आन-बान-शान से लहराएगा तिरंगा, 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के जश्न में देश होगा एकजुट; लाल किले से गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’; PM मोदी का देशवासियों से आह्वान—हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा

बी के झा

नई दिल्ली, 11 अगस्त

देश एक बार फिर उस ऐतिहासिक दिन की दहलीज पर खड़ा है, जब तिरंगे की आन, बान और शान के साथ भारत अपनी स्वतंत्रता का गौरव मनाएगा। 15 अगस्त केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए उन असंख्य बलिदानों को याद करने का अवसर है, जिनकी कीमत पर देश ने आजादी हासिल की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया है कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस को पूरे गर्व और सम्मान के साथ मनाएं, स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दें और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लें।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा—“आइए हम सभी लोग 15 अगस्त आन-बान-शान के साथ मनाएं। स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दें और विकसित भारत के संकल्प लें।

हर घर तिरंगा, घर-घर तिरंगा, हर मन तिरंगा।

आइए हर घर पर तिरंगा लहराइए।

”प्रधानमंत्री की यह अपील एक बार फिर स्वतंत्रता दिवस को केवल सरकारी समारोह के बजाय जनभागीदारी के राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाने के संदेश को सामने रखती है।हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा

तिरंगा भारत की राष्ट्रीय पहचान का सबसे शक्तिशाली प्रतीक है। यह केवल तीन रंगों का ध्वज नहीं, बल्कि देश के संघर्ष, त्याग, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता की कहानी अपने भीतर समेटे हुए है।प्रधानमंत्री की अपील का केंद्र यही भावना है कि 15 अगस्त को देश का हर घर राष्ट्रीय पर्व का हिस्सा बने।शहर हो या गांव, महानगर हो या सीमावर्ती इलाका—हर जगह तिरंगा फहराते हुए देशवासी स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को याद करें और आने वाली पीढ़ी को यह बताएं कि आजादी केवल हासिल नहीं की गई थी, बल्कि इसके लिए असंख्य लोगों ने अपना जीवन न्योछावर किया था।

पहली बार लाल किले पर गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’

इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह का सबसे विशेष आकर्षण ‘वंदे मातरम्’ होगा। केंद्र सरकार के अनुसार, 15 अगस्त को ऐतिहासिक लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में इस गीत ने लोगों में राष्ट्रभावना और एकता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ऐसे में लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान इसका गायन ऐतिहासिक और भावनात्मक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2047 का लक्ष्य, केंद्र में होगी युवा शक्ति

इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम भी भविष्य के भारत की तस्वीर से जुड़ी है।केंद्र सरकार के अनुसार समारोह में 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवा शक्ति के योगदान को प्रमुखता दी जाएगी।यह संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की बड़ी आबादी युवा है और अगले दो दशकों में देश की आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक दिशा तय करने में यही पीढ़ी सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी।युवा केवल विकसित भारत के लाभार्थी नहीं होंगे, बल्कि उसके निर्माण की सबसे बड़ी ताकत होंगे—यही संदेश समारोह की थीम के पीछे दिखाई देता है।

रक्षा सचिव आरके सिंह के अनुसार युवाओं की उपलब्धियों और उनके योगदान को रेखांकित करने की योजना पहले से ही समारोह का हिस्सा थी।उनका कहना है कि विकसित भारत की यात्रा में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और उन्हें इस विकास का लाभ भी मिलेगा।

लाल किले से देश को मिलेगा विकास का रोडमैप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करेंगे।हर वर्ष की तरह इस बार भी देश की नजर प्रधानमंत्री के संबोधन पर रहेगी।स्वतंत्रता दिवस का भाषण केवल सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि आने वाले समय के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का संकेत भी देता है।ऐसे में इस वर्ष खास निगाह इन मुद्दों पर रह सकती है—विकसित भारत का लक्ष्य,युवाओं के लिए रोजगार और अवसर,अर्थव्यवस्था की रफ्तार,तकनीकी आत्मनिर्भरता,रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता,महिला सशक्तीकरण,किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था,शिक्षा और कौशल विकास,और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका।

आसमान से बरसेगा फूल, गूंजेगा राष्ट्रगीत

इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में भारतीय वायुसेना भी विशेष अंदाज में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी।रक्षा सचिव के अनुसार प्रधानमंत्री के लाल किले पहुंचने के बाद ‘वंदे मातरम्’ का गायन होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और राष्ट्र को संबोधित करेंगे।इसके बाद भारतीय वायुसेना का एमआई-17 हेलीकॉप्टर लाल किले के ऊपर से उड़ान भरेगा।

‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हेलीकॉप्टर एक बैनर लेकर उड़ान भरेगा और समारोह में मौजूद लोगों पर फूलों की वर्षा करेगा।यानी इस बार लाल किले का आसमान भी राष्ट्रीय गीत और तिरंगे की भावना से रंगा नजर आएगा।आजादी की विरासत से विकसित भारत की यात्रा तक15 अगस्त का उत्सव केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है। यह उस सवाल का भी दिन है कि आजादी के बाद भारत ने क्या हासिल किया और अगले 25 वर्षों में देश को कहां पहुंचाना है।1947 में भारत ने राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल की थी।

आज चुनौती है—आर्थिक स्वतंत्रता, तकनीकी आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व।2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे। इसलिए अगले 21 वर्षों को भारत के लिए परिवर्तन के निर्णायक दौर के रूप में देखा जा रहा है।प्रधानमंत्री का ‘विकसित भारत’ का संकल्प इसी लंबी यात्रा का राजनीतिक और राष्ट्रीय लक्ष्य है।

तिरंगा सिर्फ ध्वज नहीं, करोड़ों सपनों की पहचान

तिरंगा जब किसी घर की छत पर लहराता है तो वह सिर्फ स्वतंत्रता दिवस का प्रतीक नहीं होता।

वह सैनिक के बलिदान की याद दिलाता है।

वह किसान के श्रम को सम्मान देता है।

वह वैज्ञानिक की उपलब्धि को सलाम करता है।

वह खिलाड़ी की जीत में गर्व बनकर शामिल होता है।

वह युवा के सपनों को दिशा देता है।

और वह संविधान, लोकतंत्र तथा राष्ट्रीय एकता के प्रति नागरिकों की प्रतिबद्धता का प्रतीक बनता है।

इसलिए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का वास्तविक अर्थ केवल घर पर झंडा लगाना नहीं, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है।

स्वतंत्रता सेनानियों को नमन, नई पीढ़ी से नए भारत का आह्वान

आजादी की लड़ाई में शामिल असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस भारत का सपना देखा था, वह केवल राजनीतिक रूप से स्वतंत्र देश नहीं था।वह ऐसा भारत था जो—शिक्षित हो, आत्मनिर्भर हो, न्यायपूर्ण हो, मजबूत हो और विश्व में सम्मान के साथ खड़ा हो।आज जब देश विकसित भारत का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, तब स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत और भविष्य की पीढ़ी के सपनों को एक सूत्र में जोड़ना आवश्यक है।यही 15 अगस्त की सबसे बड़ी भावना है।

इस बार का संदेश साफ—अतीत को नमन, भविष्य का निर्माण

लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया जाएगा।

‘वंदे मातरम्’ की गूंज सुनाई देगी।

आसमान में भारतीय वायुसेना का हेलीकॉप्टर दिखाई देगा।

फूलों की वर्षा होगी।

और देश प्रधानमंत्री के संबोधन को सुनेगा।

लेकिन इन सभी प्रतीकों के पीछे एक बड़ा संदेश होगा—आजादी हमें विरासत में मिली है, लेकिन विकसित भारत हमें बनाना है।इसके लिए केवल सरकार नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

हर घर तिरंगा से हर मन तिरंगा तकप्रधानमंत्री का नारा—

“हर घर तिरंगा, घर-घर तिरंगा, हर मन तिरंगा”दरअसल राष्ट्रीय पर्व को नागरिकों के साथ जोड़ने का संदेश है।15 अगस्त को जब देशभर में करोड़ों तिरंगे एक साथ लहराएंगे, तब वह दृश्य केवल देशभक्ति का प्रदर्शन नहीं होगा।वह उस भारत की तस्वीर होगी जो अपने अतीत को याद करते हुए भविष्य की ओर देख रहा है।

तिरंगा घर पर जरूर लहराएं, लेकिन उसके सम्मान को अपने आचरण में भी उतारें—यही स्वतंत्रता दिवस का सबसे बड़ा संकल्प होना चाहिए।स्वतंत्रता दिवस की असली तस्वीर यही है—शहीदों को नमन, तिरंगे को सलाम और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प।

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