बी के झा
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नई दिल्ली, 31 जुलाई
स्वतंत्रता दिवस-2026 के ऐतिहासिक समारोह से पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पूरी तरह सुरक्षा एजेंसियों के अभेद्य सुरक्षा चक्र में प्रवेश करने जा रही है। आतंकवाद, ड्रोन हमलों और आधुनिक तकनीक आधारित खतरों की आशंकाओं के बीच दिल्ली पुलिस ने ऐसा व्यापक सुरक्षा आदेश जारी किया है, जिसे हाल के वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण एहतियाती कदमों में माना जा रहा है।
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर 2 अगस्त से 16 अगस्त 2026 तक दिल्ली में ड्रोन (UAV/UAS), क्वाडकॉप्टर, पैराग्लाइडर, पैरामोटर, हैंग ग्लाइडर, माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट, हॉट एयर बैलून, छोटे पावर्ड एयरक्राफ्ट तथा विमान से पैरा-जंपिंग सहित सभी छोटे हवाई प्लेटफॉर्म के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।पुलिस का स्पष्ट कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी में किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।
खुफिया एजेंसियों के इनपुट ने बढ़ाई चिंता
उच्च पदस्थ सुरक्षा सूत्रों के अनुसार विभिन्न खुफिया एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि देश विरोधी तत्व आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों, वीवीआईपी मूवमेंट, संवेदनशील सरकारी प्रतिष्ठानों और राष्ट्रीय समारोहों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। छोटे आकार के ड्रोन, क्वाडकॉप्टर और अन्य हवाई प्लेटफॉर्म कम लागत में लंबी दूरी तक निगरानी, हथियार या विस्फोटक पहुंचाने में सक्षम हैं। यही कारण है कि इस बार सुरक्षा रणनीति पारंपरिक व्यवस्था से कहीं अधिक व्यापक बनाई गई है।
सीमा से राजधानी तक बढ़ा ड्रोन नेटवर्क का खतरा
हाल के वर्षों में पंजाब, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान की सीमाओं पर पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क द्वारा ड्रोन से हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थ गिराने की अनेक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसी वर्ष अप्रैल में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आईएसआई से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ड्रोन के माध्यम से पहुंचाए गए हथियारों का जखीरा बरामद किया था तथा नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह खतरा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महानगरों तक पहुंच चुका है।
रक्षा विशेषज्ञ: “आज का सबसे बड़ा खतरा आसमान से
“रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। पहले जहां खतरा सीमा पार से घुसपैठ तक सीमित था, वहीं अब हथेली में समाने वाला ड्रोन भी बड़े आतंकवादी हमले का माध्यम बन सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय आयोजनों के दौरान अस्थायी नो-फ्लाई जोन घोषित करना दुनिया की अग्रणी सुरक्षा व्यवस्थाओं का हिस्सा है। उनका कहना है कि यह निर्णय केवल सतर्कता नहीं बल्कि भविष्य की सुरक्षा नीति की झलक भी है।
राजनीतिक विश्लेषक: सुरक्षा अब राजनीति नहीं, राष्ट्रीय सहमति का विषय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में राष्ट्रीय पर्वों की सुरक्षा अब केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं रही। यह राष्ट्रीय प्रतिष्ठा, रणनीतिक तैयारी और सुरक्षा तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार यदि राजधानी में कोई छोटी-सी भी चूक होती है तो उसका संदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाता है। इसलिए सरकार का यह कदम सुरक्षा तंत्र की “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति का संकेत देता है।
कानूनविद: नागरिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी
संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोच्च दायित्व है। ऐसे अवसरों पर सीमित अवधि के लिए लगाए गए प्रतिबंध कानून के अनुरूप हैं, बशर्ते उनका उद्देश्य स्पष्ट और दायरा सीमित हो। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को पारदर्शिता बनाए रखते हुए आवश्यक सेवाओं और अधिकृत एजेंसियों के लिए स्पष्ट अनुमति व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
शिक्षाविद: युवाओं की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण
शिक्षाविदों ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर अफवाहों, भ्रामक वीडियो और अपुष्ट सूचनाओं से दूर रहें तथा सुरक्षा एजेंसियों का सहयोग करें।
समाजसेवी संस्थाओं की अपील
विभिन्न सामाजिक संगठनों ने नागरिकों से कहा है कि कुछ दिनों की असुविधा को राष्ट्रहित में स्वीकार करें। उनका कहना है कि यदि एक भी संभावित खतरा टलता है तो यह प्रतिबंध पूरी तरह सार्थक सिद्ध होगा। संस्थाओं ने लोगों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना पुलिस नियंत्रण कक्ष को देने का आग्रह किया।
दिल्ली पुलिस: सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि लाल किला, राजपथ क्षेत्र, प्रमुख सरकारी भवन, मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। ड्रोन रोधी प्रणाली, बम निरोधक दस्ते, स्नाइपर, विशेष कमांडो, सीसीटीवी निगरानी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉनिटरिंग का भी व्यापक उपयोग किया जाएगा।
दिल्लीवासियों ने किया स्वागत
राजधानी के अधिकांश नागरिकों ने इस निर्णय को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया। लोगों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस देश का गौरव है और यदि कुछ दिनों की पाबंदी से सुरक्षा सुनिश्चित होती है तो इसका पालन सभी का कर्तव्य है। हालांकि ड्रोन आधारित फोटोग्राफी और फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों ने अनुमति प्रक्रिया को और स्पष्ट करने की मांग की है।
विपक्ष का रुख
विपक्षी दलों ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए सुरक्षा उपायों का समर्थन किया है। साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि प्रतिबंधों का क्रियान्वयन पारदर्शी हो, आम नागरिकों और मीडिया की वैध गतिविधियों में अनावश्यक बाधा न आए तथा सुरक्षा के नाम पर किसी प्रकार की प्रशासनिक मनमानी से बचा जाए।
आदेश तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित अवधि में कोई भी व्यक्ति ड्रोन या अन्य प्रतिबंधित हवाई प्लेटफॉर्म का संचालन करता पाया गया तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संपादकीय दृष्टि
आज आतंकवाद की रणनीति बदल चुकी है। युद्ध अब केवल सीमाओं पर नहीं, तकनीक के माध्यम से शहरों के आसमान में भी लड़ा जा रहा है। ऐसे समय में राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा केवल दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व भी है।
स्वतंत्रता का पर्व तभी सार्थक होगा जब सुरक्षा, सतर्कता और नागरिक सहयोग तीनों एक साथ खड़े हों। राष्ट्र की रक्षा केवल सैनिकों के साहस से नहीं, बल्कि नागरिकों की सजगता से भी होती है।
