संसद की सुरक्षा पर हाई अलर्ट: CISF डीजी ने खुद संभाली कमान, प्रदर्शन के बाद अभेद्य सुरक्षा कवच में संसद

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 21 जुलाई

संसद के मानसून सत्र के बीच सोमवार को संसद परिसर के निकट हुए विरोध-प्रदर्शन ने देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क कर दिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के महानिदेशक प्रवीर रंजन स्वयं संसद भवन पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक एवं उच्चस्तरीय निरीक्षण किया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संसद परिसर, प्रवेश द्वारों, सुरक्षा घेरों, त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था तथा आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल की विस्तार से समीक्षा की।

सूत्रों के अनुसार स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जब तक नीट परीक्षा विवाद को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक संसद भवन और उसके आसपास का पूरा सुरक्षा तंत्र ‘हाई अलर्ट मोड’ पर रहेगा। विशेष रूप से मानसून सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।

सोमवार की घटना ने बढ़ाई चिंता

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार सोमवार को प्रदर्शनकारियों का संसद परिसर के निकट स्थित सेल्फी प्वाइंट तक पहुंच जाना सामान्य घटना नहीं माना गया। सुरक्षा अधिकारियों का आकलन है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए जाते तो स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती थी।इसी आशंका को देखते हुए सीआईएसएफ ने तत्काल संसद भवन के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों को नियंत्रित कर दिया। केवल वैध प्रवेश-पास रखने वाले सांसदों, कर्मचारियों, अधिकृत अधिकारियों और अन्य अनुमत व्यक्तियों को ही अंदर प्रवेश दिया गया। इस त्वरित कार्रवाई के कारण किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के संसद परिसर में प्रवेश की संभावना समाप्त हो गई।

खुद डीजी ने किया सुरक्षा का सूक्ष्म निरीक्षण

मंगलवार को हुए उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा अभियान में सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन के साथ एडीजी (मुख्यालय) विजय प्रकाश, आईजी नवज्योति गोगोई, डीआईजी संजय कुमार सैन सहित सीआईएसएफ, दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।अधिकारियों ने संसद भवन के प्रत्येक सुरक्षा घेरे, प्रवेश एवं निकास मार्ग, निगरानी तंत्र, संवेदनशील क्षेत्रों, कंट्रोल रूम, त्वरित प्रतिक्रिया दल तथा आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। समीक्षा का उद्देश्य केवल वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन करना ही नहीं, बल्कि संभावित जोखिमों की पूर्व पहचान कर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना भी था।

सुरक्षा में कोई बड़ी कमी नहीं, फिर भी अतिरिक्त बल तैनात

सुरक्षा समीक्षा के दौरान संसद की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी पाया गया। हालांकि अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती का निर्णय लिया।सूत्रों के अनुसार संसद परिसर में सीआईएसएफ के अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। ये जवान आधुनिक हथियारों, संचार उपकरणों और त्वरित कार्रवाई के संसाधनों से लैस हैं ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सके।

हर आने-जाने वाले पर पैनी नजर

मंगलवार को संसद के आसपास का वातावरण सामान्य दिखाई दिया और कई मार्गों पर यातायात भी बहाल कर दिया गया। इसके बावजूद सुरक्षा जांच पहले की तुलना में कहीं अधिक सख्त रखी गई।रेल भवन, रेड क्रॉस रोड और संसद भवन की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर दिल्ली पुलिस तथा सीआईएसएफ की संयुक्त तैनाती बढ़ा दी गई। प्रत्येक व्यक्ति के पहचान-पत्र और वैध प्रवेश-पास की गहन जांच की जा रही है। जिनके पास अधिकृत पास नहीं है, उन्हें सुरक्षा घेरा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही।हालांकि संसद सत्र के दौरान सामान्य दिनों में भी प्रवेश-पास की जांच अनिवार्य रहती है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जांच की प्रक्रिया को और अधिक कठोर बना दिया गया है।

दिल्ली पुलिस भी पूरी तरह सतर्क

सीआईएसएफ के साथ-साथ दिल्ली पुलिस ने भी संसद भवन के बाहरी सुरक्षा घेरे की अलग से समीक्षा की। पुलिस अधिकारियों ने अतिरिक्त जवानों की तैनाती, बैरिकेडिंग, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना का पुनर्मूल्यांकन किया।वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अचानक जुटने वाली भीड़ अथवा सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी परिस्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सुरक्षा विशेषज्ञों की राय

राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि संसद केवल एक सरकारी भवन नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है। ऐसे में संसद की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।पूर्व सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार विश्वभर में संसदों, राष्ट्रपति भवनों और संवेदनशील सरकारी परिसरों की सुरक्षा बहुस्तरीय (Multi-Layered Security) प्रणाली पर आधारित होती है, जिसमें तकनीकी निगरानी, मानव सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक एक्सेस कंट्रोल और त्वरित प्रतिक्रिया दल मिलकर सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

लोकतंत्र और सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन संसद जैसे अत्यधिक संवेदनशील और रणनीतिक परिसर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहती है। इसलिए सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती यह होती है कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करते हुए सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न करें।आने वाले दिनों तक रहेगी विशेष निगरानीसूत्रों के अनुसार जब तक संसद का मानसून सत्र जारी रहेगा और विरोध-प्रदर्शनों की संभावना बनी रहेगी, तब तक संसद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था लगातार उच्च सतर्कता पर रखी जाएगी। सीआईएसएफ, दिल्ली पुलिस और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से पूरे घटनाक्रम पर चौबीसों घंटे नजर बनाए रखेंगी।

निष्कर्ष

सोमवार की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि बदलते विरोध प्रदर्शनों के स्वरूप के बीच संसद की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं हो सकती। यही कारण है कि अब संसद केवल सुरक्षा घेरे में नहीं, बल्कि अत्याधुनिक निगरानी, अतिरिक्त सुरक्षा बलों और बहुस्तरीय सतर्कता के अभेद्य सुरक्षा कवच में है।

लोकतंत्र का यह सबसे महत्वपूर्ण मंदिर मानसून सत्र के दौरान हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *