बी के झा

टोरंटो, 25 अगस्त
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों में तनातनी अब खुली आर्थिक जंग की ओर बढ़ती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कनाडाई उत्पादों पर भारी टैरिफ की धमकी के बाद कनाडा ने भी पलटवार की तैयारी कर ली है। दोनों देशों के बीच शुक्रवार देर रात वॉशिंगटन में हुई आखिरी दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही। अब कनाडा मंगलवार को अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ का ऐलान कर सकता है।यह महज टैरिफ की लड़ाई नहीं रह गई है। इसके साथ दोनों देशों के बीच राजनीतिक तल्खी भी लगातार बढ़ रही है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप की नीति पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका कनाडा को अपने अधीनस्थ के रूप में देखना चाहता है, लेकिन उनका देश ऐसी किसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा।
कार्नी का दो टूक संदेश—कनाडा किसी का गुलाम नहीं
कार्नी ने कहा कि कनाडा अब केवल डॉलर के बदले डॉलर यानी समान अनुपात में जवाबी शुल्क लगाने की नीति तक सीमित नहीं रहेगा। जरूरत पड़ी तो ऐसे लक्षित कदम उठाए जाएंगे, जिनसे कनाडाई श्रमिकों और कारोबारियों के हित सुरक्षित रहें।उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर ऐसी शर्तें रखने का आरोप लगाया, जिन्हें स्वीकार करना कनाडा के आर्थिक हितों के खिलाफ होता। कार्नी के मुताबिक अमेरिकी शर्तें न केवल आर्थिक रूप से अनुचित थीं, बल्कि भविष्य में किसी नए व्यापार समझौते की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती थीं।
हालांकि कार्नी ने बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि अमेरिका अपने टैरिफ में पर्याप्त कमी करता है तो कनाडा भी अमेरिकी एल्युमीनियम, स्टील और मोटर वाहनों पर लगाए गए जवाबी शुल्क हटाने को तैयार हो सकता है।
ट्रंप की चेतावनी—’बहुत बुरे नतीजे भुगतने होंगे’
दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे। उन्होंने कनाडाई नेतृत्व को अपनी नीति बदलने की नसीहत देते हुए चेतावनी दी कि ऐसा नहीं हुआ तो कनाडा को मौजूदा टैरिफ से भी ‘बहुत बुरे’ नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।ट्रंप करीब 20 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई वाहनों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। इससे पहले भी ट्रंप कनाडा के साथ व्यापार असंतुलन को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं।
ट्रेड वॉर में कनाडा की राजनीति एकजुट
दिलचस्प यह है कि ट्रंप के दबाव के खिलाफ कनाडा की घरेलू राजनीति में असामान्य एकजुटता नजर आ रही है। ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड, जो कार्नी की लिबरल पार्टी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
फोर्ड ने कहा कि कनाडाई जनता अमेरिकी दबाव के आगे झुकने के बजाय आर्थिक मुश्किलें झेलने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक देश में माहौल बेहद गर्म है और हर नागरिक इस आर्थिक संघर्ष में खुद को शामिल मान रहा है।
ट्रंप का निजी हमला, फोर्ड का पलटवार
ट्रंप ने फोर्ड के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उन्हें उनके दिवंगत भाई रॉब फोर्ड की तुलना में कम प्रभावशाली और कम बुद्धिमान बताया। ट्रंप ने एक बार फिर प्रधानमंत्री कार्नी को ‘गवर्नर कार्नी’ कहकर संबोधित किया।फोर्ड ने पलटवार करते हुए कहा कि व्यक्तिगत अपमान उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। उनका संदेश साफ था—यदि अमेरिका आर्थिक मोर्चे पर मुकाबला चाहता है तो कनाडा तैयार है।
आर्थिक रिश्तों पर पड़ेगा सीधा असर
अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच टैरिफ युद्ध लंबा खिंचा तो इसका असर सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं रहेगा। ऑटोमोबाइल, स्टील, एल्युमीनियम और कृषि समेत कई क्षेत्रों में कारोबार की लागत बढ़ सकती है और इसका दबाव कंपनियों से होते हुए उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंगलवार को कनाडा का जवाब कितना कड़ा होता है। यदि ओटावा ने व्यापक जवाबी शुल्क लगाया और वॉशिंगटन ने उसके बाद और टैरिफ बढ़ाए,
तो उत्तरी अमेरिका की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच चल रही यह तनातनी एक पूर्ण आर्थिक युद्ध का रूप ले सकती है।
