमले किए।10 मई‌ दोनों देशों की सेनाओं के बीच समझौते के बाद संघर्ष विराम लागू हुआ।इसी अवधि को चीन ने अपने “टेस्टिंग ग्राउंड” के रूप में इस्तेमाल किया—जैसा कि रिपोर्ट में दावा किया गया है।चीन का पलटवार: ‘रिपोर्ट झूठ का पुलिंदा’चीन ने रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया।विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा:रिपोर्ट स्वयं ही झूठी है। यह संस्था चीन के प्रति वैचारिक पूर्वाग्रह रखती है और उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं।

”हालाँकि विशेषज्ञ मानते हैं कि दुष्प्रचार अभियान, हथियारों का फील्ड-टेस्ट और पाकिस्तान को त्वरित सैन्य सहायता—ये सभी वर्ष 2023 के बाद चीन की “नई रक्षा कूटनीति” के अहम हिस्से हैं।

विश्लेषण: क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका क्या असर?

1. दक्षिण एशिया हथियार बाज़ार में चीन की आक्रामक एंट्री

2. हाइब्रिड वॉरफेयर: दुष्प्रचार + हथियार प्रचार का अनोखा मिश्रण

3. भारत के खिलाफ पाकिस्तान को सैन्य बैकिंग—रणनीतिक चिंताएँ गहराई

4. AI आधारित फेक-कैंपेन का इस्तेमाल—भविष्य के युद्ध का संकेत।भारत और पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियाँ इसे “रेज़िडेंट इंफॉर्मेशन वॉर” की नई परत मान रही हैं।

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