पश्चिमी यूपी में उतरी BJP की ‘तिकड़ी’, 71 सीटों पर मिशन-2027 का मेगा प्लान; नितिन नवीन के साथ योगी-पंकज चौधरी की जोड़ी, Gen-Z से संवाद से लेकर 4,800 शक्ति केंद्रों तक सीधी पकड़; विपक्षी घेरे को तोड़ने की तैयारी

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली/मेरठ, 21 सितंबर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 भले अभी दूर हों, लेकिन सियासी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। पश्चिमी यूपी को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दो दिवसीय दौरे पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश पहुंच रहे हैं। उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद रहेंगे। यह दौरा महज संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि मेरठ और सहारनपुर मंडल की 71 विधानसभा सीटों पर पार्टी की जमीनी तैयारी को परखने और उसे चुनावी मोड में लाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।पश्चिमी यूपी में बीजेपी की यह ‘तिकड़ी’ एक साथ कई मोर्चों पर काम करेगी—युवा, किसान, संगठन, जनप्रतिनिधि और बूथ स्तर का फीडबैक। यानी ऊपर से लेकर नीचे तक संगठन की पूरी मशीनरी को एक साथ सक्रिय करने का खाका तैयार किया गया है।

पश्चिम में विपक्ष की हलचल के बीच BJP का शक्ति प्रदर्शन

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति पहले ही गतिविधियों से गर्म है। मुजफ्फरनगर में आरएलडी प्रमुख चौधरी जयंत सिंह सामाजिक समरसता सम्मेलन के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। मेरठ के सरधना में सपा विधायक अतुल प्रधान इकरा हसन के साथ मुस्लिम मतदाताओं के बीच सक्रिय दिखाई दिए हैं। वहीं किठौर में शाहिद मंजूर के पीडीए सम्मेलन ने भी सियासी संदेश देने की कोशिश की।ऐसे समय में बीजेपी का पश्चिमी यूपी में बड़ा संगठनात्मक अभियान महत्वपूर्ण हो जाता है। पार्टी की कोशिश है कि चुनाव से काफी पहले ही बूथ से लेकर विधानसभा स्तर तक संगठन की स्थिति स्पष्ट हो जाए और जहां कमजोरी है, वहां समय रहते काम शुरू किया जा सके।सोमवार को मेरठ, मंगलवार को सहारनपुर नितिन नवीन सोमवार को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के रास्ते मेरठ पहुंचेंगे।

उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी रहेंगे। दौरे का पहला बड़ा पड़ाव सुभारती यूनिवर्सिटी होगा, जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष करीब 2 हजार छात्र-छात्राओं के साथ ‘युवा संवाद’ करेंगे।इस संवाद में एआई, शिक्षा, महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों पर युवाओं के सवाल लिए जाएंगे।

खास बात यह है कि कार्यक्रम को पार्टी कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप से अलग रखा गया है। मंच पर नितिन नवीन के साथ योगी आदित्यनाथ और पंकज चौधरी मौजूद रहेंगे।यह कार्यक्रम सिर्फ युवाओं से संवाद तक सीमित नहीं है। बीजेपी की नजर उस पीढ़ी पर है जो 2027 के चुनावी माहौल में पहली बार या हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में मतदान की भूमिका में होगी। इसलिए Gen-Z से सीधा संवाद पार्टी की व्यापक रणनीति का हिस्सा दिखाई देता है।

4,800 शक्ति केंद्रों तक पहुंचेगा संगठन का संदेश

युवा संवाद के बाद बीजेपी का फोकस सीधे संगठन की रीढ़ पर होगा। नितिन नवीन पश्चिम क्षेत्र के करीब 4,800 शक्ति केंद्र संयोजकों को संबोधित करेंगे।शाम को मेरठ के ब्रावुरा रिसोर्ट में पश्चिम क्षेत्र के पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक प्रस्तावित है। इसमें मंडल अध्यक्षों और शक्ति केंद्र संयोजकों के साथ संगठन की जमीनी स्थिति पर चर्चा होगी। नई क्षेत्रीय टीम के साथ मंथन के अलावा पुराने पदाधिकारियों और संगठन से जुड़े अनुभवी नेताओं से भी फीडबैक लिया जाएगा।नितिन नवीन पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्षों, पूर्व जिलाध्यक्षों, महानगर अध्यक्षों, सचिवों, पुरानी क्षेत्रीय टीम और विभिन्न मोर्चों के अध्यक्षों के साथ भी बातचीत करेंगे। इसके बाद पश्चिमी यूपी की 14 लोकसभा सीटों और 71 विधानसभा सीटों से जुड़े सांसदों, विधायकों, एमएलसी और राज्यसभा सदस्यों के साथ विस्तृत चर्चा होगी।

71 सीटें क्यों हैं BJP के लिए अहम?

पश्चिमी यूपी को उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली, बुलंदशहर और गाजियाबाद सहित कई जिलों में फैली 71 विधानसभा सीटों पर किसान, युवा, जातीय समीकरण, शहरी मतदाता और सामाजिक गठजोड़ चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।यही वजह है कि बीजेपी यहां संगठनात्मक स्तर पर कोई खाली जगह नहीं छोड़ना चाहती। पार्टी की रणनीति केवल बड़े नेताओं की सभाओं तक सीमित नहीं है। बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और विधानसभा स्तर तक संगठन को सक्रिय रखने पर जोर है।

किसान और युवा—दो बड़े फोकस

पश्चिमी यूपी की राजनीति में किसान मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। 2020-21 के किसान आंदोलन के बाद इस क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा हुई। ऐसे में बीजेपी के लिए किसान वर्ग से संवाद और स्थानीय मुद्दों का फीडबैक महत्वपूर्ण है।दूसरी तरफ युवाओं के बीच रोजगार, शिक्षा, महंगाई और तकनीक जैसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा हैं। सुभारती यूनिवर्सिटी का युवा संवाद इसी व्यापक रणनीति से जोड़कर देखा जा सकता है।सरकार की योजनाओं का ‘ग्राउंड ऑडिट’बीजेपी के इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जमीनी पहुंच का फीडबैक लेना भी है।

पार्टी संगठन यह जानने की कोशिश करेगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितना पहुंच रहा है और स्थानीय स्तर पर किन समस्याओं के कारण लोगों में नाराजगी या असंतोष पैदा हो सकता है।

जनप्रतिनिधियों और संगठन के बीच समन्वय भी बैठक का अहम विषय रहेगा। पार्टी के लिए चुनौती यह है कि सरकार की उपलब्धियों का राजनीतिक संदेश बूथ स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंचे और संगठन को स्थानीय समस्याओं की वास्तविक जानकारी मिलती रहे।

विपक्ष के बदलते समीकरण पर भी नजर

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पश्चिमी यूपी में विपक्षी दलों के बीच सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को लेकर सक्रियता बढ़ी है। समाजवादी पार्टी, आरएलडी और अन्य विपक्षी दल अपने-अपने आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।बीजेपी के लिए पश्चिमी यूपी में चुनौती सिर्फ विपक्षी दलों की सक्रियता नहीं, बल्कि अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच बदलती राजनीतिक प्राथमिकताओं को समझना भी है। यही कारण है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष तक का एक साथ मैदान में उतरना संगठनात्मक संदेश को और स्पष्ट करता है।

सहारनपुर में दूसरे दिन की रणनीति

मेरठ के बाद नितिन नवीन 22 सितंबर को सहारनपुर पहुंचेंगे। उनके साथ योगी आदित्यनाथ और पंकज चौधरी भी रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक और संगठनात्मक दोनों गतिविधियां प्रस्तावित हैं। मेरठ में औघड़नाथ मंदिर में दर्शन के बाद टीम सहारनपुर की ओर रवाना होगी।सहारनपुर में भी संगठनात्मक बैठकों के जरिए क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति, संगठन की सक्रियता और आगामी चुनाव के लिए तैयारियों का जायजा लिया जाएगा।

‘मिशन-2027’ की शुरुआत या संगठन का बड़ा रिहर्सल?

बीजेपी के लिए यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव से करीब एक साल पहले पार्टी अपने संगठन की ताकत और कमजोरियों को पहचानने की कोशिश कर रही है। 71 विधानसभा सीटों, 14 लोकसभा क्षेत्रों, 19 संगठनात्मक जिलों और हजारों शक्ति केंद्रों तक एक साथ पहुंच बनाने का मतलब साफ है—पार्टी चुनावी तैयारी को सिर्फ प्रदेश मुख्यालय की बैठकों तक सीमित नहीं रखना चाहती।

नितिन नवीन की भूमिका संगठन को गति देने की है, योगी आदित्यनाथ सरकार का चेहरा और शासन का संदेश लेकर मैदान में हैं, जबकि पंकज चौधरी प्रदेश संगठन को जोड़ने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।पश्चिमी यूपी में यह तिकड़ी अब एक साथ जिस तरह संगठन की नब्ज टटोलने उतर रही है, उससे 2027 की लड़ाई के लिए इस क्षेत्र की अहमियत साफ दिखाई देती है।

सवाल अब यह नहीं है कि चुनावी तैयारी कब शुरू होगी—सवाल यह है कि पश्चिमी यूपी की 71 सीटों पर कौन-सा राजनीतिक समीकरण कितना टिकाऊ साबित होता है।

एन एस के विश्लेषण:

पश्चिमी यूपी में बीजेपी का यह अभियान फिलहाल किसी चुनावी नतीजे का संकेत नहीं, बल्कि संगठनात्मक तैयारी और राजनीतिक संपर्क बढ़ाने की स्पष्ट कोशिश है।

आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि युवा संवाद, बूथ नेटवर्क, किसान संपर्क और जनप्रतिनिधियों के फीडबैक को पार्टी किस तरह अपनी चुनावी रणनीति में बदलती है।

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